जानिए आपके बच्चे की सेहत को किस हद तक खराब कर सकते हैं पेट के कीड़े

पेट में कीड़े होने से आपके बच्चे को सोचने-समझने की क्षमता और उसकी परफॉर्मेंस पर बुरा असर पड़ सकता है!

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Written By: Editorial Team | Published : October 12, 2017 1:53 PM IST

छोटे बच्चों को अक्सर पेट में कीड़े हो जाते हैं। बच्चे के पेट में कीड़े होने के लक्षण दिखने पर आपको तुरंत बच्चे का इलाज कराना चाहिए। इसका कारण यह है कि यह परजीवी कीड़े ना केवल आपके बच्चे विकास में बाधा डाल सकते हैं बल्कि इससे बच्चे को कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो भी सकती हैं। अहमदाबाद की न्यूट्रिशन और डायटीशियन स्वाती दवेआपको बता रही हैं कि पेट के कीड़े किस तरह बच्चे की सेहत को ख़राब कर सकते हैं।

परजीवी कीड़े इन्फ्लेमेशन और क्रोनिक ब्लड लॉस के कारण होते हैं। इस इन्फेक्शन से बच्चे को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है जिससे बच्चे को एनीमिया, कुपोषण, मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा होना आदि की समस्या हो सकती है। कुल मिलाकर इससे बच्चे के स्वास्थ्य, शिक्षा और उत्पादकता पर असर पड़ता है। संक्रमित बच्चे ज्यादा बीमार पड़ते हैं और थकान महसूस करते हैं जिस वजह से उन्हें स्कूल जाने में परेशानी हो सकती है। इससे बच्चे को सबसे बड़ी समस्या आयरन की कमी की हो सकती है।

इस इन्फेक्शन से बच्चों को एक गंभीर समस्या जलोदर (ascites) भी हो सकती है। यह समस्या प्रोटीन की हानि से होती है और इससे पेट में तरल पदार्थ बनने लगता है। लगातार हुकवर्म (Hookworm) इन्फेक्शन से पीड़ित रहने वाले बच्चे का बहुत धीमी गति से विकास होता है और मानसिक विकास पर भी असर पड़ता है। क्योंकि इस स्थिति में आयरन और प्रोटीन ही खूब हानि हो सकती है। इसलिए परजीवी के चक्र को तोड़ना बहुत जरूरी है। केवल एनीमिया का ही नहीं बच्चे को इन गंभीर स्वास्थ्य मुद्दों का भी खतरा होता है।

  • कुपोषण
  • विटामिन ए की कमी
  • सोचने-समझने की क्षमता पर असर
  • एकाग्रता में कमी
  • ध्यान नहीं लगना
  • स्कूल में खराब प्रदर्शन

सॉइल-ट्रांसमिटेड हेल्मिन्थ (एसटीएच) बच्चों में काफी आम है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, भारत में 1 और 14 साल के आयु वर्ग के लगभग 241 मिलियन बच्चों को इस परजीवी आंत के कीड़ों का खतरा है। ये परजीवी न केवल पेट में रहते हैं बल्कि आंतों और गुदा में भी जा सकते हैं। आंतों की कीड़े उन बच्चों में बढ़ रहे हैं जो अनजाने में लार्वा अंडे निगल लेते हैं, आमतौर पर मिट्टी या दूषित सतह के संपर्क में आने से ऐसा हो सकता है। इसलिए, बच्चों में आंत्र कीड़े के जोखिम को कम करना जरूरी है।

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अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock

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