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Written By: Editorial Team | Published : October 26, 2017 11:27 AM IST
अगर आपको सांस फूलने, अत्यधिक पसीना, थकान जैसी दिल से जुड़ी कोई छोटी-मोटी समस्याएं महसूस हों और इसकी वजह से आपका डॉक्टर अगर आपको ईसीजी के लिए कहे तो परेशान न हो। क्योंकि अगर आपको दिल की बीमारियों का ख़तरा नहीं होगा तो शायद आपको ईसीजी (ECG) कराना ही ना पड़े।
हालांकि, अगर आप छाती में अक्सर दर्द होता है या सांस लेने में तकलीफ होती है, तो ईसीजी कराना ज़रूरी हो सकता है। एक ईसीजी या इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम की मदद से आपके दिल की कार्यप्रणाली का पता लगाया जाता है। ईसीजी के बारे में हमने डॉ. बी.एस. संजय (कंसल्टेंट कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरैसिक सर्जन, फोर्टिस हॉस्पिटल, कनिंघम रोड, बेंगलुरु) से बात की जिन्होंने बताया कि किसी छुपी हुई दिल की बीमारी का पता लगाने में यह टेस्ट कितना कारगर है।
ईसीजी क्या है?
ईसीजी टेस्ट दिल के कार्य का पता लगाने का एक सरल तरीका है। इसमें धड़कन को इलेक्ट्रिक गतिविधि की मदद से रिकॉर्ड किया जाता है। इसमें दर्द नहीं होता और इसमें बहुत कम समय भी लगता है। ईसीजी में इलेक्ट्रोड को छाती पर त्वचा से चिपका दिया जाता है, जिससे दिल की धड़कन और हार्ट रेट, नर्व की गति, ट्रिगर आदि की गति और लय रिकॉर्ड हो जाती है।
ईसीजी कितना असरदार होता है?
कई बार ईसीजी ग़लत या नकारात्मक परिणाम दिखा सकता है और इससे छुपी हुई समस्या का पता लगाने में परेशानी हो सकती है, और इस बात को हमेशा ध्यान में रखने की ज़रूरत है। टेस्ट का अधिक प्रभावी रूप है एक्सरसाइज ईसीजी या स्ट्रेस टेस्ट, जहां दिल की गतिविधियों को तब रिकॉर्ड किया जाता है जब हम सक्रिय होते हैं। हालांकि, ऐसा भी हो सकता है कि आपका डॉक्टर आपका ईसीजी करे लेकिन तुरंत स्ट्रेस टेस्ट करने के लिए ना कहे। अगर आपके ईसीजी में किसी भी तरह की संदिग्ध रीडिंग्स दिखती हैं तो उसके बाद स्ट्रेस टेस्ट ज़रूर कराया जाता है। कभी-कभी, जिन लोगों को किसी बीमारी का गंभीर ख़तरा नहीं होता, उनका सुस्त दिल कोई समस्या होने के बाद भी कुछ असामान्यताएं नहीं दिखाता।
आपको क्या करना चाहिए?
अगर आपको बार-बार सीने में दर्द और सांस में तकलीफ महसूस होती है तो आपके डॉक्टर से बात करें, वो आपको ईसीजी के अलावा कुछ और टेस्ट कराने की सलाह दे सकता है। इसके अलावा, अगर आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है तो हर 3 महीने बाद ईसीजी कराना चाहिए। इससे आपको दिल की किसी भी समस्या का जल्द से जल्द पता लगाने में मदद हो सकती है। यह उन लोगों के लिए ज़्यादा ज़रूरी है जिनके परिवार में पहले भी लोगों को दिल की बीमारियां हो चुकी हैं।
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अनुवादक: Sadhna Tiwari
चित्रस्रोत : Shutterstock Images.