आखिर कई दिनों तक भूखा रहने पर शरीर जिंदा कैसे रहता है? एनर्जी आती कहां से है?
डॉक्टरों का मानना है कि भोजन न मिलने पर हमारा शरीर हार नहीं मानता, बल्कि तुरंत इमरजेंसी मोड पर आ जाता है। अंगों को चालू रखने के लिए यह शरीर में पहले से मौजूद फैट और अन्य जरूरी चीजों को एनर्जी में बदलना शुरू कर देता है।
हमारा शरीर एक ऐसी मशीन की तरह काम करता है जिसे हर दिन सही तरह से चलाने के लिए भोजन और पानी की जरूरत होती है। लेकिन कभी-कभी उपवास या लंबी बीमारी के दौरान जब शरीर को कई दिनों तक भोजन नहीं मिलता, तब भी इंसान जीवित रहता है। ऐसे में यहां सवाल ये है कि बिना खाना खाए शरीर को एनर्जी कैसे मिलती है? एक्सपर्ट कहते हैं कि ऐसी स्थिति में शरीर अंदरूनी रूप से एक खास प्रक्रिया के तहत काम करना शुरू कर देता है। भोजन न मिलने पर शरीर अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अंदर जमा फैट और अन्य तत्वों का इस्तेमाल कर खुद को जिंदा रखता है। आइए बहुत ही आसान शब्दों में सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर विनीत बंगा से समझते हैं कि कई दिनों तक भूखे रहने पर हमारे शरीर के अंदर क्या-क्या बदलाव आते हैं और ऊर्जा कहां से मिलती है।
जब खाना नहीं मिलता तो शरीर सबसे पहले क्या करता है?
जैसे ही हम खाना खाना बंद करते हैं, हमारे शरीर को समझ आ जाता है कि बाहर से अब सप्लाई बंद हो चुकी है। शरीर सबसे पहला काम यह करता है कि वह अपनी एनर्जी खर्च करने की रफ्तार को धीमा कर देता है। इसे आसान भाषा में 'पावर सेविंग मोड' कहते हैं। शरीर उन कामों पर एनर्जी बचाना शुरू कर देता है जो तुरंत के लिए जरूरी नहीं हैं, ताकि वह दिल, दिमाग और फेफड़ों जैसी सबसे जरूरी चीजों को चालू रख सके।
पहले 24 घंटे में शरीर को एनर्जी कहां से मिलती है?
शुरुआती 24 घंटों में शरीर को कोई बहुत बड़ी मशक्कत नहीं करनी पड़ती। हमारे लिवर और मांसपेशियों में पहले से थोड़ा ग्लूकोज जमा रहता है, जिसे ग्लाइकोजन कहते हैं। ऐसे में पहले 6 से 8 घंटे तो आसानी से कट जाते हैं। इसके बाद, शरीर इस जमा हुए ग्लाइकोजन को वापस ग्लूकोज में बदलता है और उसे एनर्जी की तरह इस्तेमाल करता है। यानी शुरुआती 24 घंटे शरीर अपनी जमा पूंजी से काम चला लेता है।
24 घंटे बाद शरीर में क्या बदलाव शुरू होते हैं?
असली चुनौती 24 घंटे बाद शुरू होती है, क्योंकि अब लिवर में जमा ग्लाइकोजन खत्म हो चुका होता है। अब शरीर को एनर्जी के लिए किसी नए रास्ते की तलाश होती है और इसके लिए शरीर फैट को पिघलाना शुरू करता है। फैट के टूटने से Ketones नाम का एक केमिकल बनता है। हमारा दिमाग, जो अब तक सिर्फ ग्लूकोज पर चल रहा था, वह अब इस कीटोन्स से एनर्जी लेना शुरू कर देता है। इस पूरी प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में ketosis कहते हैं।
कई दिन तक भूखे रहने पर शरीर खुद को कैसे बचाता है?
जब भूख हड़ताल याउपवास को कई दिन बीत जाते हैं, तो शरीर पूरी तरह से 'इमरजेंसी मोड' में आ जाता है। खुद को बचाने के लिए शरीर अपनी पुरानी और खराब हो चुकी कोशिकाओं को ही खाकर नष्ट करने लगता है और उनसे नई एनर्जी बनता है। इस प्रक्रिया को Autophagy कहते हैं। एक तरह से शरीर अपने अंदर की गंदगी को साफ करके खुद को जिंदा रखने की कोशिश करता है।
सबसे पहले शरीर का कौन-सा हिस्सा कमजोर होने लगता है?
भूखे रहने पर सबसे पहले हमारी मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। जब शरीर को फैट से भी पूरी एनर्जी नहीं मिल पाती, तो वह प्रोटीन को तोड़ना शुरू करता है जो हमारी मांसपेशियों में होता है। यही वजह है कि भूखे रहने पर इंसान का वजन बहुत तेजी से गिरता है, हाथ-पैर पतले होने लगते हैं और शरीर में भारी कमजोरी महसूस होती है।
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इंसान कितने दिन तक बिना खाना खाए जिंदा रह सकता है?
यह हर इंसान के शरीर की बनावट, उसके अंदर जमा फैट और सेहत पर निर्भर करता है। आमतौर पर एक स्वस्थ इंसान बिना खाना खाए 3 से 8 हफ्ते (लगभग 21 से 60 दिन) तक जिंदा रह सकता है। इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां लोगों ने पानी के सहारे 40 या 50 दिनों से ज्यादा का अनशन किया है। लेकिन यह सीमा हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है।
सिर्फ पानी पीकर शरीर चल सकता है?
कुछ समय के लिए सिर्फ पानी पीकर शरीर को चलाया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक नहीं। हालांकि बिना खाना खाए इंसान जिंदा रह सकता है लेकिन बिना पानी के इंसान सिर्फ 3 से 7 दिन ही जिंदा रह पाएगा। पानी हमारे शरीर में डिहाइड्रेशन को रोकता है, खून के बहाव को बनाए रखता है और अंगों को काम करने में मदद करता है। इसलिए लंबे अनशन पर बैठे लोग भी पानी या नींबू-पानी का सहारा जरूर लेते हैं।
Disclaimer : यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। अगर आप उपवास रखते हैं या भूखा रहने के दौरान किसी तरह की समस्या होती है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।