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Bacho Mai Autism Ka Pata Kaise Kare: कई माता-पिता अपने बच्चों में अन्य बच्चों की तुलना में अलग व्यवहार देखते हैं, लेकिन समझ नहीं पाते हैं कि समस्या कहां आ रही है। वह अपने बच्चे को सही करने की कोशिश करते हैं व नयी चीजें सीखाने का ट्राई करते हैं। लेकिन फिर भी वे सफल नहीं हो पाते हैं। आपको पता है ऐसा क्यों होता है? इसका कारण है ऑटिज्म, लेकिन इसका पता कैसे लगाया जाए! आप तक सटीक जानकारी पहुंचाने के लिए हमने फोर्टिस हॉस्पिटल के अनुभवी मनोवैज्ञानिक डॉक्टर आस्तिक जोशी से बात की। उनसे जाना कि आखिर ये ऑटिज्म क्या होता है? आइए बताते हैं उन्होंने क्या कहा।
डॉक्टर जोशी ने बताया कि 'बच्चे के विकास के दौरान कुछ व्यवहारों और माइलस्टोन (milestone) को देखकर यह पता लगाया जा सकता है कि कहीं बच्चे को ऑटिज्म तो नहीं है। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर(autism spectrum disorder) या ASD, एक न्यूरो-डेवलपमेंट डिसऑर्डर (neurodevelopmental disorder) है, जो बच्चे के सामाजिक व्यवहार, संवाद करने की क्षमता और अन्य गतिविधियों को प्रभावित करता है। ऑटिज्म का पता जितनी जल्दी चले, उतना ही अच्छा रहता है। इससे आप अपने बच्चे को सही समय पर सही इलाज और सहायता प्रदान कर सकते हैं।' आइए हम विस्तार से जानें कि बच्चों में ऑटिज्म की पहचान कैसे की जा सकती है।
जिस बच्चे को ऑटिज्म होता है उन्हें वर्बल यानी कि मौखिक और गैर-मौखिक संचार करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसी में आई कॉन्टेक्ट बनाने में परेशानी, चेहरे के हाव-भाव को समझने में दिक्कत और सामाजिक संकेतों को समझने में भी कठिनाई पैदा हो सकती है।
अगर आपको अपने बच्चे में बार-बार हिलने, फड़फड़ाने या ऐसी कोई अन्य गतिविधियां देखते हैं तो समझ जाएं कि ये ऑटिज्म का संकेतहै। इसके अलावा ऑटिज्म बच्चों को खास विषयों और वस्तुओं में गहरी रुचि हो सकती है। इसलिए आप ध्यान देना
ऑटिज्म से पीड़ित कई व्यक्ति सेंसरी प्रोसेसिंग डिफिकल्टी का अनुभव करते हैं, इसमें कुछ दृश्यों, ध्वनियों, गंध, स्वाद या बनावट के प्रति अतिसंवेदनशीलता या हाइपरसेंसिटिविटी हो सकती है।
वह बच्चे जिन्हें ऑटिज्म होता है उनके भाषा सीखने के समय में देरी या अंतर का अनुभव हो सकता है, जिसमें बातचीत शुरू करने या बनाए रखने में कठिनाइयां भी शामिल हैं। यानी कि अगर आपका बच्चा अन्य बच्चों की तुलना में देरी से चीजें सीख रहा है तो ये ऑटिज्म का संकेत हो सकता है।
वह बच्चे जिन्हें सोशल नॉर्म्स को समझने में कठिनाई महसूस होती है तो यह ऑटिज्म का संकेत हो सकता है। उन्हें अक्सर सामाजिक मेलजोल में कठिनाई, रिश्ते विकसित करने और बनाए रखने और दूसरों के साथ पारस्परिक मेलजोल में संलग्न होने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे में अगर आपको समय रहते ऑटिज्म का पता चल गया है तो तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर के पास जाएं।
आखिर में डॉक्टर जोशी ने बताया कि 'यह याद रखना बहुत जरूरी है कि ऑटिज्म से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय है और इन विशेषताओं की गंभीरता और प्रभाव व्यापक रूप से भिन्न हो सकते हैं। शीघ्र निदान और हस्तक्षेप से ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्तियों के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।'
ऑटिज़्म से ग्रस्त बच्चे अक्सर देर से बोलना शुरू करते हैं या उन्हें बोलने में पूरी तरह से कठिनाई होती है।
यह एक जीवन भर रहने वाली समस्या है।
एस्परगर सिंड्रोम, रेट सिंड्रोम, चाइल्डहुड डिसिंटिग्रेटिव डिसऑर्डर, कैनर सिंड्रोम और व्यापक विकासात्मक विकार ऑटिज्म के 5 प्रकार हैं।
एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो बच्चों के दिमाग में बदलाव होने की वजह से होता है।