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Hypertension And Heart Health: हाइपरटेंशन को सामान्य तौर पर हाई ब्लड प्रेशर के नाम से जाना जाता है। वर्तमान समय में यह सबसे ज्यादा होने वाली बीमारी लेकिन कम गंभीर समझी जाने वाली क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इसे अक्सर ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है। यह आमतौर पर बिना किसी साफ लक्षण के पनपती है, और सालों तक चुपचाप शरीर को नुकसान करती रहती है। जब हार्ट अटैक, स्ट्रोक या किडनी फेलियर जैसी किसी बड़ी कार्डियोवैस्कुलर घटना होती है, तब इसका पता चलता है।
लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर हृदय और ब्लड वेसल्स पर बहुत ज्यादा दबाव डालता है। समय के साथ-साथ यह दबाव ब्लड वेसल्स की सेहत को खराब करता है और दिमाग, आंखों और किडनी जैसे जरूरी अंगों तक खून के सही प्रवाह को बाधित करता है। कई मरीजों को अपनी इस हालत के बारे में तब तक पता नहीं चलता जब तक कि स्थिति गंभीर नहीं हो जाती। इसलिए मैं मानता हूं कि शुरुआती जागरूकता और बचाव बहुत जरूरी हैं।
हाइपरटेंशन के इलाज में दवाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन लाइफस्टाइल और पोषण भी दवाओं की तरह ही कारगर होते हैं। पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट जैसे जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स से भरपूर डाइट ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और ब्लड वेसेल्स की फ्लेक्सिबिलिटी बनाए रखने में मदद करती है। ये पोषक तत्व हरी पत्तेदार सब्जियों, नट्स, बीजों, साबुत अनाज, फलियों और रंग-बिरंगे फलों में प्राकृतिक रूप से भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।
वहीं प्रोसेस्ड फूड, ट्रांस फैट, ज्यादा सोडियम और अतिरिक्त चीनी का ज्यादा सेवन करने से हाइपरटेंशन होने या उसके बिगड़ने का खतरा काफी बढ़ जाता है। सोच-समझकर और संतुलित डाइट लेना लंबे समय तक हार्ट डिजीज से बचने का पहला और महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

नियमित शारीरिक रूप से सक्रिय रहना ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के सबसे असरदार नॉन-फार्माकोलॉजिकल तरीकों में से एक है। योग, तेज चलना, साइकिल चलाना, तैरना या डांस जैसी एक्टिविटीज ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती हैं, हृदय की कार्यक्षमता में सुधार करती हैं और आर्टरीज (धमनियों) की अकड़न को कम करती हैं। लगातार सक्रिय रहने से वजन नियंत्रित रहता है और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। सही वजन और अच्छा मेटाबॉलिक स्वास्थ्य दोनों ही ब्लड प्रेशर को रेगुलेट करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
लंबे समय तक रहने वाला मानसिक तनाव हाइपरटेंशन का एक साइलेंट कारण होता है। लंबे समय तक तनाव रहने से हार्मोनल रिस्पॉन्स ट्रिगर होते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर दबाव पड़ता है। गहरी सांस लेना, मेडिटेशन, जर्नलिंग, पर्याप्त नींद और समय-समय पर डिजिटल डिटॉक्स जैसी आसान लेकिन असरदार आदतें तनाव झेलने की क्षमता और हृदय की सेहत को काफी बेहतर बना सकती हैं।
हाइपरटेंशन रातों-रात नहीं होता और न ही इसे रातों रात कंट्रोल किया जा सकता है। समस्या गंभीर न हो, इसके लिए जरूरी होता है कि नियमित कोशिश करते रहना। नियमित निगरानी, लगातार लाइफस्टाइल में बदलाव, और मेडिकल सलाह मानने से राहत मिलती है। रोजाना छोटे-छोटे और सजग फैसले समय के साथ मिलकर शक्तिशाली सुरक्षात्मक प्रभाव पैदा करते हैं।
हाइपरटेंशन भले ही साइलेंट हो, लेकिन इसका परिणाम खतरनाक होता है। जागरूकता, सक्रिय लाइफस्टाइल में बदलाव और समय पर मेडिकल सलाह से गंभीरता को काफी हद तक रोका जा सकता है। अपने हृदय का स्वास्थ्य बेहतर रखने के लिए समझदारी से आदतों का पालन करें।