
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Medically Verified By: Dr. Raman Kumar
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Malaria: कई जगहों पर जून के पहले सप्ताह से मानसून शुरू हो गया है। मानसून गर्मी से राहत दिलाता है, लेकिन इस मौसम की खराब बात है कि यह अपने साथ बीमारियों का झुंड लेकर आता है। इस मौसम में इंफेक्शन, वायरस, बैक्टीरियल और मच्छर जनित रोगों के मामले तेजी से बढ़ते हैं। इसमें मलेरिया को सबसे आम बीमारियों में से एक माना जाता है। बारिश का मौसम शुरू होते ही, मलेरिया के केस आने शुरू हो जाते हैं।
आपको बता दें कि मलेरिया मादा एनोफिलीज (Anopheles) मच्छर के काटने से लोगों में फैलती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मलेरिया पैदा करने वाले परजीवियों की 5 प्रजातियां इंसानों को संक्रमित कर सकती हैं, लेकिन इनमें Plasmodium falciparum और Plasmodium vivax सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती हैं। WHO की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि साल 2024 में दुनिया की लगभग आधी आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां मलेरिया का खतरा मौजूद है। इस साल दुनिया भर में मलेरिया के लगभग 28.2 करोड़ मामले सामने थे, वहीं इस बीमारी से 6 लाख 10 हजार लोगों की मौत हुई थी।
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CDC के अनुसार, मलेरिया मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। ज्यादातर लोगों को मलेरिया तब होता है, जब उन्हें कोई मलेरिया संक्रमित मच्छर काटता है। हालांकि, कुछ दुर्लभ मामलों में मलेरिया इन तरीकों से भी फैल सकता है। जैसे-
आपको बता दें कि मलेरिया संक्रामक बीमारी नहीं है। यह फ्लू या कोरोना वायरस की तरह एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के पास बैठने या निकट संपर्क में आने से मलेरिया रोग नहीं फैलता है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, संक्रमित मच्छर के काटने के 10 से 15 दिन बाद मलेरिया के लक्षण दिखाई देना शुरू हो सकते हैं। बुखार, सिरदर्द और ठंड लगना मलेरिया के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
Nature India में छपी रिपोर्ट के अनुसार, साल 2015 के बाद से भारत में मलेरिया के मामलों में तेजी से गिरावट आई है। वहीं, मलेरिया से होने वाली मौतों में लगभग 80 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। खुशी की बात यह है कि साल 2024 में भारत WHO के "High Burden to High Impact" समूह से भी बाहर निकल गया।
हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने नवजात और छोटे शिशुओं के लिए विकसित आर्टीमेथर-ल्यूमेफैन्ट्रिन के विशेष फॉर्मुलेशन को मंजूरी दी है। इस दवा को खासतौर पर नवजात शिशुओं के लिए तैयार किया गया है। इसे मलेरिया का यह पहला इलाज माना जा रहा है, जिसे छोटे बच्चों के लिए बनाया गया है।
दरअसल, अब तक मलेरिया से पीड़ित नवजात शिशुओं का इलाज सामान्य दवाइयों से ही किया जाता था। इससे नवजात शिशुओं में विषाक्तता और दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ जाता था। इसलिए छोटे बच्चों के लिए अलग दवा बनाई गई।
मलेरिया से बचाव के लिए आप कुछ उपाय आजमा सकते हैं। आइए, चेयरमैन अकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस ऑफ इंडिया डॉ. रमन कुमार से जानते हैं-
Disclaimer: मलेरिया एक मच्छर जनित बीमारी है। जब संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो उसे मलेरिया हो सकता है। मलेरिया के शुरुआती लक्षणों की अनदेखी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। अगर तेज बुखार या कमजोर जैसा महसूस हो तो डॉक्टर से मिलें और मलेरिया की जांच कराएं। हालांकि, मलेरिया के कई अन्य लक्षण भी हो सकते हैं। मलेरिया का समय पर जांच और इलाज बहुत जरूरी है, वरना यह बीमारी मरीज की जान तक ले सकता है।