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हम में से बहुत लोग इस बात को महसूस करते हैं कि मौसम में बदलाव, हमारे शरीर को भी प्रभावित करता है। साइंस भी ऐसा ही मानता है। साइंस की मानें तो मौसम और वातावरण के तापमान में होने वाले बदलाव हमारे शरीर और इसकी सेहत को प्रभावित करते हैं। लेकिन हाल ही में आय शोध मौसम और हमारे मूड यानी कि मेंटल हेल्थ जुड़े प्रभावों के बारे में बताता है। जी हां, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोर (World Economic Forum report) की मानें तो, मौसम में बदलाव हमारे मानसिक सेहत को गहराई से प्रभावित करता है। जैसे-जैसे तापनान बढ़ता है या घटता है वैसे-वैसे हमारे शरीर का कामकाज बदलता है। जैसे कि ब्लड सर्रकुलेश, ब्लड प्रेशर और मेटाबोलिज्म। इसी तरह मौसम बदलने के साथ कई अन्य प्रकार से भी मानसिक सेहत प्रभावित होती है, आइए जानते हैं कैसे।
नेशनल वेदर सर्विस की नवीनतम एडवाइजरी के अनुसार, अमेरिका भीषण गर्मी का सामना कर रहा है। ऐसे में वहां स्वास्थ्य विभागों में मानसिक सेहत से जुड़ी शिकायत करने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसके अलावा जो लोग पहले से ही मानसिक और व्यवहारिक स्वास्थ्य स्थितियों से गुजर रहे हैं, उनमें से गर्मी ने कुछ समूहों को अलग तरह से प्रभावित किया है। साथ ही गर्मी ने लोगों में डिमेंशिया के लक्षणोंको और बढ़ा दिया है।
2008 के बीजिंग ओलंपिक के समाचार मीडिया कवरेज के एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि अमेरिकी पत्रकारों द्वारा दायर की गई कहानियों में गर्मी के दिनों में खेले गए मैच में लोगों मे गालियों और अपशब्दों का ज्यादा प्रयोग किया। साथ ही खिलाड़ियों समेत आम लोग भी ज्यादा आक्रामक (aggressive) नजर आए। इसी शोध से इस बारे में पता चलता है कि तापमान जितना अधिक होगा, उतने ही अधिक लोगों के आक्रामक रूप से कार्य करने की संभावना होगी। आक्रामकता की दर गर्म वर्षों, महीनों, दिनों और दिन के समय में अधिक होती है और इस समय हत्याओं, दंगों और कार-हॉर्निंग के लिए एक पैटर्न में बदलाव देखा जा सकता है।
शोध बताते हैं कि गर्मी और धूप मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहार संबंधी समस्याओं का कारण बनती है। दरअसल, गर्मी के कारण लगातार पसीना निकलने से लोगों में पानी की कमी हो जाती है और ये लोगों को अधिक थका हुआ और चिड़चिड़ा बना देती है। तापमान का उतार-चढ़ाव मूड को बदल सकता है और इससे शरीर में कई समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। जैसे कि
-पानी की कमी से ब्लड सर्कुलेशन और मेटाबोलिज्म खराब हो सकता है।
-गर्मी और पानी की कमी से ब्लड वेसेल्स पर दबाव पड़ सकता है जो कि हाई बीपी का कारण बन सकती है।
- सिरदर्द को ट्रिगर कर सकता है।
-आत्महत्या के मामले बढ़ सकते हैं।
- चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ता रहता है।
-डिप्रेशन और एंग्जायटी बढ़ सकती है।
तो, इस तरह गर्मी आपके मन और मस्तिष्क दोनों को प्रभावित करती है। ऐसे में जरूरी ये है कि आप ढ़ेर सारा पानी पिएं, खुद को हाइड्रेटेड रखें और बहुत ज्यादा गर्मी में घर के बाहर ना निकलें।