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दिमाग के काम काज को भी प्रभावित कर सकता है लिवर, स्टडी से जानें दोनों के बीच क्या है लिंक

Brain and liver connection: ब्रेन और लिवर दोनों ही एक दूसरे से बिलकुल अलग अंग हैं, लेकिन हाल ही में आई एक स्डटी इन दोनों के बीच कुछ संबंधों का खुलासा करती है।

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Written By: Pallavi Kumari | Published : June 29, 2022 10:40 AM IST

क्या लिवर आपके ब्रेन के काम काज को प्रभावित कर सकता है? तो हां, लिवर ना सिर्फ आपके मेटाबोलिज्म को प्रभावित करता है बल्कि मस्तिष्क का सबसे उन्नत हिस्सा, सेरेब्रल कॉर्टेक्स (cerebral cortex) को भी प्रभावित करता है। दरअसल, Yale study में चूहों में भोजन व्यवहार को विनियमित करने में लिवर की एक प्रमुख भूमिका को लेकर एक शोध किया गया जिसमें पाया गया कि लिवर सिर्फ चयापचय यानी मेटाबोलिज्म को ही नहीं प्रभावित करता बल्कि, मस्तिष्क की क्रियाओं को भी प्रभावित कर सकता है। वो कैसे, इसके लिए जानते हैं इस शोध के बारे में।

ब्रेन और लिवर कनेक्शन को लेकर क्या कहती है ये स्टडी

इस शोधको लिखने वाले येल में तुलनात्मक चिकित्सा के जीन और डेविड डब्ल्यू वालेस प्रोफेसर तमस होर्वथ की माने को, मस्तिष्क को देखकर इसके कई अंगों के साथ इसका जुड़ाव देखा जा सकता है। स्कूल ऑफ मेडिसिन और अध्ययन के एक वरिष्ठ लेखक ने नेचर मेटाबॉलिज्म में इसके बारे में प्रयोगों की एक श्रृंखला में बताया कि, शोध दल ने एक सर्किट का खुलासा किया जिसके द्वारा मस्तिष्क और लिवर (liver affects brain) एक-दूसरे के साथ संवाद करते हैं और नियंत्रित करते हैं। ब्रेन और लिवर के बीच इस बातचीत में दो प्रमुख प्रतिभागी कोशिकाओं का एक समूह हैं जिन्हें एगौटी-संबंधित प्रोटीन (एजीआरपी) न्यूरॉन्स के रूप में जाना जाता है, जो मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस क्षेत्र में पाए जाते हैं, और एक प्रकार का लिपिड जो लिवर द्वारा स्रावित होता है जिसे लिसोफोस्फेटिडिल कोलाइन (एलपीसी) कहा जाता है।

दिमाग के काम काज को कैसे प्रभावित करता है लिवर-How does the liver affect the brain?

AgRP न्यूरॉन्स, जो सेरेब्रल कॉर्टेक्स के साथ संचार करते हैं, जटिल व्यवहार और क्षमताओं से जुड़ी मस्तिष्क की बाहरी परत, भूख की भावनाओं को बढ़ावा देने के लिए जरूरी होते हैं। लेकिन वे शरीर के अन्य भागों से भी संवाद करते हैं, जैसे कि लिवर और पेनक्रियाज। दरअसल, जब मनुष्य भूखा होता है, तो ये न्यूरॉन्स शरीर मेंफैट के भंडार से लिपिड को मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक बार जब एलपीसी को लीवर द्वारा स्रावित किया जाता है, तो रक्त में एक एंजाइम जल्दी से इसे लाइसोफोस्फेटिडिक एसिड या एलपीए में बदल देता है। अन्य शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि एलपीए मस्तिष्क में न्यूरोनल गतिविधि ( can liver disease cause neurological problems) को बदल सकता है।

इस अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया कि फास्टिंग के बाद, चूहों के खून और मस्तिष्कमेरु द्रव दोनों में एलपीए का उच्च स्तर था। एलपीए केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के भीतर पाया जाने वाला विशेष तरल है। एलपीए के स्तर में बढ़ोतरी न्यूरोनल गतिविधि में वृद्धि का कारण बना, जिससे चूहों में फास्टिंग के बाद भूख बढ़ गई और ये सभी प्रभाव AgRP न्यूरॉन फ़ंक्शन पर निर्भर थे। ये निष्कर्ष एक सर्किट का सुझाव देते हैं जिसमें एजीआरपी न्यूरॉन्स लिवर और लिपिड रिलीज को नियंत्रित करते हैं और जिसमें वे लिपिड वापस मस्तिष्क में जाते हैं जहां वे सोचने समझने से ज्यादा पेट के काम काज को भी प्रभावित करते हैं।