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Written By: Atul Modi | Published : August 23, 2023 4:12 PM IST
व्यस्त लाइफ स्टाइल और युवाओं द्वारा ज्यादातर समय स्क्रीन पर बिताने के चलते आजकल नींद की कमी बहुत आम हो गई है। शुरुआत में जब लोग नींद को नजरअंदाज कर मनोरंजन और सोशल मीडिया पर अपना वक्त बिताते हैं तो उन्हें इसके लंबे नुकसान के बारे में पता नहीं होता है। नींद की कमी के चलते न सिर्फ थकान और कमजोरी महसूस होती है बल्कि ये आगे चलकर हृदय संबंधी बीमारियों और इससे संबंधित परेशानियों का कारण बन सकती है।
पेन स्टेट यूनिवर्सिटी में हाल ही में (2023 में) की गई जांच में पाया गया कि जब कोई व्यक्ति रात में 5 घंटे से कम समय की नींद लेता है तो उसके कार्डियोवैस्कुलर हार्ट डिजीज की चपेट में आने की संभावना काफी बढ़ जाती है। जांच में पाया गया है कि ऐसे लोगों में हार्ट रेट और सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर समय के साथ घटते रहते हैं। कई लोग अपनी नींद की कमी को पूरा करने के लिए वीकेंड को एक अवसर की तरह मानते हैं लेकिन एक्सपर्ट कहते हैं कि यह कॉमन प्रैक्टिस किसी भी हालत में स्वास्थ्य के साथ हुई कमी की भरपाई नहीं कर सकते हैं।
एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में सीनियर हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर संतोष कुमार डोरा कहते हैं कि, नींद हमारे शरीर को आराम देने, मरम्मत करने और फिट रखने में मदद करती है। जब कोई व्यक्ति अच्छी नींद लेता है तो उस दौरान बॉडी में हार्मोन रेगुलेट होते हैं, याददाश्त मजबूत होती है और इम्यून सिस्टम को अपना काम करने के लिए मजबूती मिलती है। इसके अलावा कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को मेंटेन रखने में भी नींद बहुत बड़ा रोल निभाती है। नींद और हृदय का संबंध बहुत जटिल है जिसमें विभिन्न तंत्र काम करते हैं। जिसमें महत्वपूर्ण पहलू ब्लड प्रेशर है। अपर्याप्त नींद की वजह से ब्लड प्रेशर का स्तर हाई हो सकता है जिससे समय के साथ हृदय और रक्त वाहिकाओं पर तनाव बढ़ सकता है। सिर्फ यही नहीं नींद की कमी कोर्टिसोल और इंसुलिन जैसे हार्मोन के संतुलन को भी प्रभावित करती है जो शरीर में मेटाबॉलिज्म और सूजन को बैलेंस रखते हैं। जब ये 2 हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं तो ओबेसिटी और डायबिटीज जैसी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है, ये दोनों हृदय रोग के लिए महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं।
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर डोरा कहते हैं कि, नींद और हृदय स्वास्थ्य पर कई रिसर्च हो चुकी हैं जो ये बताती हैं कि लंबे समय तक प्रति रात 7-8 घंटे से कम समय की नींद लेने वाले लोगों में हृदय संबंधी बीमारियां विकसित होने का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा, लंबे समय तक नींद की कमी से जूझने वाले लोगों में अनियमित दिल की धड़कन विकसित होने की संभावना अधिक हो सकती है। हृदय गति पर हो रही ये गड़बड़ी हार्ट पर गहरा असर डाल सकती है और गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकती है।
डॉक्टर संतोष कुमार डोरा के अनुसार, केवल नींद लेने का समय ही नहीं बल्कि नींद की क्वालिटी भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। स्लीप एपनिया जैसी स्थितियां, जिनमें नींद के दौरान सांस लेने में बार-बार रुकावट होती है, हृदय स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती हैं। स्लीप एपनिया जैसी स्थिति हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक और हार्ट फेल के चांस को बढ़ा देती है। यह कमियां ऑक्सीजन की कमी और नींद के पैटर्न में रुकावट बनने के चलते हृदय प्रणाली पर तनाव डालते हैं।
नींद का एक शेड्यूल बनाएं जिसे हर हालत में फॉलो करें। इस शेड्यूल से आपके शरीर की आंतरिक घड़ी के नियमन में मदद मिलती है।
(Inputs By: Dr. Santosh Kumar Dora, Senior Cardiologist at Asian Heart Institute, Mumbai.)