
प्रिया मिश्रा
प्रिया को पिछले 4 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर लिखने का अनुभव है। इन्हें हेल्थ और ... Read More
Written By: priya mishra | Updated : August 1, 2025 12:47 PM IST
Medically Verified By: Dr Raajit Chanana
Symptoms Of Lungs Cancer: दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों में फेफड़े का कैंसर सबसे प्रमुख कारण है।रिपोर्टों के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर के 80-90% मामलों के पीछे तंबाकू या सिगरेट का धुंआ प्रमुख कारण माना जाता है। धूम्रपान न करने वाले लोगों में यह जोखिम आनुवांशिकता, वायु प्रदूषण, रेडॉन गैस व अन्य रसायनों के संपर्क के कारण भी बढ़ जाता है। इसके अलावा, पहले से फेफड़ों की कोई बीमारी या परिवार में फेफड़ों के कैंसर का इतिहास भी जोखिम को बढ़ाता है। लंग्स कैंसर तब होता है, जब फेफड़ों में कोशिकाएं असामान्य रूप से विभाजित और बढ़ने लगती हैं। ये कोशिकाएं ट्यूमर बनती है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेता है। समय पर इलाज ना मिलने से रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। फेफड़ों का कैंसर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है: नॉन-स्मॉल सेल (NSCLC) और स्मॉल सेल (SCLC)। 85% से अधिक मामलों में नॉन-स्मॉल सेल प्रकार पाया जाता है, जबकि 15% में स्मॉल सेल कैंसर देखा जाता है। नॉन-स्मॉल सेल धीरे-धीरे और स्मॉल सेल बहुत तेज़ी से फैलता है। फेफड़ों के कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 1 अगस्त को वर्ल्ड लंग कैंसर डे (World Lung Cancer Day 2024) मनाया जाता है। फेफड़ों में कैंसर होने पर शरीर में कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। यदि समय रहते इन लक्षणों की पहचान कर ली जाए, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। आज इस लेख में डॉ। राजीत चनाना, वरिष्ठ सलाहकार - मेडिकल ऑन्कोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, दिल्ली से जानेंगे लंग्स कैंसर के शुरुआती लक्षणों के बारे में।
फेफड़ों के कैंसर के ज्यादातर मामलों में धूम्रपान ही प्रमुख कारण रहा है। लंबे समय तक धूम्रपान करने की वजह से तंबाकू के धुएं और अन्य कार्सिनोजेन्स की वजह से जानलेवा रसायन फेफड़ों के संपर्क में आते हैं। इससे डीएनए में बदलाव होता है और यह ही आगे चलकर फेफड़ों के कैंसर बनता है। कार्सिनोजेन्स की वजह से श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचता है। किसी भी नुकसान पर हमारा शरीर तत्काल प्रतिक्रिया देता है और उसकी मरम्मत करता है। हालांकि, हानिकारक पदार्थों के संपर्क में लंबे समय तक रहने से यह नुकसान ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है, जहां से इसकी मरम्मत करना मुश्किल हो जाता है। तब यह फेफड़ों का कैंसर बन जाता है, जहां से लौटना संभव नहीं होता है।
कुछ मामलों में साइलेंट लक्षण भी मिलते हैं जैसे कंधे या बाजू में दर्द, आंखों की समस्या, बार-बार छाती का संक्रमण, शरीर के अन्य हिस्सों (हड्डियों, दिमाग) में दर्द या सूजन आदि। कई बार ये लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे टीबी या ब्रोंकाइटिस से मिलते-जुलते हैं, इसलिए अक्सर देर से निदान होता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2024 की रिपोर्ट बताती है कि समय रहते लक्षणों की पहचान और उचित निदान से फेफड़ों के कैंसर के इलाज की सफलता दर बढ़ सकती है। शुरुआती अवस्था (early stage) में पता चलने पर 5-वर्ष जीवित रहने की दर लगभग 50-70% हो सकती है, जबकि देर से निदान होने पर यह 1% से भी कम रह जाती है। समय पर चिकित्सकीय सलाह, जोखिम कारकों से बचाव (जैसे धूम्रपान बंद करना), नियमित जांच और सतर्कता ही इस बीमारी से बचाव एवं उपचार में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
लंग कैंसर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है: नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC) और स्मॉल सेल लंग कैंसर (SCLC)।
लंग कैंसर का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन, एक्स-रे, ब्रोंकोस्कोपी, बायोप्सी और पीटी स्कैन जैसे टेस्ट किए जाते हैं।
हां, धूम्रपान किए बिना भी लंग कैंसर होना संभव है। पैसिव स्मोकिंग, वायु प्रदूषण, रेडॉन गैस, फैमिली हिस्ट्री या कार्यस्थल पर जहरीले पदार्थों का संपर्क भी फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकता है।
फेफड़ों में कैंसर तब शुरू होता है, जब फेफड़ों की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर बना लेती हैं। यह आमतौर पर लंबे समय तक धूम्रपान या जहरीले रसायनों के संपर्क में रहने से होता है।