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क्या ई-सिगरेट से बढ़ सकता है फेफड़ों के कैंसर का खतरा? जानें वैपिंग का लंग हेल्थ पर असर

ई-सिगरेट या वैपिंग फेफड़ों के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है, क्योंकि इसमें कई केमिकल होते हैं जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। फेफड़ों में सूजन और जलन पैदा कर सकते हैं। आइए, डॉ. शिबा कल्याण बिस्वाल से जानते हैं वैपिंग लंग कैंसर का कारण कैसे बनता है?

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Written By: Anju Rawat | Published : August 2, 2026 12:20 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Shiba Kalyan Biswal

क्या आपने ई-सिगरेट के बारे में सुना है? या आप इसका उपयोग करते हैं? आपको बता दें कि ई-सिगरेट बैटरी से चलने वाले ऐसे डिवाइस हैं, जो एक तरल (लिक्विड) को गर्म करके एरोसोल (Aerosol) पैदा करते हैं। एरोसोल हवा में छूटने वाले छोटे-छोटे कणों का एक मिश्रण होता है। कुछ लोग ई-सिगरेट से निकलने वाले इस एरोसोल को भाप भी कहते हैं। Centres for Disease Control and Prevention (CDC) के अनुसार,  ई-सिगरेट का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति इस एरोसोल (भाप) को सांस के जरिए फेफड़ों में खींचता है। ई-सिगरेट का इस्तेमाल करने की इस प्रक्रिया को वैपिंग कहा जाता है। इसमें भी सामान्य सिगरेट की तरह निकोटिन होता है, जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। इतना ही नहीं, कुछ अध्ययनों में लंबे समय तक ई-सिगरेट का उपयोग करने वाले लोगों में फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को ज्यादा बताया गया है। हालांकि, इस विषय पर अभी और रिसर्च जारी हैं। तो आइए, इस लेख में विस्तार से जानते हैं वैपिंग से फेफड़ों की सेहत पर क्या असर पड़ता है?

वैपिंग करने पर फेफड़ों में क्या होता है?

Johns Hopkins Medicine के अनुसार, स्मोकिंग और वैपिंग दोनों में ही किसी पदार्थ को गर्म किया जाता है और उससे निकलने वाले धुएं या भाप को सांस के जरिए अंदर की तरफ खींचा जाता है। दरअसल, सिगरेट में जलते हुए तंबाकू से निकलने वाले धुएं को सांस के जरिए अंदर खींचा जाता है। वहीं, वैपिंग में एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, एक खास लिक्विड को गर्म करके भाप में बदल देता है और फिर व्यक्ति उस भाप को सांस के जरिए अंदर खींचता है। वैपिंग एक नेबुलाइजर की तरह ही काम करता है।

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क्या ई-सिगरेट फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकता है?

शेल्बी इंटरनेशनल हॉस्पिटल्स के हेड-पल्मोनोलॉजी डॉ. शिबा कल्याण बिस्वाल बताते हैं कि धूम्रपान को फेफड़ों के कैंसर का एक प्रमुख कारण माना जाता है। इन दिनों ई-सिगरेट (वैपिंग) का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। ई-सिगरेट को सामान्य सिगरेट की तुलना में सुरक्षित विकल्प माना जाता है। यही वजह है कि लोग सिगरेट को छोड़कर ई-सिगरेट की तरफ रुख कर रहे हैं। लेकिन, इन दावों के समर्थन में अभी पर्याप्त या ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

डॉ. शिबा बताते हैं कि ई-सिगरेट का लंबे समय तक उपयोग करने से फेफड़ों पर प्रभाव पड़ सकता है और यह फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है, इस पर अभी अतिरिक्त शोध चल रहे हैं। हालांकि, अब तक किए गए अधिकतर अध्ययनों से संकेत मिला है कि ई-सिगरेट का उपयोग फेफड़ों के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। यह जोखिम उन लोगों में अधिक हो सकता है, जो ई-सिगरेट के साथ-साथ सामान्य सिगरेट का भी सेवन करते हैं। ऐसे लोगों को "ड्यूल यूजर" कहा जाता है।

ई-सिगरेट से फेफड़ों को होने वाले नुकसान

  • डॉ. शिबा बताते हैं कि ई-सिगरेट से निकलने वाले वाष्प (वेपर) में कई हानिकारक केमिकल मौजूद होते हैं। इनमें ऐसे तत्व होते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं और डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • चूहों पर किए गए अध्ययनों में पाया गया कि लगभग एक वर्ष तक ई-सिगरेट के वाष्प के संपर्क में रहने से उनमें फेफड़ों के कैंसर का एक प्रकार विकसित हुआ।
  • वहीं, ई-सिगरेट के तरल पदार्थों में प्रोपिलीन ग्लाइकोल (Propylene Glycol) और बेंजोइक एसिड (Benzoic Acid) जैसे तत्व होते हैं। ये तत्व कोशिकाओं में जलन, डैमेज और फेफड़ों में सूजन पैदा कर सकते हैं।
  • डॉ. शिबा बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में वैपिंग से संबंधित गंभीर फेफड़ों की बीमारी के कई नए मामले सामने आए हैं। इनमें ज्यादातर मरीजों को सांस लेने में तकलीफ हुई, तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
  • उपलब्ध शोध यह भी बताते हैं कि जो लोग पहले धूम्रपान कर चुके हैं और अब ई-सिगरेट का उपयोग कर रहे हैं, उनमें फेफड़ों के कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए उनकों फेफड़ों के कैंसर की स्क्रीनिंग समय-समय पर कराना बहुत जरूरी है।

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ई-सिगरेट फेफड़ों के कैंसर का कारण कैसे बनता है?

डॉ. शिबा बताते हैं कि ई-सिगरेट (वैपिंग) भले ही तंबाकू नहीं जलाती है। लेकिन, यह कई कारणों से फेफड़ों के कैंसर का खतरा पैदा कर सकती है। जैसे-

  • ई-लिक्विड जब गर्म होता है, तो उससे फॉर्मेल्डिहाइड (Formaldehyde) और एक्रोलिन जैसे खतरनाक केमिकल बनते हैं। ये केमिकल फेफड़ों की कोशिकाओं के डीएनए को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे वे कैंसर कोशिका में बदलने लगती हैं।
  • रोज सांसों से भाप खींचने से फेफड़ों के टिशू में लगातार सूजन और जलन बनी रह सकती है। जब फेफड़े खुद को बार-बार ठीक करने की कोशिश करते हैं, तो कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने (कैंसर बनने) का जोखिम बढ़ जाता है और लंग कैंसर का खतरा रहता है।

Disclaimer: सामान्य सिगरेट हो या ई-सिगरेट, दोनों ही सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। कई अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि दोनों प्रकार के सिगरेट फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकते हैं। इसलिए ई-सिगरेट को सुरक्षित समझने की भूल बिल्कुल न करें। यह भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। ई-सिगरेट में भी कई तरह के केमिकल होते हैं, जो फेफड़ों समेत शरीर के कई अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं।