
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Updated : May 1, 2026 4:29 PM IST
लू का असर शरीर के विभिन्न अंगों पर पडता है। (this image was generated by chatgpt))
देश के विभिन्न राज्यों में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। बढ़ता तापमान, गर्म हवाओं के कारण हीट स्ट्रोक यानी की लू लगने का खतरा भी बढ़ रहा है। लू लगने पर शरीर का तापमान अचानक से बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। जिसके कारण बेहोशी, चक्कर आना, सिर में दर्द और कुछ मामलों में पेट की समस्या भी देखी जाती है। आमतौर पर लोग लू लगने को सिर्फ तेज गर्मी लगना समझते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस के अनुसार किसी भी व्यक्ति को लू लगना एक गंभीर और जानलेवा स्थिति हो जाती है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च बताती है कि लू तब लगती है जब शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा हो जाता है और शरीर की कूलिंग सिस्टम (पसीना और ब्लड सर्कुलेशन) फेल होने लगती है। इस स्थिति में शरीर को खुद को ठंडा नहीं कर पाता है, जिसका असर विभिन्न अंगों पर पड़ सकता है। इन दिनों गर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है तो यह जानना जरूरी है कि लू का असर शरीर के किन अंगों पर पड़ता है।
रिसर्च के अनुसार, लू का सबसे पहला असर दिमाग पर पड़ता है। तेज गर्म हवाओं के कारण दिमाग का तापमान बढ़ने से न्यूरॉन्स डैमेज होने लगते हैं। इससे व्यक्ति को चक्कर, भ्रम, बेहोशी की समस्या हो सकती है। लू लगने पर गंभीर स्थिति में व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी मौत भी हो सकती है।
लू की थपेड़े सीधे सीने पर भी लगती है। जिसके कारण सांसें तेज हो जाती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बिगड़ने लगता है। लू लगने के कारण आपको सांस लेने में परेशानी, सांसों को तेज चलना जैसी समस्याएं होती हैं। लू अगर ज्यादा गंभीर स्थिति में पहुंच जाए तो respiratory distress भी हो सकता है।
लू लगने का असर हार्ट पर भी पड़ता है।
गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए हार्ट ज्यादा मेहनत करता है। यही कारण है कि सर्दियों की तुलना में गर्मियों में हार्ट रेट बढ़ जाता है। इसलिए लू लगने पर ब्लड प्रेशर कम होना आम बात मानी जाती है। लेकिन लू के कारण दिल पर पड़ने वाला दबाव ज्यादा बढ़ जाए तो इससे हार्ट अटैक का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है। खासकर बुजुर्ग और हार्ट के मरीजों के लिए लू बहुत खतरनाक होती है।
लू और अत्यधिक गर्मी की स्थिति में अक्सर लोग पानी कम पीते हैं। कम पानी पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या होती है। इससे शरीर में पानी की कमी से खून गाढ़ा हो जाता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन तेजी से बढ़ सकता है, जिससे किडनी फ्लयोर और लिवर डैमेज होने का खतरा रहता है।
(Image: AI Generated)
गर्मियों में लू के कारण शरीर में पानी की कमी से किडनी पर दबाव बढ़ता है। इससे पेशाब की मात्रा धीरे-धीरे पेशाब कम हो जाता है। इसके कारण एक्यूट किडनी फेल्योर होने की संभावना कई गुणा ज्यादा होती है।
लू लगने से लिवर पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे लिवर की कोशिकाएं डैमेज हो सकती हैं। दरअसल, गर्मियों में पानी कम पीने की वजह से डिटॉक्स करने की क्षमता कम हो जाती है। इस गंभीर स्थिति में लिवर के काम करने की क्षमता कम होती है और लिवर फेल्योर का खतरा बढ़ता है।
इसके अलावा लू का असर मांसपेशियों, आंख, जीभ पर भी पड़ता है। यही कारण है कि गर्मियों में विशेषज्ञ लू से बचाव के लिए बार- बार चेतावनी देते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को गर्मियों में लू लग जाती है, तो उसके शरीर में नीचे बताए गए लक्षण नजर आते हैं।
हीट स्ट्रोक से बचाव करना बहुत जरूरी है।
गर्मियों में लू से बचाव के लिए आप नीचे बताए गए तरीकों को अपना सकते हैं...
Disclaimer: गर्मियों के मौसम में लू लगना सिर्फ गर्मी लगना चाहिए, बल्कि यह एक मल्टी ऑर्गन डैमेज कंडीशन है, जो दिमाग, दिल, किडनी और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। इसलिए लू के लक्षणों को शुरुआती स्टेज पर पहचान कर इससे बचाव करना बहुत जरूरी है।