बच्चों की मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित करती है Bulling, जानें इस छोटी बच्ची की आत्महत्या के मामले से समझें

बुलिंग बच्चों की मेंटल हेल्थ को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। बुलिंग ने 9 साल की अमायरा की जान ले ली।

बच्चों की मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित करती है Bulling, जानें इस छोटी बच्ची की आत्महत्या के मामले से समझें
VerifiedVERIFIED By: Dr Gaurav Gupta

Written by Anju Rawat |Updated : January 7, 2026 4:43 PM IST

हाल ही में जयपुर से एक झकझोर कर देने वाला मामला सामने आया था। मामला था 9 साल की बच्ची अमायरा का, जिसे बुलिंग (Bulling) ने अपना शिकार बना लिया। अमायरा ने स्कूल में बुलिंग के चलते कूदकर आत्महत्या कर दी। छोटी सी उम्र में अमायरा की आत्महत्या ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था। बताया जा रहा है कि अमायरा लंबे समय से स्कूल में बुलिंग का शिकार हो रही थी, जिसका असर उसकी मेंटल हेल्थ पर पड़ा और उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। हालांकि, इस घटना के बाद CBSE बोर्ड ने इस स्कूल की मान्यता रद्द कर दी है। यह घटना बताती हैं कि बुलिंग सिर्फ बच्चों का मस्ती-मजाक या नोकझोंक नहीं है, बल्कि यह बच्चों के मेंटल हेल्थ पर गहरा प्रभाव छोड़ सकता है। आइए, तुलसी हेल्थकेयर, गुरुग्राम के वरिष्ठ मनोचिकित्सकडॉ. गौरव गुप्ता से जानते हैं कि बुलिंग बच्चों के मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित करता है?

क्या होती है बुलिंग?

जब किसी व्यक्ति को बार-बार अपमानित किया जाता है, उसका मजाक उड़ाया जाता है या उसे शारीरिक-मानसिक रूप से तकलीफ दी जाती है, तो यही बुलिंग कहलाता है। बच्चों में बुलिंग से जुड़े कुछ आम बातें हो सकती हैं, जैसे-

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  • किसी को नाम से चिढ़ाना
  • किसी के रंग और वजन का मजाक उड़ाना
  • बोलने के तरीके पर चिढ़ाना
  • किसी को अकेला फील कराना, सोशल ग्रुप का हिस्सा न बनाना
  • धमकी देना

जब बच्चे किसी को इन सभी तरीकों से Bully करते हैं, तो बड़े लोग इसे बच्चों की शरारत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि, इस तरह की बुलिंग सामने वाले व्यक्ति के मेंटल हेल्थ को इस तरह से प्रभावित कर सकता है कि उसके मन में आत्महत्या तक के विचार आ सकते हैं या वह आत्महत्या कर सकता है, जैसे कि अमायरा ने किया।

बच्चों की मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित करती है बुलिंग?

  • बुलिंग बच्चों की मेंटल हेल्थ को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। इससे उनके आत्मविश्वास में कमी आ सकती है। लगातार बुलिंग होने से बच्चों को लगता है कि उनमें कोई कमी है और वह खुद को कमजोर, बेकार समझने लगते हैं।
  • बुलिंग की वजह से बच्चों अपनी क्लास में ही दोस्त बनाने में डर लगता है। उन्हें सोशल होने और बातचीत करने में डर महसूस होता है। उन्हें हमेशा अपने मजाक उड़ाए जाने का डर लगा रहता है। इससे बच्चे डिप्रेशन में जा सकते हैं और उन्हें एंग्जाइटी हो सकती है।
  • बुलिंग और मानसिक तनाव की वजह से बच्चों में एकाग्रता कम हो सकती है।
  • बुलिंग होने वाले बच्चे धीरे-धीरे समाज से कटने लगते हैं। वे सोशल सर्कल में बैठना छोड़ देते हैं।

पैरेंट्स किन संकेतों पर ध्यान दें?

  • अगर आपका बच्चा अचानक से शांत रहने लगे तो उस पर जरूर ध्यान दें।
  • अगर बच्चा स्कूल न जाने के लिए बहाने बनाए तो उससे बात करें।
  • अचानक उसका पढ़ाने में मन न लगना

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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