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Lung Cancer: कैंसर कई प्रकार के होते हैं। इसमें फेफड़ों का कैंसर भी शामिल है। फेफड़ों का कैंसर एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी है। फेफड़ों का कैंसर, दुनियाभर में कैंसर से संबंधित मौतों का प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अनुसार, फेफड़ों का कैंसर पुरुषों और महिलाओं, दोनों में मृत्यु के सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। जब फेफड़ों में कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, तो कैंसर के लक्षण नजर आने लगते हैं। यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो लोगों के मन में डर पैदा कर सकता है। फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) का समय पर निदान और इलाज बहुत जरूरी है। अगर इस बीमारी का समय पर इलाज न किया जाए तो इससे फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। फेफड़े खराब हो सकते हैं और व्यक्ति की जान तक जा सकती है। इतना ही नहीं, फेफड़ों का कैंसर शरीर के कई अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए फेफड़ों के कैंसर के लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आइए, एंड्रोमेडा कैंसर हॉस्पिटल, सोनीपत के सर्जिकल ऑन्कोलॉडी और चेयरमैन डॉ. अरुण कुमार गोयल से जानते हैं फेफड़ों के कैंसर के लक्षण, कारण और बचाव के उपाय (Lung Cancer ke Lakshan aur Karan)-
फेफड़ों का कैंसर होने पर कई लक्षणों का अनुभव हो सकता है। शुरुआत में सामान्य लक्षण दिखते हैं। लेकिन, जब बीमारी गंभीर रूप लेती है तो इस स्थिति में लक्षण भी गंभीर हो सकते हैं।
फेफड़ों का कैंसर कई कारणों से हो सकता है। इसमें शामिल हैं-
धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का एक प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार धूम्रपान लगभग 85 फीसदी फेफड़ों के कैंसर के लिए जिम्मेदार है। यानी धूम्रपान करने वाले लोगों में फेफड़ों के कैंसर का जोखिम अधिक रहता है। जो लोग धूम्रपान करते हैं, उनमें फेफड़ों का कैंसर ज्यादा देखने को मिलता है। इसमें पैसिव स्मोकिंग भी शामिल है। पैसिव स्मोकिंग से भी फेफड़ों के कैंसर का 20-30 फीसदी जोखिम ज्यादा बना रहता है। अगर आप नियमित रूप से धूम्रपान करते हैं तो इस स्थिति में आपको इस कैंसर का खतरा बहुत ज्यादा हो सकता है। इसलिए आपको धूम्रपान से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
वायु प्रदूषण भी फेफड़ों के कैंसर का एक मुख्य कारण होता है। जो लोग वायु प्रदूषित क्षेत्रों में रहते हैं, उनमें फेफड़ों के कैंसर का जोखिम अधिक रहता है। यही वजह है कि मेट्रो सीटी में रहने वाले लोगों में फेफड़ों के कैंसर के ज्यादा मामले देखने को मिलते हैं। इसके अलावा, औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसका खतरा ज्यादा बना रहता है।
बुढ़ापे में भी फेफड़ों के कैंसर का जोखिम ज्यादा रहता है। उम्र बढ़ने के साथ फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। 50 से 60 साल के बाद कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए बुजुर्गों में इस बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है।
फेफड़ों के कैंसर के इलाज के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं।
फेफड़ों के कैंसर के इलाज के लिए कौन-सा विकल्प चुनना है, यह डॉक्टर द्वारा ही बताया जाता है। अगर कैंसर शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाता है तो सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। अन्यथा, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी की मदद ली जाती है।
अगर फेफड़ों के कैंसर का समय पर इलाज न किया जाए तो इस स्थिति में, कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में भी तेजी से फैल सकता है। आपको बता दें कि जब फेफड़ों में कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, तो ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। धीरे-धीरे ये ट्यूमर बढ़ते हैं और कैंसर हो जाता है। इसकी वजह से सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। फेफड़ों का कैंसर रक्त और लिम्फ सिस्टम के माध्यम से शरीर के अन्य अंगों जैसे- हड्डियों, मस्तिष्क और लिवर तक भी पहुंच जाता है। यह स्थिति बेहद खतरनाक और जानलेवा हो सकती है। इसलिए फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। इसके लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें और इलाज शुरू करवाएं।
फेफड़ों का कैंसर एक गंभीर बीमारी है। यह जानलेवा भी हो सकती है। इसलिए इससे बचाव के लिए आप कुछ उपाय आजमा सकते हैं। इसमें शामिल हैं-
फेफड़ों का कैंसर जानलेवा हो सकता है। धूम्रपान और वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों में इसका ज्यादा खतरा रहता है। इस कैंसर का समय पर इलाज करना बेहद जरूरी है। इसके लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें। इस बीमारी से बचने के लिए आपको समय-समय पर फेफड़ों की जांच करवानी चाहिए।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
अगर फेफड़ों में कफ जमा है, तो इस स्थिति में सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। खांसी के साथ बलगम निकलता है। साथ ही, घरघराहट की आवाज भी आ सकती है।
जी हां, फेफड़ों का कैंसर होने पर आपको खांसी आ सकती है। खांसी, इस बीमारी का एक सामान्य लक्षण है।
फेफड़े के कैंसर की लास्ट स्टेज, स्टेज 4 है। इस चरण में कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल चुका होता है।
अगर लंबे समय से खांसी हो, सांस लेने में तकलीफ हो और सीने में दर्द हो, तो ये संकेत फेफड़ों के कैंसर की तरफ इशारा कर सकते हैं।