
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Written By: Anju Rawat | Published : April 15, 2025 1:56 PM IST
Medically Verified By: Dr Amit Upadhyay
Hemophilia Disease: हीमोफीलिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार में चल सकती है। यह मुख्य रूप से पुरुषों को प्रभावित करता है। जबकि, महिलाएं आमतौर पर इसकी वाहक होती हैं। यानी कि महिलाओं में बीमारी के लक्षण नहीं दिखाई देते, लेकिन वे इस विकार को अपने बेटों को आनुवंशिक रूप से दे सकती हैं। इस स्थिति में शरीर के खून के थक्के बनने की प्रक्रिया सामान्य नहीं होती, जिससे किसी भी चोट, कट या सर्जरी के बाद खून बहना सामान्य से अधिक होता है और जल्दी बंद नहीं होता। विश्व हीमोफिलिया दिवस (World Hemophilia Day) के मौके पर हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अमित उपाध्याय (Dr. Amit Upadhyay, Senior Consultant, Oncology and Hematologist at PSRI Hospital, Delhi) से जानेंगे कि पेरेंट्स कैसे पता लगा सकते हैं कि उनके बच्चे को हीमोफीलिया है या नहीं?
पेरेंट्स के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि हीमोफीलिया के लक्षण बच्चे के जीवन के शुरूआती वर्षों में ही नजर आने लगते हैं। खासतौर पर जब बच्चा चलना शुरू करता है या उसे पहली बार चोट लगती है, तब इसके संकेत सामने आते हैं। कुछ आम लक्षण इस प्रकार हैं-
हीमोफीलिया दो प्रकार का होता है – हीमोफीलिया A और हीमोफीलिया B।
दोनों ही स्थितियों में रक्त का थक्का बनने की प्रक्रिया धीमी या असामान्य होती है, जिससे रक्तस्राव को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
हीमोफीलिया का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही समय पर देखभाल और इलाज से इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सबसे सामान्य उपचार है फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी। इसमें खून के जरिए क्लॉटिंग फैक्टर को शरीर में डाला जाता है। इसके अलावा, प्रोफिलेक्टिक थेरेपी के जरिए नियमित रूप से फैक्टर दिया जाता है, ताकि आगे चलकर रक्तस्राव की समस्या ना हो।
हीमोफीलिया एक गंभीर लेकिन प्रबंधनीय स्थिति है। माता-पिता को यदि अपने बच्चे में अत्यधिक खून बहने की प्रवृत्ति, जोड़ों में सूजन या हल्की चोट पर गहरे निशान दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। समय पर निदान और सही इलाज से बच्चा एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है।