पेरेंट्स कैसे पता लगाएं कि उनके बच्चे को हीमोफीलिया है या नहीं? एक्सपर्ट से जानिए

World Hemophilia Day: खून संबंधी गंभीर बीमारी हीमोफीलिया के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफिलिया दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर हम हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अमित उपाध्याय से जानेंगे पेरेंट्स कैसे पता लगा सकते हैं कि उनके बच्चे को हीमोफीलिया है या नहीं?

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Written By: Anju Rawat | Published : April 15, 2025 1:56 PM IST

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Medically Verified By: Dr Amit Upadhyay

Hemophilia Disease: हीमोफीलिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार में चल सकती है। यह मुख्य रूप से पुरुषों को प्रभावित करता है। जबकि, महिलाएं आमतौर पर इसकी वाहक होती हैं। यानी कि महिलाओं में बीमारी के लक्षण नहीं दिखाई देते, लेकिन वे इस विकार को अपने बेटों को आनुवंशिक रूप से दे सकती हैं। इस स्थिति में शरीर के खून के थक्के बनने की प्रक्रिया सामान्य नहीं होती, जिससे किसी भी चोट, कट या सर्जरी के बाद खून बहना सामान्य से अधिक होता है और जल्दी बंद नहीं होता। विश्व हीमोफिलिया दिवस (World Hemophilia Day) के मौके पर हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अमित उपाध्याय (Dr. Amit Upadhyay, Senior Consultant, Oncology and Hematologist at PSRI Hospital, Delhi) से जानेंगे कि पेरेंट्स कैसे पता लगा सकते हैं कि उनके बच्चे को हीमोफीलिया है या नहीं?

बचपन में ही कैसे पहचानें हीमोफीलिया के लक्षण?

पेरेंट्स के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि हीमोफीलिया के लक्षण बच्चे के जीवन के शुरूआती वर्षों में ही नजर आने लगते हैं। खासतौर पर जब बच्चा चलना शुरू करता है या उसे पहली बार चोट लगती है, तब इसके संकेत सामने आते हैं। कुछ आम लक्षण इस प्रकार हैं-

  1. हल्की चोट पर भी अत्यधिक खून बहना: जैसे अगर बच्चे को कोई मामूली खरोंच या चोट लगी है लेकिन खून बहुत देर तक बहताहै या जल्दी रुकता नहीं है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है।
  2. घुटनों, टखनों या कोहनियों में सूजन: जब बच्चे घुटनों के बल चलते हैं और अचानक बिना किसी बड़ी चोट के जोड़ों में सूजन आ जाती है, तो यह आंतरिक रक्तस्राव का संकेत हो सकता है।
  3. सर्जरी या दांत निकलवाने के बाद खून बहना: कई बार बच्चे के खतना के समय अत्यधिक रक्तस्राव होता है, जो रुकता नहीं है। यह भी हीमोफीलिया का शुरुआती संकेत हो सकता है।
  4. त्वचा पर नीले निशान: बहुत हल्के आघात या गिरने से शरीर पर बड़े नीले या काले निशान बन जाना भी एक चेतावनी संकेत है।

हीमोफीलिया कितने प्रकार का होता है?

हीमोफीलिया दो प्रकार का होता है – हीमोफीलिया A और हीमोफीलिया B।

  1. हीमोफीलिया A में शरीर में फैक्टर VIII की कमी होती है।
  2. हीमोफीलिया B में फैक्टर IX की कमी पाई जाती है।

दोनों ही स्थितियों में रक्त का थक्का बनने की प्रक्रिया धीमी या असामान्य होती है, जिससे रक्तस्राव को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।

क्या हीमोफीलिया का इलाज संभव है?

हीमोफीलिया का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही समय पर देखभाल और इलाज से इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सबसे सामान्य उपचार है फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी। इसमें खून के जरिए क्लॉटिंग फैक्टर को शरीर में डाला जाता है। इसके अलावा, प्रोफिलेक्टिक थेरेपी के जरिए नियमित रूप से फैक्टर दिया जाता है, ताकि आगे चलकर रक्तस्राव की समस्या ना हो।

पेरेंट्स को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

  • बच्चों को किसी भी तरह की चोट से बचाएं, जैसे तेज खेल या ऊंचाई से गिरने वाली गतिविधियों से दूर रखें।
  • स्कूल या देखभाल करने वालों को हीमोफीलिया की स्थिति के बारे में सूचित करें।
  • हर छह महीने या साल में एक बार नियमित रूप से क्लॉटिंग फैक्टर की जांच कराएं।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार बच्चे को दवाएं समय पर दें और आपातस्थिति के लिए जरूरी नंबर और दस्तावेज हमेशा पास रखें।

पेरेंट्स हल्के में न लें कोई भी लक्षण

हीमोफीलिया एक गंभीर लेकिन प्रबंधनीय स्थिति है। माता-पिता को यदि अपने बच्चे में अत्यधिक खून बहने की प्रवृत्ति, जोड़ों में सूजन या हल्की चोट पर गहरे निशान दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। समय पर निदान और सही इलाज से बच्चा एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है।

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