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हर बार की तरह इस बार भी दिवाली के बाद हवा की गुणवत्ता बहुत खराब स्तर तक पहुंच चुकी है, खासकर दिल्ली-एनसीआर में जहां कुछ जगह पर एक्यूआई लेवल 'खतरनाक' स्तर पर पहुंच गया है। रिपोर्ट्स की मानें तो हवा में पीएम 2.5 का स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसके कारण कुछ प्रमुख समस्याएं हमारे मुंह बाए खड़ी हुई हैं। इनमें शामिल हैं आंखों में जलन, खुजली, गले की एलर्जी, सिरदर्द और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण, जो व्यक्ति दर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते है।
हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि वायु गुणवत्ता का खराब स्तर वायरल बुखार जैसी कठिन समस्याएं पैदा कर सकता है लेकिन ये निश्चित रूप से श्वसन संक्रमण की समस्या को और भी जटिल बना सकता है और जिन लोगों को सांस लेने में समस्याहै, उनके खतरे को और बढ़ा सकता है। जैसा कि हम देख रहे हैं कि प्रदूषण का स्तर अभी भी चिंता का सबब बना हुआ है और हाल में फैले वायरल और मौसमी संक्रमण इस स्थिति को और बिगाड़ सकता है।
जैसे-जैसे मौसम में बदलाव हो रहा है ठीक वैसे-वैसे फ्लू और वायरल संक्रमण के मामलों में वृद्धि शुरू हो गई है, जो कि कहीं न कहीं COVID-19 की वजह से एक खतरा बनता जा रहा है। वायरल संक्रमण के बढ़ते मामलों का सबसे बड़ा कारण मौसम में परिवर्तन और इम्यूनिटी का कमजोरहोना है। इसके अलावा एक्सपर्ट मानते हैं कि पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर, जो सांस लेने वाली हवा को रोकता हैं, ऐसे कई कारक भी हैं, जो मौसमी संक्रमण को प्रभावित कर सकते हैं।
इसके साथ ही इन संक्रमण के लक्षण, मौसम कितना लंबा है जोखिम को और ज्यादा बढ़ा देता है। चिंता से घिरा होने के बावजूद ये वर्ष और भी घातक साबित हो सकता है, खासकर जब आप पहले से ही गंभीर फ्लू का सामना कर रहे हों, जिसमें अस्पताल में भर्ती होने की संभावना बहुत ज्यादा हो।
वायु प्रदूषण वास्तव में योगदान देने वाले कारकों में से एक है कि और इस साल अधिक सर्दी, खांसी, वायरल बुखार, स्वाइन फ्लू और एच1एन1 इन्फ्लूएंजा के मामले सामने आ रहे हैं और अगर प्रदूषण का स्तर ठीक इसी तरह जारी रहता है, तो इसके बारे में चिंतित होने की जरूरत है।
हवा में धूल, स्मॉग और प्रदूषकों का उच्च स्तर हमारे श्वसन तंत्र को काफी हद तक प्रभावित करता है, और हर उस व्यक्ति का जीना मुहाल कर सकता है, जो पहले से ही किसी सांस संबंधी स्वास्थ्य स्थिति से पीड़ित हो। सांस लेने में कठिनाई और खांसी के साथ जैसे कुछ अन्य लक्षण हैं, जो वायरल बीमारियों के साथ आम हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
अगर आप इनमें से किसी भी लक्षण का सामना कर रहे हैं तो आपको जल्द से जल्द जांच करवानी चाहिए क्योंकि इनमें से बहुत से लक्षण फ्लू और अन्य वायरल संक्रमण का कारण बन सकते हैं, जो अभी हवा में फैल रहे हैं।
वायु प्रदूषण छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के साथ-साथ पहले से गंभीर बीमारियों के शिकार लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। प्रदूषण एक ऐसी चीज है, जो आपके घर के अंदर भी मौजूद हो सकता है, इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हर व्यक्ति अपने हिसाब से उपाय करे और प्रदूषण से लड़े। हालांकि यह सलाह दी जाती है कि अगर आपको बाहर जाना है तो बाहरी हवा के संपर्क में आने से बचें। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सबसे कम प्रदूषण होता है। सुबह की शुरुआत काफी धुंधली और आपके फेफड़ों के लिए खराब हो सकती है। घर के अंदर नमी वाले हिस्सों को साफ करें। वायु शुद्ध करने वाले उपकरण और नियमित रूप से भाप लेने से आपके COVID-19 और प्रदूषण संबंधी समस्याओं के विकास के जोखिम को कम किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति घर के बाहर पानी का छिड़काव कर सकता है ताकि धूल जम जाए और फैले नहीं।