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Khana Pachane Mai Kitna Time Lagta hai: हम सभी रोज न जाने कितनी तरह का खाना खाते हैं और अपने पेट के साथ नाइंसाफी करते हैं। जी हां ये नाइंसाफी नहीं तो क्या है? बिना ये जानें कि आप जो खा रहे हैं पेट को उसे पचाने में कितनी दिक्कत व समय लगता है, आप जो चाहे ठूस लेते हैं। आखिर में क्या होता है, कभी पेट दर्द तो कभी मल त्यागने में दिक्कत। आपको इस बार में पूरा ज्ञान होना चाहिए कि हमारे द्वारा खाए जाने वाले अलग-अलग खाद्य पदार्थों का डाइजेशन प्रोसेस कैसा है।
बहुत ही कम लोगों को अपने पाचन से जुड़ी बातों के बारे में पता होता है। इसलिए हमारे पास पूरी जानकारी नहीं होती है तो हम कुछ भी खाते हैं और फिर तबीयत खराब हो जाती है। इसी बात को जानने के लिए हमने नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट मेडिकल गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉक्टर महेश गुप्ता से बात की। उन्होंने हमें शरीर के लीक्वीड, सेमी लिक्विड और हार्ड फूड को पचाने से जुड़ी बहुत ही सार्थक जानकारी उपलब्ध करवाई। आइए हम विस्तार से जानते हैं उन्होंने क्या बताया।
हम तरह का खाना पचाने की एक समय अवधी होती है, जिसे अंतर्गत हमारा शरीर पेट में गए भोजन को पचाता है। जब हमने डॉक्टर से तलर आहार के विषय पर बात की और पूछा कि इसे पचाने में कितना समय लगता है तो उन्हें ये बताया-
तरल आहार वे होते हैं जिन्हें आसानी से पिया जा सके- जैसे पानी, सूप, जूस, पतला दलिया या पतली खिचड़ी। इनमें फाइबर कम होता है और इन्हें शरीर जल्दी पचा लेता है। जब शरीर को हाइड्रेशन या आराम की जरूरत होती है, तो ये बहुत ही फायदेमंद होते हैं।
अगर आप किसी भी तरह के लिक्विड फूड या ड्रिंक का सेवन करते हैं तो उसे पचने में 30 से 60 मिनट का समय लगता है। पानी और जूस जैसे साफ तरल तेजी से पचते हैं। जबकि दलिया या दाल का सूप थोड़ा समय लेते हैं।
कई बार ऐसा होता है कि कुछ लोगों के पेट में लिक्विड फूड रुक नहीं पाता है या पच नहीं पाता है। ऐसे में पेट फूलना, गैस, उल्टी या दस्त हो सकते हैं। लंबे समय तक ऐसा रहे तो कमजोरी और डिहाइड्रेशन की आशंका होती है। इसलिए जब दस्त लगते हैं तो हमें कहा जाता है कि सिर्फ पतला दलिया ही खाएं।
कुछ लोग अपने इनटेक में लीक्वीड ज्यादा रखते है, लेकिन ये बीमारी, थकान, सर्जरी के बाद, गर्मी में या वर्कआउट के बाद लिया जाना फायदेमंद होता है। उपवास के दौरान भी ये अच्छा विकल्प हैं।
डायबिटीज के मरीज मीठे जूस से बचें। किडनी की बीमारी में भी तरल की मात्रा नियंत्रित होनी चाहिए। लगातार सिर्फ तरल आहार लेने से पोषण की कमी हो सकती है। इसलिए ज्यादा मात्रा में भी लिक्विड का सेवन न करें।
कई बार हमारे पेट में ना ही लिक्वीड पचाने की क्षमता होती है और न ही ठोस पदार्थ, ऐसे में डॉक्टर से सलाह मिलती है कि आप सेमी सॉलिड फूड्स पर ध्यान दें और उन्हें अपनी डाइट में शामिल करें। आइए आपको बताते हैं डॉक्टर महेश ने इस विषय पर क्या बताया है।
डॉक्टर ने बताया कि ऐसे खाद्य पदार्थ जो न पूरी तरह ठोस होते हैं, न ही पूरी तरह तरल, उन्हें सेमी सॉलिड फूड कहा जाता है। जैसे खिचड़ी, दलिया, उबले अंडे, दही, उबली सब्जियां या मैश किए आलू आदि।
इन सभी सेमी सॉलिड फूड को पचाने के लिए हमारा शरीर 1 से 2 घंटे लेता है। अगर फैट या फाइबर ज्यादा हो तो समय थोड़ा बढ़ सकता है। ये इसपर भी निर्भर करता है कि आप क्या और कितना खा रहे हैं। इसलिए कहा जाता है कि उतना ही खाओ जितना शरीर पचा सके।
इस तरह का सेमी सॉलिड फूड न पचे तो पेट भारी लग सकता है और गैस या कब्ज हो सकती है। ये सभी संकेत बताते हैं कि पाचन धीमा है या एंजाइम कम है।
डॉक्टर ने बताया कि बीमारी के बाद, सर्जरी से उबरते समय, दांत की परेशानी या जब आपका पाचन कमजोर हो, तब सेमी सॉलिड खाना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। यह शरीर को आराम देता है और साथ ही ऊर्जा भी।
डॉ. महेश ने बताया कि ‘अगर डॉक्टर ने सिर्फ तरल आहार की सलाह दी हो, या अगर पेट खराब है। दूध से बनी चीजें लैक्टोज इन्टॉलरेंस वालों के लिए दिक्कत दे सकती हैं। ऐसी स्थिति में इस तरह की चीजें खाने से बचें।
कई बार आपने महसूस किया होगा कि कुछ खाद्य पदार्थों को खाने में बहुत ही परेशानी होती है और अगर जैसे-तैसे या शौक में खा लें तो उन्हें पचाते समय और मल के रूप में त्यागते समय परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में क्या किया जाना चाहिए और इस तरह के ठोस भोजन को पचाने में शरीर कितना समय लेता है, आइए डॉक्टर से जानते हैं।
ऐसे खाद्य पदार्थ जिन्हें चबाना जरूरी होता है- जैसे रोटी, चावल, सब्जियां, दालें, मांस, फल या मेवे। इनमें प्रोटीन, फाइबर और पोषक तत्व भरपूर होते हैं, जो शरीर और पाचन को बेहतर बनाते हैं।
इस तरह का ठोस खाने खाने के बाद आपके शरीर को 3 से 5 घंटे चाहिए होते हैं, ताकि अंदर गए भोजन को वो पचा सके। इसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर इन्हें धीरे-धीरे पचने वाला बनाते हैं, जिससे शरीर को स्थायी ऊर्जा मिलती है।
हार्ड फूड कई लोगों के लिए खाने और पचाने में समस्या पैदा कर सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर ने बताया कि इस स्थिति में ‘एसिडिटी, पेट दर्द, गैस या कब्ज हो सकती है। साथ ही लंबे समय तक ऐसा रहने पर पाचन तंत्र और पोषण दोनों प्रभावित होते हैं।’
जब व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ हो, सक्रिय जीवन शैली हो और पाचन ठीक हो, जब इस तरह का हार्ड फूड खाना आपके लिए ठीक है। यह भोजन मांसपेशियों को मजबूत करता है और इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करता है।
बुखार, दस्त, उल्टी, सर्जरी या आंतों में सूजन जैसी स्थितियों में इसे टालना चाहिए। उस समय तरल या अर्द्ध-ठोस आहार यानी कि सेमी बेहतर होता है।
खाना न पचने के कई लक्षण हो सकते हैं, जिनमें पेट दर्द, पेट फूलना, अपच, सीने में जलन, मतली, उल्टी, दस्त, और कब्ज शामिल हैं।
आमतौर पर, भोजन पेट में 40 मिनट से दो घंटे तक रहता है। इसके बाद, यह छोटी आंत में लगभग 2-6 घंटे बिताता है और फिर बृहदान्त्र से होकर गुजरता है, जिसमें 10 से 59 घंटे तक का समय लग सकता है।
सरल कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन तेजी से पचते हैं