
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : May 7, 2026 9:17 AM IST
Medically Verified By: Dr. Malini Saba
अच्छे-बुरे लोगों की पहचान
Sache Rishte Ki Pehchan Kaise Kare: आजकल जमाना ही ऐसा है जो आज हमने मीठी-मीठी बातें कर रहा है वहीं कल को पीठ पीछे उल्टा बोलता दिख जाता है। यह किसी एक के साथ नहीं, बल्कि बहुत लोगों के साथ होता है। यानी कि हाथ के दांत खाने के कुछ और, और दिखाने के कुछ और। ऐसे में वह लोग फंस जाते हैं जिनकी इंटेशन अच्छी होती है, क्योंकि हम अपने पुराने एक्सपियरेंस के हिसाब से लोगों को जज करने लगते हैं।
लेकिन रिश्तों की शुरुआत अक्सर आकर्षण, एक्साइटमेंट और मीठी-मीठी प्यारी बातों से होती है। कोई हमारी तारीफ करें, हमें खास महसूस कराए, हमारी हर बात को समझने का दावा करे, तो स्वाभाविक है कि हम उसकी ओर खींचते हैं। ऐसे में कुछ समय बाद हमारे मन में एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि क्या सामने वाला सच में हमारे लिए सही है या सिर्फ उसकी मीठी बातों से मुझे उसे अच्छा समझ लेना चाहिए? आइए साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मालिनी सबा से जातने हैं कि सही या गलत व्यक्ति की पहचान कैसे करें?
डॉक्टर सबा कहती हैं कि सच यह है कि हर मीठी बात सच्चाई का प्रमाण नहीं होती है। कई बार लोग इंप्रेशन जमाने, भरोसा जीतने या अपनी इमेज बेहतर दिखाने के लिए शब्दों का सहारा लेते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि किसी व्यक्ति की असलियत उसके शब्दों से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और निरंतरता से सामने आती है।
डॉक्टर सबा बताती हैं कि सबसे पहले आप सामने वाले की कंसिस्टेंसी पर ध्यान दें। यानी कि क्या वह व्यक्ति हर परिस्थिति में एक जैसा व्यवहार करता है? या उसका व्यवहार समय, मूड या परिस्थिति के अनुसार बदल जाता है? जो व्यक्ति सच में आपके लिए सही है, वह केवल अच्छे समय में ही नहीं, बल्कि कठिन समय में भी आपके साथ खड़ा रहता है। वहीं मीठी-मीठी बातें करने वाले लोग काम के समय में पलट जाते हैं या साथ नहीं देते हैं।
ध्यान देने वाली दूसरी बात है सम्मान यानी कि रिस्पेक्ट। क्या वह व्यक्ति आपकी सीमाओं, विचारों और भावनाओं का सम्मान करता है? यह सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि मीठी बातें करने वाला व्यक्ति शुरुआत में पूरी तरह सही लग सकता है, लेकिन समय के साथ यह क्लियर हो जाता है कि वह आपकी व्यक्तिगत सीमाओं को समझता है या नहीं।
तीसरा बिंदु है ईमानदारी। इसका मतलब है कि जिस व्यक्ति से आप बात कर रहे हैं, क्या वह व्यक्ति अपनी बातों और वादों पर खरा उतरता है? क्या वह हर तरह का सच बोलने का साहस रखता है, या सिर्फ वही कहता है जो आपको अच्छा लगे? सच्चा रिश्ता केवल सुखद शब्दों पर नहीं, बल्कि सच्चाई पर टिका होता है। इसलिए अपनी लाइफ में ऐसे लोगों का शामिल करें जो कड़वा होने पर भी आपको सच बताएं।
अक्सर हम अपने मन से आने वाली आवाज को अनदेखा कर देते हैं, फिर जब कोई हमें धोखा देता है तो अफसोस करते हैं कि काश उस दिन अपने मन की सुन ली होती। इसे ही लेकर साइकोलॉजिस्ट कहती हैं कि आपका आत्म अनुभव यानी कि इनर फीलिंग अक्सर हमें संकेत देती है। अगर किसी के साथ रहते हुए बार-बार अनकंफर्टेबल, अनसेफ या शक सा महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज न करें। हमारा अंतर्मन कई बार वह देख लेता है, जो हम तर्क से नहीं समझ पाते। इसलिए अगर किसी चीज को लेकर गट फीलिंग आ रही है तो उसपर ध्यान दें।
साइकोलॉजिस्ट बताती हैं कि ‘आपका यह भी समझना जरूरी है कि आपके साथ लव बॉम्बिंग जैसी स्थितियां भी पैदा हो सकती है। जैसे कोई व्यक्ति शुरुआत में बहुत ज्यादा प्यार दिखाता है, ध्यान रखता है और तारीफ करता है, ताकि जल्दी से इमोशनल बॉन्ड बेहतर हो पाए। लेकिन समय के साथ उनका व्यवहार बदल सकता है और यही संकेत होता है कि शुरुआत की वो मीठी-मीठी बातें पर्मामेंट नहीं थी।
इसलिए सही व्यक्ति वह नहीं होता जो केवल मीठी बातें करें, बल्कि वह होता है जो अपने व्यवहार से आपको सुरक्षित, सम्मानित और समझा हुआ महसूस कराए। रिश्ते शब्दों से नहीं, बल्कि विश्वास, स्थिरता और सच्चाई से बनते हैं।
डिस्क्लेमर- अगली बार जब कोई बहुत अच्छी बातें करे, तो खुद से एक सवाल जरूर पूछें कि क्या उसके शब्द और एक्शन एक-दूसरे से मेल खाते हैं? क्योंकि सच्चा रिश्ता वही है, जहां कहने और करने में अंतर न हो।
अच्छे लोगों की यह आदत होती है कि वे अपने साथ-साथ सामने वाले व्यक्ति की भावनाओं का भी सम्मान करते हैं।
एक इंसान की असली पहचान उसके काम से होती है, उसके व्यवहार से होती है। उसकी वाणी से होती है।
गलत इंसान की पहचान उनके व्यवहार, बातों और क्रियाओं के असंतुलन से की जा सकती है। वे लगातार झूठ बोलते हैं, बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, और हमेशा दूसरों में कमियां निकालते हैं।
दोगला आदमी उस व्यक्ति को कहते हैं जो दोहरे चरित्र वाला, पाखंडी, या मौकापरस्त हो, जो अपने निजी स्वार्थ के लिए बातों से मुकर जाए या सामने वाले को धोखा दे। ऐसे लोग अलग-अलग लोगों के सामने अलग-अलग व्यवहार करते हैं।