
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Medically Verified By: Dr. Ila Gupta
आईवीएफ एक लंबा चलने वाला प्रोसेस है।
मां बनने का सपना हर महिला के लिए सबसे खूबसूरत सपना होता है। लेकिन जब नेचुरल तरीके से ये सपना पूरा नहीं हो पाता, तो In Vitro Fertilization यानी IVF उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आता है। आज IVF दुनिया की सबसे लोकप्रिय असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी बन चुकी है। लाखों कपल्स IVF की मदद से पेरेंट्स बन चुके हैं और हजारों कपल्स पेरेंट्स बनने की उम्मीद में जी रहे हैं। लेकिन सच यह भी है कि हर IVF साइकिल सफल नहीं होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर IVF की सफलता किन बातों पर निर्भर करती है? 25 जुलाई को वर्ल्ड आईवीएफ डे के खास मौके पर डॉ. ईला गुप्ता दे रही हैं इस सवाल का जवाब।
इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. ईला गुप्ता कहती हैं कि IVF की सफलता किसी एक कारण पर नहीं, बल्कि कई फैक्टर्स के कॉम्बिनेशन पर निर्भर करती है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैः
किसी भी IVF की सफलता में सबसे अहम भूमिका महिला की उम्र निभाती है।35 साल से कम उम्र की महिलाओं में IVF की सफलता दर 40% से 50% प्रति साइकिल तक होती है। इसका कारण यह है कि इस उम्र में अंडों की क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों ही अच्छी होती हैं। लेकिन जैसे-जैसे उम्र 40 के पार जाती है, सफलता की संभावना भी कम होने लगती है। 40 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में अंडों की संख्या घटने के साथ-साथ उनकी क्वालिटी भी खराब होने लगती है। इसलिए उम्र बढ़ने के साथ IVF की सफलता दर कम होने लगती है।
IVF के बाद ब्लड टेस्ट से प्रेग्नेंसी कंफर्म की जाती है।
फर्टिलिटी एक्सपर्ट बताती हैं कि किसी कपल का IVF सफल होगा या नहीं, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि इनफर्टिलिटी की असली वजह क्या है। हर कपल का केस अलग होता है। किसी को PCOS की समस्या है, किसी को एंडोमेट्रियोसिस, तो किसी में मेल फैक्टर इन्वॉल्व है। उदाहरण के लिए, अगर समस्या स्पर्म की क्वालिटी की है तो ICSI जैसी तकनीक मदद कर सकती है। इसलिए IVF शुरू करने से पहले सही डायग्नोसिस होना बेहद जरूरी है। इसके अलावा जिस क्लिनिक में आप इलाज करा रहे हैं, वहां के डॉक्टरों का एक्सपीरियंस, लैब की क्वालिटी और इस्तेमाल किए जाने वाले टूल भी रिजल्ट को तय करते हैं।
पहले ऐसा माना जाता था कि ज्यादा भ्रूण ट्रांसफर करने से IVF की सफलता की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन अब सोच बदल गई है। डॉ. ईला गुप्ता कहती हैं, आज हम एक ही अच्छे क्वालिटी वाले भ्रूण को ट्रांसफर करने पर जोर देते हैं। खासकर Day 5 का ब्लास्टोसिस्ट। एक अच्छे ब्लास्टोसिस्ट को ट्रांसफर करने पर सफलता दर कई भ्रूण ट्रांसफर करने जितनी ही होती है।
पहले फ्रेश एम्ब्रियो ट्रांसफर ही किया जाता था। लेकिन अब IVF प्रोसेस के दौरान फ्रोजन एम्ब्रियो को ट्रांसफर किया जाता है। कई ट्रायल में अब फ्रोजन ट्रांसफर की सफलता दर फ्रेश ट्रांसफर से बराबर या उससे भी बेहतर देखी गई है। इसका कारण है बेहतर भ्रूण का चुनाव और फ्रीजिंग टेक्नोलॉजी में सुधार है। इस प्रक्रिया के तहत महिला के शरीर को पहले हार्मोन से तैयार किया जाता है, जिससे गर्भाशय भ्रूण को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार होता है। इससे इम्प्लांटेशन के चांस बढ़ जाते हैं। जिसके कारण प्रेग्नेंसी की संभावना कई गुणा ज्यादा होती है।
आईवीएफ के प्रोसेस से पहले खानपान को संतुलित करना जरूरी है।
किसी भी कपल की आईवीएफ की दर लाइफस्टाइल, खानपान और फिजिकल एक्टिविटी पर भी निर्भर करती है। अगर किसी महिला या पुरुष का वजन ज्यादा है, तो इससे हार्मोन और ओव्यूलेशन को प्रभावित होता है। इसके अलावा शराब का सेवन करने से भी अंडे और स्पर्म की क्वालिटी खराब होने लगती है। इसलिए आईवीएफ साइकिल के दौरान लाइफस्टाइल को सही रखने की कोशिश करें। घर पर पका हुआ ताजा हरी सब्जियां, फल, नट्स और प्रोटीन वाली चीजें खाएं। इससे फर्टिलिटी को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
डॉक्टर कहती हैं कि IVF की सफलता का कोई 100% फॉर्मूला नहीं है। लेकिन अगर उम्र, कारण, क्लिनिक की क्वालिटी और आपकी लाइफस्टाइल को सही करके इसकी सफलता की दर को बढ़ाया जा सकता है।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। अगर आप आईवीएफ करवाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो ऊपर बताई गई बातों का ध्यान रखें। इसके साथ ही इस प्रोसेस के दौरान आपके दिमाग में किसी प्रकार का सवाल है तो इस बारे में डॉक्टर से जरूर पूछें।