क्‍या एडीज मच्‍छर के सिर्फ 1 बार काटने से हो जाता है चिकनगुनिया? एक्‍सपर्ट से जानिए कैसे होता है चिकनगुनिया

How Aedes Mosquitoes Transmit Chikungunya: मानसून की शुरुआत देश के कई हिस्‍सों में हो चुकी है जिसके साथ ही डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया (Dengue, Malaria and Chikungunya) जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाएगा।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : August 16, 2022 12:43 PM IST

मानसून के मौसम में मच्‍छर जनित बीमारियां (Vector-Borne Disease In Monsson) काफी बढ़ जाती हैं। बरसात के मौसम में वातावरण में काफी मॉइस्चर होता है जो मच्‍छरों के बहुत अनुकूल समय होता है और इस मौसम में संक्रमित मच्‍छर इंसानों को भी बहुत जल्‍दी संक्रमित कर सकते हैं। मानसून की शुरुआत काफी पहले ही हो चुकी है, जिसके साथ डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया (Dengue, Malaria and Chikungunya) जैसी बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ गया है। चिकनगुनिया रोग संक्रमित एडीज मच्‍छर के काटने से होता है। पिछले कुछ सालों से मानसून के मौसम में चिकनगुनिया की दशहत काफी बढ़ गई है। हर साल चिकनगुनिया से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इसलिए जरूरी है कि आपको चिकनगुनिया के बारे में जरूरी बातें पता हो। आपको क्‍या लगता है चिकनगुनिया कैसे फैलता है? क्‍या एडीज मच्‍छर के सिर्फ 1 बार काटने पर ही चिकनगुनिया हो जाता है? कितने दिन बात पता चलता है कि चिकनगुनिया हो गया है? मेडो ग्‍लोबल हेल्‍थ एक्‍सपर्ट क्लिनिक, इंटरनल मेडिसिन, पल्‍मोनोलॉजिस्‍ट डॉक्‍टर सुमित वाधवा (Dr. Sumit Wadhwa Internal Medicine, Pulmonologist, Meddo Global health xpertz clinic) आज हमें बता रहे हैं कि एडीज मच्‍छर कैसे चिकनगुनिया रोग फैलते हैं।

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क्‍या एडीज मच्‍छर के सिर्फ 1 बार काटने पर हो जाता है चिकनगुनिया?

डॉक्‍टर सुमित वाधवा कहते हैं कि चिकनगुनिया एक वायरल संक्रमण है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हो सकता है। संक्रमित एडीज एजिप्टी और एडीज अल्बापिक्टस मच्छर (Aedes Aegypti and the Aedes Albapictus mosquitoes) के काटने पर चिकनगुनिया रोग होता है। डॉक्‍टर कहते हैं कि अगर एडीज मच्‍छर (Aedes Mosquito) संक्रमित है तो उसके एक बार काटने पर ही चिकनगुनिया रोग हो सकता है। जब ये मच्‍छर किसी व्‍यक्ति को काटता है तो बीमारी के लक्षण तुरंत नहीं दिखते हैं बल्कि इसमें 3-7 दिन लगते हैं। चिकनगुनिया के मुख्‍य लक्षणों में बुखार, उल्‍टी होना, हाथ-पैरों में तेज दर्द, शरीर में रैशेज होना और कमजोरी होना है। साथ ही चिकनगुनिया होने पर प्‍लेटलेट्स भी लाखों से गिरकर हजारों में आ जाती हैं। इन लक्षणों के दिखने पर तुंरत डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए। क्‍योंकि डेंगू और मलेरिया के लक्षण भी ऐसे ही होते हैं इसलिए डॉक्‍टर आपको चिकनगुनिया, डेंगू और मलेरिया तीनों टेस्‍ट कराने को कह सकते हैं।

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चिकनगुनिया से कैसे बचा जा सकता है? (Prevention from Chikunguniya)

चिकनगुनिया से बचने के लिए निम्‍न बातें अपनाई जा सकती हैं-

  • अपने घर के आसपास पानी न जमा होने दें।
  • अगर आप कूलर का इस्‍तेमाल करते हैं तो कोशिश की हर तीसरे दिन उसका पानी बदलें। इसके अलावा आप कूलर और गमलों में कीटनाशक दवाओं का इस्‍तेमाल भी कर सकते हैं।
  • गर्मियों के मौसम में सूती लेकिन पूरे कपड़े पहनें।
  • रात को सोते वक्‍त मच्‍छरदानी का प्रयोग करें।
  • अगर घर के आसपास पानी जमा होता है तो कीटनाशक गोलियां लाएं और उन्‍हें पानी में डालें या मच्छरों को मारने वाले स्प्रे का प्रयोग करें।
  • युकलिप्टुस के तेल का मच्छरों के रोकथाम के लिए इस्तमाल करें
  • खिड़की और दरवाजों में जाली लगवाएं।
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