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रोजाना 9-10 घंटे से ज्यादा सोना भी बढ़ा सकता है डायबिटीज व हार्ट डिजीज का खतरा

Oversleeping Side Effects: जिस प्रकार कम नींद लेना स्वास्थ्य से जुड़ी कई बीमारियों का पैदा कर सकता है, उसी प्रकार जरूरत से ज्यादा नींद लेना भी डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ाता है, जिस बारे में हम इस लेख में जानेंगे।

रोजाना 9-10 घंटे से ज्यादा सोना भी बढ़ा सकता है डायबिटीज व हार्ट डिजीज का खतरा
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Animesh Arya

Written by Mukesh Sharma |Published : March 17, 2026 3:17 PM IST

Jyada Sone ke Nuksan: अक्सर यह माना जाता है कि जितनी ज्यादा नींद ली जाए उतना शरीर के लिए अच्छा होता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार जरूरत से ज्यादा सोना भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। कई शोध बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से रोजाना 9-10 घंटे या उससे अधिक सोता है, तो इससे डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। नींद शरीर के लिए जरूरी जरूर है, लेकिन इसकी अधिकता भी शरीर के संतुलन को बिगाड़ सकती है। इसलिए अच्छी सेहत के लिए पर्याप्त और संतुलित नींद लेना बहुत जरूरी माना जाता है। इसलिए यह पता होना जरूरी है कि सिर्फ कम नींद लेना ही नहीं बल्कि जरूरत से ज्यादा नींद लेना भी कई बीमारियां होने के खतरे को बढ़ा सकती है और इस लेख में हम इसी बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां लेने वाले हैं।

मेटाबॉलिज्म पर असर

स्वस्थ वयस्कों के लिए आमतौर पर 7-8 घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है। इससे अधिक सोने से शरीर की जैविक घड़ी यानी बॉडी क्लॉक प्रभावित हो सकती है। जब शरीर का प्राकृतिक स्लीप–वेक साइकिल बिगड़ता है, तो इसका असर मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है। मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ने से शरीर की ब्लड शुगर को नियंत्रित करने की क्षमता कम हो सकती है। इसके कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने लगता है, जो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ा सकता है। इसके अलावा ज्यादा सोने से शरीर में ऊर्जा का संतुलन भी प्रभावित होता है, जिससे थकान और सुस्ती महसूस हो सकती है।

(और पढ़ें - रोजाना 7 से 8 घंटे सोना क्यों जरूरी है?)

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शारीरिक गतिविधि कम होना

ज्यादा नींद लेने की आदत का संबंध अक्सर कम शारीरिक गतिविधि से भी जुड़ा होता है। सरल शब्दों में कहें तो जो लोग दिन का बड़ा हिस्सा सोने में बिताते हैं, वे सामान्य रूप से कम सक्रिय रहते हैं। इससे शरीर की कैलोरी खर्च होने की मात्रा कम हो जाती है और धीरे-धीरे वजन बढ़ने लगता है। मोटापा डायबिटीज और दिल की बीमारियों का एक बड़ा कारण माना जाता है।

इसके अलावा कम गतिविधि के कारण मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और शरीर की ऊर्जा क्षमता भी कम हो सकती है। इसलिए संतुलित नींद के साथ नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली बनाए रखना भी जरूरी है।

(और पढ़ें - कैसे पता लगाएं डायबिटीज गंभीर बन चुका है)

संतुलित नींद लेना क्यों जरूरी

एक स्वस्थ जीवन के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की नियमित और अच्छी नींद लेना सबसे बेहतर माना जाता है। इसके लिए जरूरी है कि व्यक्ति अपनी दिनचर्या को संतुलित बनाए। रोजाना एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें, दिनभर शारीरिक रूप से सक्रिय रहें और संतुलित आहार लें। सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी जैसी स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना भी बेहतर नींद के लिए फायदेमंद होता है।

संतुलित और अच्छी नींद न केवल शरीर को आराम देती है बल्कि दिमाग को भी तरोताजा रखती है। सही मात्रा में नींद लेने से दिल स्वस्थ रहता है, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और व्यक्ति दिनभर अधिक ऊर्जावान महसूस करता है। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली के लिए पर्याप्त लेकिन संतुलित नींद बेहद जरूरी है।

डॉ. अनिमेष आर्य, डायरेक्टर - रेस्पिरेट्री मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट, दिल्ली

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अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।