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Types of Congenital Heart Defect : जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Defect) को ही सामान्य भाषा में 'दिल में छेद कहा जाता है। मुख्य रूप से दिल में छेद जन्म के समय से ही होती है, जो दिल के अलग-अलग हिस्सों में हो सकती है। दिल के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले छेद को अलग-अलग नाम से जाना जाता है। दिल में छेद की स्थिति के हिसाब से इसके प्रकार अलग किए गए हैं। इनमें अलग-अलग खतरे होते हैं। इस विषय की अधिक विस्तार से जानकारी के लिए हमने दिल्ली के पटपड़गंज स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में कार्डियक साइंसेज के सीनियर डायरेक्टर डॉ. वैभव मिश्रा से बातचीत की है। आइए डॉक्टर वैभव से जानते हैं दिल में छेद कितने प्रकार के होते हैं और कौन सा छेद सबसे अधिक खतरनाक होता है?
डॉक्टर वैभव का कहना है कि दिल में छेद मुख्य रूप से 4 तरह के होते हैं, जिसमें एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD), वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD), एट्रियोवेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (AVSD), पेटेंट डक्टस आर्टिरियोसस (PDA) शामिल हैं।
इसमें दिल के ऊपरी दो कक्षों (दायां और बायां एट्रियम) के बीच छेद होता है। इससे ऑक्सीजन युक्त और बिना ऑक्सीजन वाला खून आपस में मिल जाता है। हल्का ASD कई बार बिना लक्षण के रहता है, ऐसे में इसका पता काफी देर बाद चलता है।
एसडी के लक्षण बिना काम के ही जल्दी थक जाना, काफी ज्यादा सांस फूलना, बार-बार इंफेक्शन होना, बच्चों का वजन काफी कम होना, इत्यादि लक्षण हो सकते हैं। अगर एएसडी छोटा हो, तो कम खतरनाक होता है। बड़ा छेद हो तो दिल और फेफड़ों पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में यह काफी खतरनाक स्थिति धारण कर सकता है।
यह दिल के निचले दो कक्षों (वेंट्रिकल) के बीच छेद होता है। यह सबसे आम प्रकार है। वीएसडी छोटे से लेकर बड़े आकार की होती है। बच्चे की स्थिति के हिसाब से इलाज होता है।
मध्यम से बड़े आकार के VSD में बच्चे को दूध पीने में दिक्कत, वजन न बढ़ना और सांस तेज चलना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते ही डॉक्टर 1 साल से कम उम्र से पहले ही सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।
इसमें दिल के बीच का हिस्सा पूरी तरह से विकसित नहीं होता। यह अक्सर डाउन सिंड्रोम से जुड़ा होता है और इसमें वाल्व की समस्या भी साथ में होती है। इसमें स्थिति में बच्चे को सांस लेने में परेशानी, दूध पीने में दिक्कत, पसीना आना या फिर वजन न बढ़ने जैसी शिकायत होती है। वहीं, कुछ बच्चों का नाखून नीला दिखाई देता है।
यह पूरी तरह से सेप्टम का छेद नहीं है, लेकिन जन्म के बाद बंद होने वाली नली खुली रह जाती है, जिससे खून का गलत प्रवाह होता है। इसका इलाज छेद के आकार और लक्षणों पर निर्भर करता है, कुछ छेद अपने आप बंद हो जाते हैं, जबकि कुछ में दवा, कैथेटर प्रक्रिया या सर्जरी की जरूरत पड़ती है। समय पर जांच और इलाज से बच्चा या मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार VSD सबसे ज्यादा खतरनाक प्रकार माना जाता है। मुख्य रूप से अगर समय पर इलाज न हो, तो यह घातक रूप धारण कर सकता है। इसमें हार्ट फेल होने का रिस्क बढ़ जाता है। साथ ही फेफड़ों में प्रेशर भी काफी ज्यादा बढ़ सकता है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।