40 की उम्र के बाद महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा कैसे बढ़ता है? क्या इसका मेनोपॉज से कोई कनेक्शन है?
उम्र के साथ हार्ट अटैक जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ना आम हो सकता है, लेकिन महिलाओं के मामलों में स्थिति थोड़ी अलग हो जाती है और खासतौर पर 40 की उम्र के बाद उनके शरीर में कई ऐसे बदलाव आ सकते हैं जो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकते हैं।
अभी भी ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि हार्ट अटैक का खतरा पुरुषों में ज्यादा होता है और महिलाओं में तो बहुत कम होता है। लेकिन अगर हम महिलाओं की 40 की उम्र के बाद उनके स्वास्थ्य की बात करें तो आपको बता दें कि हार्ट अटैक का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। खासतौर पर मेनोपॉज के आसपास और उसके बाद महिलाओं में हार्ट अटैक व हार्ट से जुड़ी अन्य बीमारियां होने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. अमर सिंघल के अनुसार महिलाओं में 40 की उम्र के बाद हार्ट अटैक का खतरा बढ़ने के पीछे एक बड़ा कारण हार्मोन में बदलाव होता है। 40 से 45 की उम्र के बाद महिलाओं में मेनोपॉड शुरू होने लग जाता है और इसलिए यह भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ने का एक कारण हो सकता है।
मेनोपॉज का हार्ट अटैक से कनेक्शन
महिलाओं का शरीर में जो एस्ट्रोजन नाम का हार्मोन होता है, वह रक्त वाहिकाओं के लिए काफी अच्छा माना जाता है क्योंकि वह उन्हें लचीला बनाए रखने में मदद करता है और साथ ही साथ यह हार्मोन गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में भी मदद करता है। लेकिन जब मेनोपॉज धीरे-धीरे शुरू होने लगता है, तो महिला के शरीर में इस हार्मोन का लेवल भी कम होने लगता है। इसके कारण बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने, धमनियों में फैट जमा होने और ब्लड प्रेशर ज्यादा होने आदि का खतरा भी बढ़ जाता है। यही बदलाव आगे चलकर हार्ट अटैक और अन्य हृदय रोगों का खतरा बढ़ाते हैं।
मेनोपॉज से जुड़ी अन्य स्थितियां
इसके अलावा मेनोपॉज से महिलाओं के शरीर में आने वाले कुछ अन्य बदलाव भी हैं, जो कहीं न कहीं हार्ट के लिए भी नुकसानदायक हो सकते हैं जैसे -
- वजन बढ़ना
- पेट के आसपास चर्बी जमा होना
- नींद की कमी
- तनाव रहने लगना
- शारीरिक गतिविधियां कम होना
ये सभी बदलाव किसी भी दृष्टि से हार्ट हेल्थ के लिए अच्छे नहीं माने जाते हैं। इसके अलावा यदि महिला को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, थायरॉइड की समस्या या धूम्रपान जैसी आदतों का जोखिम है, तो हार्ट डिजीज की संभावना और अधिक बढ़ जाती है।
क्या महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अलग होते हैं?
डॉ. सिंघल ने बताया कि कई बार यह भी देखा गया है कि महिलाओं में हार्ट अटैक के कुछ लक्षण पुरुषों से अलग होते हैं जो इस प्रकार हैं -
- अत्यधिक थकान
- सांस फूलना
- गर्दन, पीठ, कंधे या जबड़े में दर्द
- चक्कर आना
- मतली या अचानक कमजोरी
उम्र के साथ-साथ इन लक्षणों को कई बार सामान्य थकान, गैस या मेनोपॉज से ही जुड़ी समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
40 के बाद हार्ट हेल्थ का ध्यान रखना जरूरी
हर महिला को 40 की उम्र के बाद अपनी हार्ट हेल्थ का खास ध्यान रखने की सलाह दी जाती है और इसके लिए निम्न बातों का जरूर ध्यान रखें -
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें
- ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल को मैनेज रखें
- संतुलित आहार लें और पर्याप्त पानी पीएं
- नियमित व्यायाम लें
- पर्याप्त नींद लें
- अगर स्ट्रेस है तो उसे मैनेज करें
साथ ही किसी भी असामान्य लक्षण को हल्के में नहीं लेना चाहिए। मेनोपॉज जीवन का एक स्वाभाविक चरण है, लेकिन इसके दौरान होने वाले शारीरिक बदलावों को समझकर और समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाकर हृदय रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जागरूकता और नियमित जांच ही महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य की सबसे बड़ी सुरक्षा है।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल महिलाओं में हार्ट अटैक के खतरे से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।