कोलोरेक्टल कैंसर: आंतों से शुरू हो कर मलाशय तक फैल जाता है ये कैंसर, जानें इसके 7 शुरुआती संकेत

Colorectal Cancer: कोलोरेक्टल कैंसर 40 के बाद की उम्र वाले लोगों में बढ़ रहा है। आइए जानते हैं इसके पीछे कारण क्या है और इसके लक्षणों को कैसे पहचानें।

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Written By: Pallavi Kumari | Published : July 12, 2022 11:49 AM IST

हमारे शरीर का हर अंग एक दूसरे से जुड़ा हुआ है और इसलिए शरीर का एक भी अंग प्रभावित हो जाता है तो पूरे शरीर की प्रक्रिया गड़बड़ाने लगती है। ऐसा ही कुछ तब होता है जब शरीर में कोलोरेक्टल कैंसर की शुरुआत होती है। कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) की बीमारी की शुरुआत बड़ी आंत की सबसे भीतरी परत से होती है और ये मलाशय और गुदा तक फैल जाती है। इसमें कोलन और मलाशय की दीवारों की मांसपेशियों और टिशूज वाले सेल्स अपने आप बढ़ने लगते हैं। नए अध्ययन से पता चलता है कि कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग बढ़ी हैं, लेकिन 40 और 50 के बीच के लोग इस स्क्रीनिंग में ज्यादा भाग ले रहे हैं जो कि इस बात का संकेत है कि कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा 40 के बाद की उम्र वाले लोगों में ज्यादा तेजी स बढ़ रहा है। लेकिन इसका कारण क्या, आइए जानते हैं।

कोलोरेक्टल कैंसर कैसे शुरू होता है-How colorectal cancer develops?

अधिकांश कोलोरेक्टल कैंसरबड़ी आंत या मलाशय की आंतरिक परत के बढ़ने से शुरू होते हैं। इन वृद्धि को पॉलीप्स कहा जाता है। दरअसल, समझने वाली बात ये है कि हर पॉलीप्स कोलोरेक्टल कैंसर में नहीं बदलता बल्कि, कुछ प्रकार के पॉलीप्स समय के साथ कैंसर में बदल सकते हैं। पॉलीप के कैंसर में बदलने की संभावना उस पॉलीप के प्रकार पर निर्भर करती है। जैसे कि

-एडिनोमेटस पॉलीप्स या एडेनोमास (adenomas): ये पॉलीप्स कभी-कभी कैंसर में बदल जाते हैं। इस वजह से, एडेनोमास को प्री-कैंसर की स्थिति कहा जाता है।

-हाइपरप्लास्टिक पॉलीप्स और इंफ्लेमेटरी पॉलीप्स (Hyperplastic polyps and inflammatory polyps): ये पॉलीप्स अधिक सामान्य होते हैं। हाइपरप्लास्टिक पॉलीप्स वाले कुछ लोगों को कोलोनोस्कोपी के साथ कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग की अधिक बार आवश्यकता हो सकती है।

-सेसाइल सीरेटेड पॉलीप्स और ट्रेडिशनल सेरेटेड एडेनोमास (Sessile serrated polyps and traditional serrated adenomas) : इन पॉलीप्स को अक्सर एडेनोमा की तरह माना जाता है क्योंकि उनमें कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा अधिक होता है।

अन्य कारक जो पॉलीप को कैंसर होने की अधिक संभावना बना सकते हैं या किसी के कोलोरेक्टल कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ा सकते हैं, उनमें शामिल हैं:

-अगर आप में 1 सेमी से बड़ा पॉलीप पाया जाता है

- 3 से अधिक पॉलीप्स पाए जाने पर

कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षण-7 Symptoms of colorectal cancer in hindi

1. आंतों की कमजोरी

कोलोरेक्टल कैंसर असल में बड़े आंत से शुरू होती है और इसलिए आंतों की आदतों में बदलाव से शुरू होता है। जैसे कि खाना पचने में समय लगना, पेट हमेशा भारी रहना, पेट साफ ना होना और कब्ज से जुड़ी समस्याएं

2. मल में लाल या काले रंग का खून का धब्बा

अब तक सभी लक्षणों में से सबसे अधिक ध्यान देने योग्य, मल पर या मल में खून आना कोलोरेक्टल कैंसर से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि कैंसर का संकेत देता है, क्योंकि कई अन्य समस्याएं पाचन तंत्र में ब्लीडिंग का कारण बन सकती हैं, जिनमें बवासीर,अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोहन रोग शामिल हैं। इसके अलावा, आयरन और कुछ खाद्य पदार्थ, जैसे कि चुकंदर, मल को काला या लाल रंग का दिखा सकते हैं, जो मल में खून का झूठा संकेत देते हैं। लेकिन इस लक्षण को नजरअंदाज ना करें।

3. एनीमिया

एनीमिया लाल रक्त कोशिकाओं की कमी है। ये कोशिकाएं जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाती हैं। अगर आप एनीमिक हैं, तो आपको सांस की तकलीफ का अनुभव हो सकता है। आप थका हुआ और सुस्त भी महसूस कर सकते हैं, इतना कि आराम करने के बाद भी ये समस्याएं कम होती नजर नहीं आती हैं।

4. पेट या पैल्विक में दर्द या सूजन

कोलोरेक्टल कैंसर में खाना पचाने का प्रोसेस पूरी तरह से धीमा रहता है जिससे पेट या पैल्विक हिस्से में दर्द और सूजन होता है। हालांकि, ये दर्द दूसरी समस्याओं में भी होता है, लेकिन अगर आपको यह फिर भी हो तो नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

5. उल्टी

उल्टी होना आम बात है और ये अपच का संकेत हो सकता है। लेकिन आपको यह जान कर हैरानी हो सकती है हर दिन बिना किसी खास कारण के उल्टी किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। जैसे कि ये कोलोरेक्टल कैंसर का कारण बन सकता है।

6. वजन कम होना

वजन कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। दरअसल, जब कोलोरेक्टल कैंसर होता है तो ये न्यूट्रीएंट्स की कमी बनता है। साथ ही कोलोरेक्टल कैंसर में ब्लीडिंग होने की वजह से भी धीमे-धीमे वजन कम होने लगता है।

7. कमजोरी और थकान

लगातार कमजोरी और थकान महसूस करना कोलोरेक्टल कैंसर का लक्षण हो सकता है। इससे कमजोरी हो सकती है। साथ ही ये थकान का कारण बन सकता है। ऐसे में कमजोरी और थकान को नजरअंदाज ना करें इसके लक्षणों को पहचानें।