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Stem Cell Therapy for Hemophilia in Women: सालों की रिसर्च के बाद यह पता चल पाया कि हीमोफीलिया सिर्फ पुरुषों को ही नहीं होता बल्कि महिलाओं के शरीर में भी यह हो सकता है। ऐसा समझा जाता था कि महिलाओं को खुद इस बीमारी के लक्षण नहीं होते, वे बस इसे अपने बेटों तक पहुंचा देती हैं। इसकी वजह यह थी कि हीमोफीलिया एक्स क्रोमोसोम के जरिए पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता है। लेकिन हकीकत इससे अलग है। डॉ. अदिति कुंदू, मेडिकल डायरेक्टर, क्रायोवीवा लाइफ साइंसेज, भारत के अनुसार कई महिलाएं भी हीमोफीलिया के लक्षणों से परेशान रहती हैं। उन्हें बहुत ज्यादा पीरियड्स आना, जोड़ों में दर्द रहना और हल्की चोट लगने पर भी आसानी से निशान पड़ जाना जैसी दिक्कतें होती हैं। अफसोस की बात यह है कि महिलाओं में दिखने वाले इन लक्षणों पर लंबे समय तक ध्यान नहीं दिया गया। कई बार उनका गलत इलाज हुआ या फिर उनकी समस्या को गंभीरता से ही नहीं लिया गया। इसी वजह से बहुत-सी महिलाएं बिना वजह समझे, चुपचाप दर्द और परेशानी सहती रहीं।
हीमोफीलिया का इलाज ढूंढने में आज तक भी रिसर्च चल रही है। कुछ चीजें हैं, जो इस समस्या से निपटने में बहुत मदद कर पा रही हैं। स्टेम सेल थेरेपी भी उनमें से एक है, जो महिलाओं में इस समस्या से निपटने के लिए एक नई उम्मीद की किरण साबित हो रही है। इस आधुनिक इलाज की मदद से हीमोफीलिया की कैरियर महिलाएं भी शरीर में जरूरी खून जमाने वाले फैक्टर बना सकती हैं। इससे उनके लक्षणों में काफी राहत मिलती है और कुछ मामलों में यह इलाज लंबे समय तक फायदा देने वाला साबित हो सकता है।
हीमोफीलिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जो F8 या F9 जीन में गड़बड़ी की वजह से होती है। ये जीन शरीर में खून को जमाने वाले फैक्टर VIII और IX बनाने का काम करते हैं। जब इनमें कमी हो जाती है, तो खून आसानी से नहीं जम पाता। अब वैज्ञानिकों ने इस दिशा में बड़ी प्रगति की है। वे खास तरह के स्टेम सेल्स, जिन्हें हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल (HSCs) कहा जाता है, को जेनेटिक तकनीक की मदद से इस तरह तैयार कर रहे हैं कि वे सही मात्रा में क्लॉटिंग फैक्टर बना सकें। ये स्टेम सेल्स शरीर में जाकर अलग-अलग तरह की ब्लड सेल्स में बदल सकते हैं।
(और पढ़ें - बच्चों में हीमोफीलिया के कारण)
जब इन बदले हुए स्टेम सेल्स को दोबारा मरीज के शरीर में डाला जाता है, तो वे लंबे समय तक खून जमाने वाले फैक्टर बनाते रह सकते हैं। इससे हीमोफीलिया से पीड़ित या कैरियर महिलाओं को जीवन भर राहत मिलने की उम्मीद बनती है। खासकर उन महिलाओं के लिए यह इलाज बेहद फायदेमंद हो सकता है, जिन्हें मध्यम या गंभीर स्तर का ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या रहती है।
(और पढ़ें - हीमोफीलिया का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं)
हीमोफीलिया की कैरियर महिलाओं में कई बार जोड़ों के अंदर खून जमा हो जाता है। इससे धीरे-धीरे जोड़ों में दर्द, सूजन और जकड़न बढ़ने लगती है। चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है और रोजमर्रा के काम भी प्रभावित होते हैं। यह परेशानी अक्सर सामने नहीं आ पाती, लेकिन महिलाओं की जिंदगी पर इसका गहरा असर पड़ता है। इसी समस्या को कम करने के लिए वैज्ञानिक मेसेंकाइमल स्टेम सेल (MSC) पर काम कर रहे हैं। ये खास स्टेम सेल सूजन कम करने और खराब हिस्सों को ठीक करने में मदद करते हैं। लगातार ब्लीडिंग की वजह से जोड़ों की कार्टिलेज और अंदर की परत खराब हो जाती है, जिसे MSC ठीक करने में सहायक हो सकते हैं। अगर यह इलाज सफल रहा, तो महिलाओं और लड़कियों में जोड़ों को होने वाला नुकसान रोका जा सकेगा या कुछ हद तक ठीक भी किया जा सकेगा। इससे दर्द कम होगा और चलने-फिरने में आसानी होगी।
आज हीमोफीलिया का इलाज आमतौर पर बाहर से खून जमाने वाले फैक्टर चढ़ाकर किया जाता है। यह इलाज जिंदगी भर चलता है। इससे मरीज थक भी जाता है और इलाज बहुत महंगा भी पड़ता है, जो हर किसी के लिए संभव नहीं होता। कई बार हार्मोन की वजह से ज्यादा ब्लीडिंग झेल रही महिलाओं को गलती से हीमोफीलिया मान लिया जाता है, जिससे इलाज और उलझ जाता है। रिसर्च बताती है कि स्टेम सेल थेरेपी से बार-बार फैक्टर चढ़ाने की जरूरत कम हो सकती है या खत्म भी हो सकती है। अगर चल रहे ट्रायल सफल होते हैं, तो मरीज का शरीर खुद ही जरूरी फैक्टर बनाने लगेगा, जिससे इलाज आसान और लंबे समय तक असर करने वाला हो सकता है।
ज्यादातर महिलाएं हीमोफीलिया की कैरियर होती हैं, लेकिन कुछ महिलाओं में इसके लक्षण काफी ज्यादा होते हैं। कई बार उन्हें खुद भी समझ नहीं आता कि उन्हें इतनी परेशानी क्यों हो रही है, क्योंकि मौजूदा इलाज व्यवस्था ऐसे मामलों को ठीक से नहीं देख पाती। स्टेम सेल इलाज में हर महिला के जीन और उसकी हालत के हिसाब से इलाज किया जा सकता है। यानी सभी के लिए एक जैसा इलाज नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार इलाज। इससे उन महिलाओं को भी सही इलाज मिल सकता है, जिनके लक्षण ज्यादा गंभीर हैं।
हीमोफीलिया से लोग बहुत लंबे समय से परेशान रहे हैं। लेकिन स्टेम सेल थेरेपी से न सिर्फ आज के मरीजों को राहत मिल सकती है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों की जिंदगी भी बेहतर बन सकती है। आने वाले समय में संभव है कि बीमारी के लक्षण आने से पहले ही इलाज शुरू कर दिया जाए। इसका मतलब यह होगा कि जिन महिलाओं में यह जीन होगा, उन्हें जिंदगी भर परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। वे सामान्य और बिना डर के जीवन जी सकेंगी। धीरे-धीरे स्टेम सेल थेरेपी हीमोफीलिया के इलाज का मुख्य तरीका बन सकती है और इससे इस बीमारी से जुड़ा डर और सामाजिक झिझक भी खत्म हो सकती है।
हीमोफीलिया के इलाज में स्टेम सेल थेरेपी एक नई और मजबूत उम्मीद के रूप में उभर रही है। सबसे अहम बात यह है कि इस इलाज में अब महिलाओं और लड़कियों की समस्याओं को भी गंभीरता से समझा जा रहा है, जिन्हें लंबे समय तक केवल कैरियर मानकर नजरअंदाज किया गया। लगातार हो रही रिसर्च और चिकित्सा विज्ञान के सही व नैतिक इस्तेमाल से भविष्य में ऐसा संभव हो सकता है, जहां हीमोफीलिया महिलाओं की जिंदगी को सीमित न करे। यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में महिलाएं और लड़कियां बिना डर, दर्द और रोक-टोक के एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर और बेहतर जीवन जी सकेंगी।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।