
डॉ. अनुपम बिस्वास
डॉ. अनुपम बिस्वास नोएडा के एक प्रमुख एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबिटोलॉजिस्ट हैं। उन्हें इस क्षेत्र ... Read More
Written By: Dr. Anupam Biswas | Published : February 2, 2026 7:55 AM IST
How many types of thyroid conditions are there: थायराइड आज लाखों भारतीयों के लिए एक गंभीर समस्या बन चुका है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की बेवसाइट पर छपी एक रिपोर्ट बताती है कि भारत की महिलाएं थायराइड जैसे रोग से ज्यादा परेशान हैं। हैरानी का बात तो यह है कि भारत जैसे देश में लोगों को सालों तक इस बात की जानकारी नहीं होती है कि उन्हें थायराइड है।
10 में से 8 थायराइड के मामलों में इसके लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं और सामान्य कमजोरी, तनाव या हार्मोनल बदलाव समझकर अनदेखा कर दिए जाते हैं। अक्सर अब थायराइड की बात होती है तो लोग इसे सिर्फ थायराइड ही मानते हैं। लेकिन मुख्य रूप से थायराइड 4 प्रकार का होता है। मरीज को कौन सा थायराइड है इसकी जानकारी उन्हें पहले से हो, तो इलाज ज्यादा आसान हो जाता है।
थायराइड मुख्य रूप से चार प्रमुख प्रकार का होता है:
किसी व्यक्ति के शरीर में थायराइड ग्रंथि जब जरूरत से ज्यादा काम करने लगती है, तो इस स्थिति को हाइपोथायराइडिज्म कहा जाता है। हाइपोथायराइडिज्म की परेशानी अक्सर खाने में आयोडीन की कमी, ऑटोइम्यून रोग (हाशिमोटो थायराइडाइटिस), रेडिएशन थेरेपी और किसी दवा का लंबे समय तक सेवन करने के कारण देखी जाती है। कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के समय होने वाले हार्मोनल बदलावों की वजह से भी हाइपोथायराइडिज्म की समस्या होना आम है।
हाइपोथायराइडिज्म की खासियत ही यही है कि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। यही कारण है कि 10 में से 8 लोग हाइपोथायराइडिज्म के शुरुआती लक्षणों को सामान्य मानकर इग्नोर कर देते हैं। हाइपोथायराइडिज्म के लक्षणों में शामिल हैः
किसी व्यक्ति के शरीर थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन का निर्माण करने लगता है, तो इसे हाइपरथायराइडिज्म कहा जाता है।हाइपरथायराइडिज्म जैसी स्थिति ग्रेव्स डिजीज, ज्यादा मात्रा में आयोडीन का सेवन करने, थायराइड की दवा खुराक से ज्यादा लेने के कारण देखी जाती है। कुछ मामलों में प्रेग्नेंसी में होने वाले हार्मोनल बदलावों की वजह से भी हाइपरथायराइडिज्म हो सकता है।
थायराइडाइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें थायराइड ग्रंथि में सूजन आ जाती है। इसमें कभी हार्मोन ज्यादा बनते हैं और कभी कम। आसान भाषा में कहे तो थायराइडाइटिस के मरीजों में कभी थायराइड हार्मोन ज्यादा बनने लगता है, तो कभी कम बनता है। थायराइडाइटिस को भी 3 भागों में विभाजित किया गया है। हाशिमोटो थायराइडाइटिस, सबएक्यूट थायराइडाइटिस और पोस्टपार्टम थायराइडाइटिस शामिल है।
थायराइड के इस प्रकार में थायराइड की ग्रंथि का आकार बहुत तेजी से बढ़ता है। गोइटर के कारण गर्दन में सूजन नजर आने लगती है। गोइटर के कारण नजर आने वाली सूजन इतनी ज्यादा होती है, कि लोगों को भी नजर आने लगती है।
इनके अलावा थायराइड का एक प्रकार थायराइड नोड्यूल्स भी हैं। थायराइड में बनने वाली गांठों को नोड्यूल्स कहा जाता है। भारत में सामने आने वाले 10 में से 8 मामलों में थायराइड नोड्यूल्स में बनने वाली गांठ कैंसर रहित होती है, लेकिन इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है।
किसी व्यक्ति को अगर थायराइड है और समय पर उसका इलाज न किया जाए, तो भविष्य में उसे हार्ट डिजीज, इनफर्टिलिटी, प्रेग्नेंसी कंसीव करने में परेशानी, मानसिक रोग, हड्डियां कमजोर होने की समस्या हो सकती है। इसलिए थायराइड को मामूली बीमारी बिल्कुल न समझें। आपके परिवार में थायराइड का इतिहास रहा है, तो डॉक्टर की सलाह पर अपना थायराइड टेस्ट जरूर करवाएं।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।