फेफड़ों के कैंसर की शुरुआत कैसे होती है, क्या है इस कैंसर पहला आम लक्षण, एक्सपर्ट से जानिए इस बीमारी के बारे में सब कुछ
हर साल 1 अगस्त को फेफड़ों के कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व लंग कैंसर दिवस (World Lung Cancer Day 2022) मनाया जाता है। आज इस मौके पर हम आपको एक्सपर्ट के माध्यम से फेफड़ों के कैंसर के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।
फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) एक ऐसा कैंसर होता है जो फेफड़ों में शुरू होता है। फेफड़े आपकी छाती में मौजूद दो स्पंजी अंग होते हैं जो आपके सांस लेने पर ऑक्सीजन लेते हैं और जब आप सांस छोड़ते हैं तो कार्बन डाईऑक्साइड रिलीज होता है। आंकड़ों के मुताबिक, फेफड़ों का कैंसर दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग अत्यधिक धूम्रपान करते हैं उनमें फेफड़ों का कैंसर होने की संभावना ज्यादा रहती है। हालांकि जो लोग धूम्रपान नहीं करते उनमें भी फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा बना रहता है। फेफड़ों का कैंसर क्यों होता है, इसकी शुरुआत और यह कैसे फैलता है, इन सब सवालों के जवाब जानने के लिए हमने नई दिल्ली के पीएसआरआई हॉस्पिटल की एक्सपर्ट डॉ नीतू जैन से बात की उन्होंने हमें फेफड़ों के कैंसर के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।
फेफड़ों के कैंसर की शुरुआत आमतौर पर कैसे होती है?
फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer in hindi) के ज्यादातर मामलों में धूम्रपान ही कारण रहा है। लंबे समय तक धूम्रपान करने की वजह से तंबाकू के धुएं और अन्य कार्सिनोजेन्स की वजह से जानलेवा रसायन फेफड़ों के संपर्क में आते हैं। इससे डीएनए में बदलाव होता है और यह ही आगे चलकर फेफड़ों के कैंसर बनता है। कार्सिनोजेन्स की वजह से श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचता है। किसी भी नुकसान पर हमारा शरीर तत्काल प्रतिक्रिया देता है और उसकी मरम्मत करता है। हालांकि, हानिकारक पदार्थों के संपर्क में लंबे समय तक रहने से यह नुकसान ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है, जहां से इसकी मरम्मत करना मुश्किल हो जाता है। तब यह फेफड़ों का कैंसर बन जाता है, जहां से लौटना संभव नहीं होता है।
फेफड़ों का कैंसर कैसे फैलता है?
सामान्य तौर पर फेफड़ों का कैंसर तेजी से फैलता है। स्मॉल सेल्स का फेफड़ों का कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है और अन्य नॉन-स्मॉल सेल्स के कैंसर के मुकाबले अधिक तेजी से फैलता है। 70 प्रतिशत मामलों में डायग्नोसिस के समय स्मॉल सेल फेफड़ों का कैंसर फैल चुका होता है।
फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण
- लगातार खांसी
- खून के साथ खांसी या जंग के रंग वाला बलगम
- सीने में दर्द- गहरी सांस लेने या खांसी होने पर बढ़ जाता है
- वजन में कमी
- भूख की कमी
- सांस लेने में दिक्कत
- सामान्य तौर पर कमजोरी
- आवाज का बैठना
फेफड़ों के कैंसर के आम लक्षण
- बलगम में खून आना
- बिना किसी कारण के वजन कम होना
- सांस लेने में दिक्कत
- भूख लगने में कमी
- समझाया न जा सकने वाली, लंबे समय तक चलने वाली खांसी
फेफड़ों के कैंसर के प्रकार
फेफड़ों के कैंसर आमतौर पर पांच प्रकार के होते हैं, जिनके बारे में एक्सपर्ट संक्षेप में यहां बताया है।
- स्मॉल सेल कैंसर
- नॉन-स्मॉल सेल कैंसर
- एडेनोकार्सिनोमा
- स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा
- लार्ज सेल कार्सिनोमा
फेफड़ों के कैंसर का पता लगाने के लिए होने वाले टेस्ट
- सीने का एक्स-रे
- लो डोज सीटी
- एचआरसीटी
- पीईटी-सीटी
- फेफड़ों की बायोप्सी (पुष्टि के लिए)
फेफड़ों के कैंसर का सर्वश्रेष्ठ उपचार
सर्जरी के अलावा कीमोथैरेपी और रेडिएशन थैरेपी का कॉम्बिनेशन हमारा प्रमुख उपचार हो सकता है। एडवांस कैंसर के लिए, रेडिएशन थैरेपी ज्यादा कारगर रहती है। फेफड़ों के कैंसर का उपचार सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। व्यक्ति के पूरी तरह ठीक होने की सफलता की दर में कैंसर सेल का प्रकार और चरण सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्मॉल, शुरुआती चरण के फेफड़ों के कैंसर के मरीजों में सफलता की दर 80-90 प्रतिशत है।
(Inputs By: Dr. Neetu Jain, Senior Consultant, Pulmonology, Critical Care, Sleep Medicine, PSRI Hospital, New Delhi)