लंबे समय से हार्मोन बैलेंस नहीं है तो थायराइड रोगों का खतरा कैसे बढ़ जाता है?
थायराइड डिजीज और हार्मोन कैसे एक दूसरे के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं और किस तरह से इन चीजों को मैनेज किया जा सकता है, जिनके बारे में हम इस लेख में कुछ खास जानकारियां लेने वाले हैं।
हार्मोन हमारे शरीर में एक नहीं बल्कि कई महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और अगर हार्मोन संतुलित नहीं है तो कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। थायराइड ग्रंथि और हार्मोन का काफी गहरा कनेक्शन होता है और ये दोनों ही एक दूसरे से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। थायराइड की बात करें तो यह एक तितली के आकार की छोटी सी ग्रंथि होती है और यह शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करती है। थायरॉयड हार्मोन शरीर की ऊर्जा, वजन, दिल की धड़कन, मूड, महिलाओं के पीरियड्स, शरीर के तापमान और विकास को संतुलित रखने में मदद करते हैं। ऐसे में अगर थायराइड ठीक से काम नहीं कर पाता है, तो इससे कोई एक समस्या नहीं बल्कि शरीर की कार्य प्रक्रियाएं प्रभावित हो जाती हैं और उनमें से एक हार्मोन से जुड़ा असंतुलन भी है।
भविष्य को ध्यान में रखकर इलाज की जरूरत
एंडोक्राइन से जुड़ी बीमारियों में सबसे प्रमुख और आम बीमारियां थायराइड ग्रंथि से ही जुड़ी होती हैं। आयोडीन की कमी या असंतुलन आज भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, खासतौर पर बच्चों और किशोरों में आयोडीन की कमी के कारण हाइपोथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म जैसी समस्याएं होने का खतरा बढ़ रहा है। आज के समय में ऐसी स्थितियों में मरीज का इलाज हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी, दवाओं, रेडियोएक्टिव आयोडीन ट्रीटमेंट, सर्जरी और लंबे समय तक निगरानी पर आधारित होता है। ये इलाज न सिर्फ समस्या का इलाज करते हैं बल्कि हार्मोन रिलीज करने की प्रक्रिया को भी संतुलित बनाता है।
रीजेनरेटिव मेडिसिन कैसे खोल रही है नई संभावनाएं
पहले थायराइड ग्रंथि से जुड़ी समस्याओं का इलाज इतना प्रभावी नहीं होता था, जबकि आज के समय में थायराइड का इलाज रिसर्च बेस्ड तकनीकों से किया जाता है। डॉ. गीतिका जस्सल, मेडिकल स्पोक्सपर्सन, क्रायोवीवा लाइफ साइंसेज के अनुसार शोधकर्ता स्टेम सेल्स, टिश्यू इंजीनियरिंग और थायरॉयड ऑर्गेनॉइड पर अध्ययन कर रहे हैं। ऑर्गेनॉइड्स लैब्स में खास 3D संरचनाएं बनाती हैं, जो शरीर में थायराइड ग्रंथि की तरह काम कर सकती है। इस तकनीक की मदद से इनके माध्यम से वैज्ञानिक थायरॉयड के विकास, हार्मोन उत्पादन और बीमारी के व्यवहार को बेहतर तरीके से समझने का प्रयास कर रहे हैं।
हार्मोन से जुड़ी समस्याओं का इलाज
हाइपोथायरायडिज्म जैसी क्रॉनिक थायराइड बीमारियों और थायराइड कैंसर या फिर ऑटोइम्यून थायराइड डिजीज या सर्जरी के बाद हार्मोन की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए रीजेनरेटिव मेडिसिन आने वाले समय में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसका उद्देश्य मौजूदा उपचारों को तुरंत बदलना नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए ऐसे नए उपचार विकल्प विकसित करना है जो शरीर के प्राकृतिक हार्मोनल बैलेंस को बेहतर बनाए रखने में मदद करें, दवाओं पर जीवनभर की निर्भरता को कम करें और प्रत्येक व्यक्ति की एंडोक्राइन प्रोफाइल के अनुसार अधिक व्यक्तिगत उपचार उपलब्ध करा सकें। जैसे-जैसे रिसर्च आगे बढ़ रही हैं रीजनरेटिव साइंस भविष्य में पारंपरिक एंडोक्रिनोलॉजी के लिए महत्वपूर्ण और फायदेमंद बन रही है।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल थायराइड बीमारियों और हार्मोन हेल्थ से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।