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हम सभी जानते हैं कि फैट दो तरह के होते हैं- सैचुरेटेड फैट और अनसैचुरेटेड फैट। सैचुरेटेड फैट का सेवन हार्ट के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी लोकसभा में इस बात पर जोर दिया है। उन्होंने हाई ट्रांस फैट और लाइफस्टाइल बीमारियों (डायबिटीज, ओबेसिटी, ब्लड प्रेशर, सांस से संबंधित समस्याएं और हेयरफॉल आदि) के बीच बढ़ते खतरे की बात करने के साथ-साथ कोरोनरी हार्ट डिजीज (ऐसी बीमारी है जिसमें दिल को काम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में खून नहीं मिल पाता है।) के लिए भी लोगों को सावधान किया है। सालाना 5,40,000 लाख मौतें केवल ट्रांस फैट के कारण होती है, ऐसे में इस हानिकारक फैट को जल्द से जल्द समझने और खानपान में कम करने की आवश्यकता है।
ट्रांस फैट का सेवन कोलेस्ट्राल के स्तर को प्रभावित करता है। यह कितना नुकसानदायक है इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) के लेवल को बढ़ा देता है जिसे आम भाषा में 'बैड कोलेस्ट्राल' भी कहते हैं। साथ ही ये हाई डेंसिटी लिपोप्रोटिंस (HDL) के लेवल को कम कर देता है जिसे बोलचाल में लोग 'गुड कोलेस्ट्राल' कहते हैं। यह अनहेल्दी कोलेस्ट्रॉल धमनियों में प्लाक बनाता है जो आगे चलकर हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाता है, जिसमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज भी शामिल हो सकती है।
मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. तिलक सुवर्णा से खास बातचीत के आधार पर हम आपको ट्रांस फैट और हार्ट संबंधी बीमारियों के बारे में बता रहे हैं। डॉक्टर ने 5 ऐसे ट्रांस फैट युक्त खाद्य पदार्थ बताएं हैं जिनसे हमें परहेज करना चाहिए।
यह आमतौर पर फ्राइड और प्रोसेस्ड फूड जैसे कि समोसा, फ्रेंच फाइज आदि में पाया जाता है। क्योंकि इन्हें गहरे तले में सुनहरा कुरकुरा होने तक पकाया जाता है, ऐसे में ट्रांस फैट दिल के लिए और भी ज्यादा हानिकारक हो सकता है। इसे कम मात्रा में और कभी-कभी खाने से ट्रांस फैट के सेवन को सीमित किया जा सकता है।
कई पैकेज्ड कुकीज़, क्रैकर्स और चिप्स में स्वाद बढ़ाने और शेल्फ लाइफ बढ़ाने वाले ट्रांस फैट होते हैं। ये ट्रांस फैट दिखने में हानिरहित लग सकते हैं लेकिन इनमें छिपा हुआ ट्रांस फैट हार्ट डिजीज के जोखिम को बढ़ा सकता है। इन पैक्ड फूड की जगह फल, नट्स और दही जैसे साबुत स्नैक्स हृदय के बेहतर बनाते हैं।
पिज्जा, परांठे, पाई जैसी अन्य मील में ट्रांस-फैट भरपूर मात्रा में पाया जा सकता है। यह खाने में स्वादिष्ट होते हैं और इनके पैकेट पर लो फैट लिखा हो सकता है,लेकिन प्रत्येक सर्विंग में कम से कम 1 ग्राम ट्रांस-फैट हो सकता है।
कुकीज, पेस्ट्री और मफिन में अक्सर ट्रांस फैट होता है। स्वादिष्ट होने वाले ये आइटम कार्डियोवैस्कुलर हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ाते हैं। ऐसे घर पर बने पदार्थों का सेवन करना उचित और सुरक्षित माना जाता है।
ज्यादातर फास्ट फूड आइटम ट्रांस फैट युक्त तेलों का उपयोग करके तैयार किए जाते हैं, जिससे धमनियों को अवरुद्ध करने की क्षमता बढ़ जाती है। माइक्रोवेव पॉपकॉर्न वैरायटी: कुछ माइक्रोवेव पॉपकॉर्न ब्रांड स्वाद बढ़ाने के लिए ट्रांस फैट का उपयोग करते हैं। इसलिए इनका सेवन करने से बचें। इनकी जगह पर सादे सिंपल होम मेड फूड का सेवन कर हेल्दी लाइफस्टाइल का चुना जा सकता है।
यदि आपको हार्ट से संबंधित कोई समस्या है तो किसी भी तरह के ट्रांस फैट का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। ट्रांस फैट और अन्य तरह फास्ट फूड को अवॉइड कर और हेल्दी फूड के सेवन से लाइफस्टाइल को बेहतर बनाया जा सकता है।
(Inputs By: Dr. Tilak Suvarna, Senior Interventional Cardiologist at Asian Heart Institute, Mumbai)