
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : April 29, 2026 2:38 PM IST
Medically Verified By: Dr Ashis Acharya
शरीर के विभिन्न अंगों में होने वाले दर्द को कम करने के लिए अक्सर लोग दवा लेते हैं। (AI Generated image)
दर्द एक बहुत ही आम समस्या है। हम सभी कभी न कभी सिरदर्द, दांत के दर्द, मांसपेशियों में दर्द या चोट के बाद अक्सर दर्द से जरूर गुजरते हैं। जब दर्द की बात आती है तो अक्सर लोग इससे राहत पाने के लिए दर्द की गोली का सहारा लेते हैं। कई बार गोली खाने के तुरंत बाद, तो कभी गोली खाने के 10 से 15 मिनट के बाद दर्द की दवा लेते हैं। गोली देने के बाद शरीर के अंगों को दर्द तो कम करता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये गोलियां शरीर में जाकर ऐसा क्या करती हैं कि कुछ ही मिनटों में दर्द कम हो जाता है? आखिरकार दर्द की गोलियों में ऐसा क्या होता है, जो शरीर के अंदर जाते ही दर्द को खत्म कर देता है?
नई दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के सीनियर ऑर्थोपेडिक और स्पोर्ट्स मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. आशीष आचार्य कहना है कि दर्द की दवा शरीर में किस तरह से काम करती है यह जानने से पहले दर्द के बारे में जानना जरूरी है। दर्द शरीर का एक चेतावनी संकेत है। जब शरीर में किसी प्रकार की चोट, सूजन या समस्या होती है, तो हमारा नर्वस सिस्टम दिमाग को संकेत भेजता है।
यह संकेत हमें बताता है कि शरीर में कुछ गड़बड़ है। जैसे किसी प्रकार की चोट लगना, शरीर में गलत खानपान और फिजिकल एक्टिविटी के कारण सूजन, मांसपेशियों में खिंचाव और संक्रमण। डॉक्टर बताते हैं कि जब शरीर में इस तरह की प्रक्रिया होती है तो दिमाग में एक संकेत जाता है कि अब इस दर्द से राहत पाने के लिए कुछ करना चाहिए। ऐसे में लोग अक्सर गोलियों का विकल्प अपनाते हैं।
दर्द की दवाएं दिमाग में सिग्नल देती हैं।
दर्द की गोलियां ऐसी दवाइयां होती हैं जो दर्द को कम या खत्म करने का काम करती हैं। ये शरीर में दर्द के संकेतों को या तो ब्लॉक करती हैं या कम कर देती हैं।
डॉ. आशीष आचार्य बताते हैं कि दर्द की गोलियों का असर मुख्य रूप से 3 तरीकों से होता है:
जब शरीर में किसी प्रकार की चोट लगती है या सूजन होती है, तो शरीर Prostaglandins नामक केमिकल बनाता है। यही केमिकल दर्द और सूजन को बढ़ाते हैं। ऐसे में दर्द की गोलियां लेने से इस शरीर के विभिन्न अंगों में होने वाले दर्द को कम करने Prostaglandins केमिकल बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है या कुछ मामलों में बिल्कुल ही खत्म हो जाती है। इससे शरीर की सूजन और विभिन्न प्रकार के अंगों में होने वाले दर्द धीरे- धीरे कम होने लगता है।
कुछ पावरफुल दर्द निवारक नर्वस सिस्टम को धीमा कर देते हैं, जिससे दर्द तुरंत ही कम हो जाता है। इस प्रकार की दवाएं खाने से शरीर दिमाग को एक प्रकार का संकेत देता है। इस प्रक्रिया से नर्वस सिस्टम पूरी तरह से शांत हो जाता है। इससे आपको दर्द महसूस नहीं होता है। हालांकि इस प्रकार की दवाएं डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेनी चाहिए।
डॉ. आशीष का कहना है कि कुछ दर्द को मिटाने वाली दवाएं सीधे हमारे दिमाग और नर्वस सिस्टम पर असर डालती हैं। दिमाग को दर्द का सिग्नल कम मिलता है। इससे व्यक्ति को राहत महसूस होती है। यही कारण है कि दर्द की गोलियां खाने से आपको राहत महसूस होती है।
बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द की गोली लेना खतरनाक होता है।
दर्द की गोली आमतौर पर 15 से 30 मिनट में असर दिखाना शुरू कर देती है। लेकिन इसका असर गोली के आधार, व्यक्ति के इम्यून सिस्टम और वह किस तरह की लाइफस्टाइल में रहता है, इस बात पर निर्भर करता है।
इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर कहते हैं- नहीं, हर बार सिर में दर्द होने, पैरों में सूजन या किसी अन्य प्रकार के दर्द में दर्द की गोलियां खाना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं होता है। अगर आप लंबे समय तक दर्द से राहत पाने के लिए दर्द की गोलियां ले रहे हैं, तो इससे पेट में जलन, एसिडिटी, किडनी पर असर और कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण लिवर के खराब होने तक का खतरा रहता है। इसलिए किसी भी प्रकार के दर्द में पहले उसे सहना सीखना चाहिए। अगर दर्द सहन से बाहर हो रहा है तब घरेलू नुस्खे जैसे गर्म या ठंडी पट्टी का इस्तेमाल करना चाहिए और इसके बाद ही किसी प्रकार की दर्द की गोली खाना चाहिए।
दर्द की गोलियां हमारे शरीर में एक वैज्ञानिक तरीके से काम करती हैं। ये या तो दर्द पैदा करने वाले केमिकल्स को रोकती हैं, या दिमाग तक पहुंचने वाले सिग्नल को कम कर देते हैं। हालांकि दर्द की गोली बहुत ज्यादा जरूरत पड़ने पर ही खानी चाहिए।
ज्यादा दर्द की गोली लेने से लिवर, किडनी डैमे और पेट में अल्सर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
पेन किलर के साइड इफेक्ट में गैस, एसिडिटी, उल्टी, चक्कर और किडनी/लिवर पर असर शामिल हो सकता है।
1 दिन में पेन किलर की मात्रा दवा के प्रकार निर्भर करती है, इसलिए किसी प्रकार का पेन किलर खाने से पहले इस विषय पर अपने डॉक्टर से बात जरूर करें।