डेंगू से पीड़ित बच्चों में प्लेटलेट्स कितनी कम होना खतरनाक हो सकता है?

बच्चे ज्यादा घर से बाहर रहते हैं, ऐसे में उन्हें डेंगू होने का खतरा अधिक रहता है। बच्चों की प्लेटलेट्स का ध्यान रखें और उन्हें डेंजर लाइन से नीचे न जाने दें।

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Written By: Vidya Sharma | Published : May 15, 2026 6:08 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Nimitt Nagda

Dengue Mai Bacho Ki Platelets Kitni Honi Chahiye: गर्मियां तो चल रही रही हैं, लेकिन बीच-बीच में बारिश और जगह-जगह इकट्ठा होता पानी, डेंगू के मच्छरों को अपनी जनसंख्या बढ़ाने का पूरा-पूरा मौका दे रहा है। खासकर बच्चों को तो यह जल्दी अपनी चपेट में लेता है, क्योंकि वह घर से बार निक्कर और हाफ टी-शर्ट में घूमते हैं। अगर बच्चों को डेंगू हो जाए तो प्लेटलेट्स कम होना आम बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब अगर प्लेटलेट्स का स्तर बहुत ज्यादा गिर जाता है, क्या होता है? या प्लेटलेट्स का कितना कम होना खतरनाक साबित हो सकता है?

इन्हीं सवालों का जवाब पाने के लिए हमने ज़ायनोवा शाल्बी हॉस्पिटल, मुंबई के कंसल्टिंग फिजिशियन डॉक्टर निमित्त नागड़ से बात की। उन्होंने बताया कि अगर बच्चे की प्लेटलेट्स बहुत ज्यादा गिर जाए तो  इससे ब्लीडिंग और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टर ने इस विषय पर विस्तार से बताया कि आखिर बच्चों को डेंगू होना चिंता का विषय क्यों है, प्लेटलेट्स क्या है और क्यों जरूरी है आदि-आदि।

बच्चों में डेंगू क्यों है चिंता का कारण?

डेंगू एक मच्छरों से फैलने वाला वायरल इंफेक्शन है, जो सिर्फ बड़ों में ही नहीं बल्कि बच्चों में भी तेजी से देखा जा रहा है, खासकर मानसून और उसके बाद के मौसम में। बुखार, शरीर में दर्द, उल्टी, कमजोरी और त्वचा पर रैशेज जैसे लक्षण बच्चों में दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में माता-पिता को तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

इसके अलावा, कई बच्चों में प्लेटलेट्स की संख्या भी कम होने लगती है। हालांकि डेंगू में प्लेटलेट्स कम होना सामान्य माना जाता है, लेकिन हर बच्चे को प्लेटलेट्स चढ़ाने या अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती।

प्लेटलेट्स क्या हैं और यह क्यों जरूरी हैं?

डॉक्टर बताते हैं कि बच्चों में प्लेटलेट्स कम होने पर माता-पिता अक्सर घबरा जाते हैं और बच्चे के जल्दी ठीक होने को लेकर चिंता करने लगते हैं। प्लेटलेट्स रक्त के छोटे-छोटे पार्टिकल्स होते हैं, जो शरीर में ब्लीडिंग रोकने और खून को जमाने में मदद करते हैं।

डेंगू शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

डेंगू वायरस बोन मैरो के कार्य को प्रभावित कर सकता है और प्लेटलेट्स को खत्म कर सकता है। सामान्य तौर पर प्लेटलेट्स की संख्या 1.5 लाख से 4.5 लाख के बीच होती है। लेकिन गंभीर मामलों में डेंगू से पीड़ित बच्चों में प्लेटलेट्स 50,000 प्रति माइक्रोलीटर से भी नीचे जा सकते हैं।

कब खतरनाक हो जाता है प्लेटलेट्स का स्तर?

डॉक्टर कहते हैं कि डेंगू में हल्के या मध्यम स्तर तक प्लेटलेट्स कम होना आम बात है और सही हाइड्रेशन तथा डॉक्टर की निगरानी में यह सामान्य रूप से ठीक भी हो सकता है। लेकिन जब प्लेटलेट्स 50,000 से नीचे जाने लगते हैं, तो बच्चे की लगातार निगरानी जरूरी हो जाती है।

प्लेटलेट्स कम होने पर क्या लक्षण दिखते हैं?

डॉक्टर निमित्त कहते हैं अगर प्लेटलेट्स 20,000 से नीचे चले जाएं और साथ में ब्लीडिंग के लक्षण भी दिखाई दें, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में बच्चे को नाक से खून आना, मसूड़ों से ब्लीडिंग, उल्टी या मल में खून आना, शरीर पर ज्यादा नीले निशान पड़ना, अत्यधिक कमजोरी या सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर डेंगू के मामलों में बच्चों में इंटरनल ब्लीडिंग, शॉक और अंगों से जुड़ी जटिलताएं भी देखी जा सकती हैं।

डेंगू के इन गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज न करें

अगर बच्चे को लगातार उल्टी, तेज पेट दर्द, अत्यधिक नींद आना, हाथ-पैर ठंडे पड़ना, पेशाब कम आना, सांस लेने में तकलीफ या शरीर के किसी हिस्से से ब्लीडिंग हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे को समय पर मेडिकल सहायता मिले।

किन कारणों से बढ़ सकता है खतरा?

डिहाइड्रेशन, इलाज में देरी, बार-बार उल्टी होना, कमजोर इम्यूनिटी और पहले से मौजूद बीमारियां बच्चों में डेंगू को ज्यादा गंभीर बना सकती हैं। इसके अलावा, माता-पिता को बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा देने से बचना चाहिए। गलत दवाइयां बच्चे की स्थिति को और खराब कर सकती हैं।

डेंगू का इलाज और देखभाल

ज्यादातर बच्चे समय पर इलाज मिलने पर ठीक हो जाते हैं। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ, आराम, बुखार को नियंत्रित रखना और प्लेटलेट्स व हाइड्रेशन की नियमित जांच डेंगू से रिकवरी में मदद करती है। प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत केवल तब पड़ती है जब प्लेटलेट्स बहुत ज्यादा कम हो जाएं और साथ में सक्रिय ब्लीडिंग भी हो रही हो।

बच्चों को डेंगू से बचाने के टिप्स

बच्चों को डेंगू से बचाने के टिप्स बच्चों को डेंगू से बचाने के टिप्स

माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सही देखभाल और समय पर इलाज से बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होकर अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकता है।

डिस्क्लेमर- याद रखें कि डेंगू से पीड़ित बच्चों के लिए समय पर इलाज, पर्याप्त हाइड्रेशन और सही मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है। इसके अलावा खुद कोई घरेलू उपाय आजमाने की बजाय डॉक्टर के प्रीकॉशन्स पर ध्यान दें।

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