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हाल ही में जयपुर से एक झकझोर कर देने वाला मामला सामने आया था। मामला था 9 साल की बच्ची अमायरा का, जिसे बुलिंग (Bulling) ने अपना शिकार बना लिया। अमायरा ने स्कूल में बुलिंग के चलते कूदकर आत्महत्या कर दी। छोटी सी उम्र में अमायरा की आत्महत्या ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था। बताया जा रहा है कि अमायरा लंबे समय से स्कूल में बुलिंग का शिकार हो रही थी, जिसका असर उसकी मेंटल हेल्थ पर पड़ा और उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। हालांकि, इस घटना के बाद CBSE बोर्ड ने इस स्कूल की मान्यता रद्द कर दी है। यह घटना बताती हैं कि बुलिंग सिर्फ बच्चों का मस्ती-मजाक या नोकझोंक नहीं है, बल्कि यह बच्चों के मेंटल हेल्थ पर गहरा प्रभाव छोड़ सकता है। आइए, तुलसी हेल्थकेयर, गुरुग्राम के वरिष्ठ मनोचिकित्सकडॉ. गौरव गुप्ता से जानते हैं कि बुलिंग बच्चों के मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित करता है?
जब किसी व्यक्ति को बार-बार अपमानित किया जाता है, उसका मजाक उड़ाया जाता है या उसे शारीरिक-मानसिक रूप से तकलीफ दी जाती है, तो यही बुलिंग कहलाता है। बच्चों में बुलिंग से जुड़े कुछ आम बातें हो सकती हैं, जैसे-
जब बच्चे किसी को इन सभी तरीकों से Bully करते हैं, तो बड़े लोग इसे बच्चों की शरारत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि, इस तरह की बुलिंग सामने वाले व्यक्ति के मेंटल हेल्थ को इस तरह से प्रभावित कर सकता है कि उसके मन में आत्महत्या तक के विचार आ सकते हैं या वह आत्महत्या कर सकता है, जैसे कि अमायरा ने किया।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।