
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : January 9, 2026 10:45 AM IST
Medically Verified By: Dr Lalit Choudhary
Air Pollution Se Heart Or High BP: आज के समय में वायु प्रदूषण हमारी जिंदगी का एक सामान्य लेकिन खतरनाक हिस्सा बन चुका है। अधिकतर लोग यह जानते हैं कि प्रदूषित हवा से सांस की बीमारियां होती हैं, लेकिन बहुत कम लोग यह समझते हैं कि इसका असर हमारी रक्त नलियों यानी धमनियों पर भी पड़ता है। वायु प्रदूषण धमनियों को समय से पहले बूढ़ा बना देता है, जिसे मेडिकल भाषा में वैस्कुलर एजिंग कहा जाता है। हमने एयर पॉल्यूशन का दिल से जुड़ी समस्या और हाइपरटेंशन पर कैसे असर होता है? इस विषय पर मेडिकव्हर हॉस्पिटल्स के आर्डियोथोरेसिक सर्जन डॉक्टर ललित चौधरी से बात की।
डॉक्टर कहा कहना है कि सामान्य रूप से उम्र बढ़ने के साथ धमनियां थोड़ी सख्त होती जाती हैं। लेकिन जब यह प्रक्रिया कम उम्र में ही शुरू हो जाए, तो यह गंभीर चिंता का विषय बन जाती है। वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण जैसे PM2.5, कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सांस के जरिये शरीर में प्रवेश करते हैं और खून के साथ धमनियों तक पहुंच जाते हैं। ये कण धमनियों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे सूजन बढ़ती है और उनकी लचक कम हो जाती है। आइए अब हम थोड़ा विस्तार से जानते हैं।
हमारे शरीर की धमनियां लचीली होती हैं, जिससे खून आसानी से पूरे शरीर में पहुंचता है। उम्र बढ़ने के साथ इन धमनियों में धीरे-धीरे कठोरता आना सामान्य है। लेकिन जब यह प्रक्रिया कम उम्र में ही शुरू हो जाए, तो इसे समय से पहले वैस्कुलर एजिंग कहा जाता है। वायु प्रदूषण में मौजूद बारीक कण, धुएं और जहरीली गैसें खून के जरिए धमनियों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाती हैं।
डॉक्टर ने बताया कि जब धमनियां सख्त हो जाती हैं, तो उनमें खून का बहाव मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ता है। इसका सीधा असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है और धीरे-धीरे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या पैदा हो जाती है। प्रदूषण के कारण होने वाला हाई ब्लड प्रेशर अक्सर कम उम्र में ही शुरू हो जाता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी कई गुना बढाता है।
लगातार गंदी हवा में सांस लेने से शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। इससे धमनियों की दीवारें मोटी और कठोर होने लगती हैं। यही स्थिति हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दिल से जुड़ी अन्य समस्याओं का जोखिम कई गुना बढ़ा देती है।
डॉक्टर ने बताया कि वायु प्रदूषण से पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन इसके असर को कम किया जा सकता है। बाहर निकलते समय मास्क पहनना, घर के अंदर साफ हवा बनाए रखना, फल-सब्जियों से भरपूर आहार लेना और रोज थोड़ा-बहुत पैदल चलना धमनियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। साथ ही, पेड़ लगाना, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि, वायु प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों ही नहीं, बल्कि दिल और धमनियों का भी दुश्मनहै। साफ हवा न केवल बेहतर सांस, बल्कि स्वस्थ धमनियों और सामान्य ब्लड प्रेशर के लिए भी बेहद जरूरी है। आज लिया गया छोटा सा कदम, भविष्य में बड़ी बीमारियों से बचा सकता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
प्रदूषण से बचने के लिए N95 मास्क पहनें, घर में एयर प्यूरीफायर और पौधे (तुलसी, मनी प्लांट) लगाएं।
जी हां। खराब वायु गुणवत्ता के संपर्क में आने से धमनियों में ऐंठन हो सकती है, प्रदूषण और रक्तचाप बढ़ सकता है, और सीने में दर्द या यहां तक कि दिल का दौरा भी पड़ सकता है।
हां, इसके अलावा उच्च रक्तचाप, हृदय की लय में परिवर्तन, रक्त के थक्के जमने संबंधी विकार, कोरोनरी धमनी रोग और स्ट्रोक शामिल हैं।
वायु प्रदूषण के कारण होने वाली सबसे आम बीमारियों में अस्थमा जैसी श्वसन संबंधी बीमारियाँ, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), हृदय संबंधी विकार जैसे दिल का दौरा और स्ट्रोक, फेफड़ों का कैंसर और तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ शामिल हैं।