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Chemotherapy Na Le To Kya Hoga: पहले आपको यह बता दें कि कीमोथेरेपी कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने की प्रभावी प्रक्रिया है। यह दवाओं के माध्यम से शरीर में फैली कैंसर कोशिकाओं को खत्म करती है, जिससे रोग की दोबारा वापसी की संभावना घटती है और उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं। इसे सर्जरी से पहले या बाद में दिया जा सकता है। जब हमने नारायणा अस्पताल, जयपुर के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रशांत कुम्भज से कीमोथेरेपी के बारे में पूछा तो आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा।
डॉक्टर ने बताया कि 'सर्जरी से पहले देने पर ट्यूमर छोटा हो जाता है जिससे निकालना आसान होता है। सर्जरी के बाद देने पर बाकी बचे कैंसर सेल्स को नष्ट किया जा सकता है। यह उपचार कैंसर के फैलाव को रोकने में मदद करता है। अगर कैंसर कोशिकाएं शरीर के अन्य हिस्सों में जाने लगी हों, तो कीमोथेरेपी उन्हें वहीं समाप्त कर देती है जिससे रोग का प्रभाव सीमित रहता है।' आइए इसे और फायदे और न लेने पर होने वाली समस्याओं के बारे में जानते हैं।
कई मरीजों के लिए यह जीवन रक्षक सिद्ध होती है क्योंकि यह कैंसर की वृद्धि को नियंत्रितकरती है, जिससे रोग की गति धीमी पड़ती है और मरीज को अधिक समय तक सामान्य जीवन जीने का अवसर मिलता है। अगर कोई मरीज कीमोथेरेपी नहीं लेता तो कैंसर फिर से लौट सकता है या शरीर के अन्य भागों में फैल सकता है। इससे उपचार कठिन होता है, जटिलताएं बढ़ जाती हैं और जीवन की संभावना कम हो सकती है।
इसके अलावा कीमोथेरेपी से बाल झड़ना, त्वचा का बेजान होना, रूखापन और रंग में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ये अस्थायी प्रभाव हैं जो इलाज समाप्त होने के बाद धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं और शरीर सामान्य स्थिति में लौट आता है। आइए अब हम जानते हैं कि अगर कीमोथेरेपी को इग्नोर किया जाए तो क्या हो सकता है?
सर्जरी या प्राथमिक उपचार के बाद भी शरीर में ऐसे माइक्रोस्कोपिर कैंसर सेल्स रह जाते हैं जिन्हें स्कैन या रिपोर्ट पकड़ नहीं पाती। अगर कीमोथेरपी नहीं दी जाती है तो यह कोशिकाएं चुपचाप बढ़ने लगती हैं। धीरे-धीरे ये नई गांठें (tumours) बना सकती हैं, बीमारी को तेज कर सकती हैं और मरीज को ऐसा लग सकता है कि सब ठीक है, जबकि अंदर बीमारी दोबारा आकार लेने लगती है।
कीमोथेरेपी का मुख्य उद्देश्य कैंसर को फिर से बढ़ने से रोकना होता है। यानी कि कैंसर का फिर लौट आना। जब इलाज अधूरा रह जाता है या कीमोथेरेपी को छोड़ दिया जाता है, तो शरीर में बचे कैंसर सेल्स तेजी से मल्टीप्लाई होते हैं। कई बार बीमारी कुछ ही महीनों में अधिक आक्रामक रूप में वापस लौट सकती है जो पहली बार की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती है।
बिना कीमोथेरेपी के कैंसर कोशिकाएं ज्यादा समय तक जीवित रहती हैं और खून या लिम्फ सिस्टम के माध्यम से शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे फेफड़े, लिवर, हड्डियां और दिमाग तक पहुंच सकती हैं। एक बार कैंसर फैल गया तो उसे नियंत्रित करना बहुत कठिन हो जाता है। मेटास्टेटिक कैंसर का इलाज लंबा, महंगा और कई बार सीमित प्रभाव वाला होता है।
जब बीमारी फैल जाती है या तेजी से बढ़ने लगती है, तब उपचार के विकल्प सीमित हो जाते हैं। सर्जरी संभव नहीं होती, रेडिएशन सिर्फ कुछ हिस्सों में काम आता है और दवाओं की मात्रा बढ़ानी पड़ती है। बाद के चरण में इलाज शरीर पर अधिक बोझ डालता है और सफलता की संभावना कम हो जाती है।
कैंसर बढ़ने पर शरीर के अंग अपना सामान्य कार्य नहीं कर पाते। मरीज में अत्यधिक थकान, भूख कम होना, कमजोरी, खून की कमी, लगातार दर्द और वजन घटने जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। बिना कीमोथेरेपी के बीमारी जितनी आगे बढ़ेगी, जीवन की गुणवत्ता उतनी ही तेजी से गिरती जाएगी।
शुरुआती स्टेज में दी गई कीमोथेरेपी सस्ता और प्रभावी नियंत्रण देती है। लेकिन अगर इसे छोड़ा जाए और बाद में बीमारी बढ़कर उन्नत चरण में पहुंच जाए, तो टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और कई तरह के महंगे परीक्षणों की ज़रूरत पड़ सकती है। इससे आर्थिक बोझ बहुत बढ़ जाता है और परिवार पर मानसिक तनाव भी गहरा होता है।
वैज्ञानिक अध्ययन दिखाते हैं कि जिन मरीजों को कीमोथेरेपी मेडिकली इनडीकेटिड होती है और फिर भी नहीं ली जाती, उनका सर्वाइवल कई मामलों में कम हो सकता है। कैंसर जितना फैलता है, उतने कम विकल्प बचते हैं और शरीर की ताकत भी कम होती जाती है, जिससे लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना घटती है।
कभी-कभी बिना इलाज बढ़ते कैंसर सेल्स समय के साथ उपचार के प्रति रेजिस्टेंस हो जाते हैं, यानी दवाओं का असर कम होने लगता है। बाद में दी गई कीमोथेरेपी उतनी प्रभावी नहीं रहती क्योंकि कोशिकाएं इसके खिलाफ रक्षा तंत्र विकसित कर लेती हैं।
बिना नियंत्रण बढ़ते ट्यूमर ब्लीडिंग, ब्लॉकेज, सांस की तकलीफ, इंफेक्शन, ऑर्गन डैमेज जैसे खतरनाक हालात पैदा कर सकते हैं। कई मरीजों को अचानक ICU में भर्ती होना पड़ सकता है, जहां हालत को स्थिर करना भी मुश्किल हो सकता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।