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Ultra-Processed Food: स्वाद की कीमत आपकी जान? भारत में मिलावटी और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड बना साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी

कई रिसर्च में ये बात सामने आ चुकी है कि हमारे रोजमर्रा के खाने में बड़ी मात्रा में मिलावट की जा रही है। खाने में एंटीबायोटिक, हार्मोन, केमिकल प्रिजर्वेटिव्स और अल्ट्रा-प्रोसेसिंग का इस्तेमाल अब साइलेंट पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी का रूप ले चुका है।

Ultra-Processed Food: स्वाद की कीमत आपकी जान? भारत में मिलावटी और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड बना साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी

Written by Ashu Kumar Das |Updated : February 12, 2026 9:34 AM IST

#zaraSochiye A ZMEDIA CAMPAIGN: भारत सहित पूरी दुनिया में आज भोजन केवल पोषण का स्रोत नहीं रह गया है, बल्कि कई मामलों में यह बीमारियों का कारण बनता जा रहा है। दूध, पनीर, मसाले, सब्जियां, अंडे, मीट, मछली और पैकेज्ड फूड- जिसे हम रोजाना खाते है अब वो वैज्ञानिक जांच के दायरे में आ चुके हैं।

कई रिसर्च में ये बात सामने आ चुकी है कि हमारे रोजमर्रा के खाने में बड़ी मात्रा में मिलावट की जा रही है। खाने में एंटीबायोटिक, हार्मोन, केमिकल प्रिजर्वेटिव्स और अल्ट्रा-प्रोसेसिंग का इस्तेमाल अब साइलेंट पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी का रूप ले चुका है। रोजमर्रा के खाने में इतने बड़े स्तर पर की जा रही मिलावट अब सिर्फ खाद्य सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग, इनफर्टिलिटी और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) की जड़ बनता जा रहा है।

खाने में मिलावट क्यों है राष्ट्रीय मुद्दा

ग्लोबल वेलनेस (आयुष) और फूड सेफ्टी एक्सपर्ट, डॉ. नवल कुमार वर्मा, MD (होम), Hon PhD द्वारा की गई स्टडी में ये बात सामने आ चुकी है कि खाने में मिलावट का मुद्दा अब सिर्फ एक घर या परिवार का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। क्योंकि खाने में होने वाली मिलावट, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड, हाई-कार्बोहाइड्रेट, हाई-फैट खाने का बढ़ता चलन और खाद्य नियमन की कमजोरियों के कारण बच्चों और युवाओं में तेजी से बीमारी को बढ़ा रहे हैं। यह संकट केवल कुछ कंपनियों की लापरवाही नहीं है, बल्कि खेत से लेकर थाली तक पूरे सप्लाई चेन की संरचनात्मक कमजोरी का परिणाम है। भारत में मिलावटी खाद्य पदार्थ कैसे लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं, इसके बारे में जागरूकता फैलाने के लिए #zaraSochiye A ZMEDIA CAMPAIGN चला रहा है। इस कैपेन में हम आपको मिलावटी खाने के प्रति रोजाना नई जानकारी देंगे।

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किस खाद्य पदार्थ में किस चीज की हो रही है मिलावट?

  1. अंडे- रिसर्च में ये बात सामने आई है कि अंडों में एंटीबायोटिक अवशेष, हार्मोनल ग्रोथ प्रमोटर, साल्मोनेला और E. कोलाई से मिलावट के अलावा मिलावटी पोल्ट्री फ़ीड से निकलने वाले केमिकल के बचे हुए हिस्से की मिलावट की जा रही है। इस प्रकार के अंडे खाने से एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR), आंतों के माइक्रोबायोटा का असंतुलन और इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी हो सकती है।
  2. पोल्ट्री और मांस- पोल्ट्री और मांस के बढ़ते मार्केट को देखते हुए बड़ी कंपनियां इसमें भी मिलावट कर रही हैं। जानवरों का वजन बढ़ाने के लिए बिना सोचे- समझें एंटीबायोटिक, हार्मोनल ग्रोथ प्रमोटर और इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही, जानवरों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए केमिकल प्रिजर्वेटिव मिलाए जाते हैं। इस प्रकार के पोल्ट्री और मांस को खाने से विभिन्न प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने जानवरों की फूड चेन से जुड़े एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को दुनिया के टॉप दस पब्लिक हेल्थ खतरों में से एक माना है, जिसका सीधा असर इन्फेक्शन कंट्रोल, सर्जरी, कैंसर केयर और इंटेंसिव मेडिसिन पर पड़ता है।
  3. मछली और सी- फूड- कई रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि मछली और विभिन्न प्रकार के सी- फूड्स में  आर्टिफिशियल प्रिजर्वेशन के लिए फॉर्मेलिन और अमोनिया का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा मछलियों में मरकरी और कैडमियम जैसे हेवी मेटल्स भी पाए गए हैं। इस तरह की चीजें न्यूरोलॉजिकल डैमेज, हार्मोनल डिसरप्शन और टॉक्सिन्स के बायोएक्युमुलेशन के कारण लंबे समय तक कैंसर का खतरा बढ़ता है।
  4. पैकेज्ड और प्रोसेस्ड नॉन-वेज फूड- बाजार में मिलने वाले सॉसेज, नगेट्स, फ्रोजन मीट और रेडी-टू-ईट करी जैसे प्रोडक्ट को कलरफुल पैकेज में रखा जाता है। लेकिन इन्हें बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड किया जाता है। ये ट्रांसफैट और सोडियम से भरपूर होते हैं। इनका नियमित सेवन करने से मेटाबॉलिक सिंड्रोम, कोलन कैंसर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ता है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और सेहत पर असर

आजकल बाजार में मिलने वाले बहुत से पैकेट वाले खाने को अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड कहा जाता है। ये शाकाहारी भी हो सकते हैं और मांसाहारी भी। इनकी कुछ आम खासियतें होती हैं:

  1. मैदा या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट ज्यादा
  2. फैक्ट्री में बदली हुई वसा (तेल/फैट)
  3. नमक की मात्रा ज्यादा
  4. कृत्रिम रंग, फ्लेवर और केमिकल मिलावट

फाइबर और जरूरी पोषक तत्व कम

रिसर्च बताती है कि ऐसे खाने का ज्यादा सेवन मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, फैटी लिवर, दिल की बीमारी और कुछ कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। खास बात यह है कि ये खतरे सिर्फ ज्यादा कैलोरी खाने से नहीं जुड़े हैं। यानी आप कम कैलोरी भी लें, लेकिन अगर खाना ज्यादा प्रोसेस्ड है तो नुकसान हो सकता है।

ऐसा खाना आंतों के अच्छे बैक्टीरिया (गट माइक्रोबायोटा) को भी बिगाड़ सकता है, शरीर में गलत तरीके से चर्बी जमा कर सकता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है।

बार-बार मिलावटी खाना: शरीर पर लगातार दबाव

खाने में मिलावट को सिर्फ कानून तोड़ना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। अगर शरीर को बार-बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में हानिकारक चीजें मिलती रहें, तो यह शरीर पर लगातार दबाव डालता है। रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि बार-बार मिलावटी खाना खाने से शरीर को कई प्रकार से नुकसान पहुंचता है। इसमें शामिल हैः

  1. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (सेल्स को नुकसान)
  2. हार्मोन गड़बड़ी
  3. लगातार शरीर में सूजन
  4. डीएनए को नुकसान
  5. इम्यून सिस्टम कमजोर होना

इस तरह की समस्याएं आगे चलकर ऑटोइम्यून बीमारियों, इनफर्टिलिटी, याददाश्त से जुड़ी बीमारियों और कैंसर जैसी गंभीर स्थितियों को जन्म दे सकती हैं।

खानपान के कारण बढ़ रही हैं बीमारियां

भारत में अब कम उम्र में ही डायबिटीज और मोटापा बढ़ रहा है। हार्मोन से जुड़े कैंसर और पाचन तंत्र के कैंसर भी बढ़ रहे हैं। नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर की समस्या भी तेजी से सामने आ रही है। जीन (वंशानुगत कारण) अपनी जगह हैं, लेकिन खान-पान और वातावरण की भूमिका बहुत बड़ी है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां भी मानती हैं कि असुरक्षित और ज्यादा प्रोसेस्ड खाना दुनिया भर में बढ़ती गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) से जुड़ा है। इसलिए फूड सेफ्टी को सिर्फ व्यापार का मामला नहीं, बल्कि बीमारी से बचाव का अहम हिस्सा मानना चाहिए।

दुनिया में क्या बेहतर किया जा रहा है

जिन देशों में लोगों की सेहत बेहतर है, वहां खाने को लेकर सख्त नियम लागू किए जाते हैं, जैसे:

  1. खाने में एंटीबायोटिक की जांच
  2. खेत से थाली तक ट्रैकिंग सिस्टम
  3. खराब सामान मिलने पर तुरंत वापस मंगाने की व्यवस्था
  4. पैकेट के सामने साफ-साफ चेतावनी लेबल
  5. ज्यादा प्रोसेस्ड फूड के विज्ञापनों पर रोक

इन देशों में खाने को सिर्फ बेचने की चीज नहीं, बल्कि सेहत से जुड़ा मुद्दा माना जाता है।

प्रोसेस्ड खाना कम करने की जरूरत

  • फैक्ट्री में तैयार ऐसे फॉर्मूले वाले खाने, जो हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ सकते हैं, उनके लिए सख्त नियम और जागरूकता जरूरी है।
  • हमारी पारंपरिक खान-पान पद्धति मौसमी, ताजा और पचने में आसान भोजन पर जोर देती है। आज की नई रिसर्च भी मान रही है कि ऐसा खाना आंत और शरीर के लिए बेहतर होता है।

कैंसर से बचाव और फूड पॉलिसी

रिसर्च बताती है कि अस्पताल सिर्फ बीमारी का इलाज करते हैं, लेकिन सही फूड पॉलिसी बीमारी होने से पहले ही रोक सकती है। इन परिस्थितियों में खाना चुनने से पहले लोगों को खुद पर फोकस करना जरूरी है। इसलिए विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव करने के लिए ताजा और कम प्रोसेस्ड खाना चुनें। जहां तक संभव हो, पैकेट वाले और प्रोसेस्ड मीट का सेवन कम करें। ज्यादा मैदा और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले उत्पाद घटाएं। ध्यान रहे कि खाना हमारी रोज की जरूरत है, इसलिए उसकी शुद्धता और सुरक्षा हमारी सेहत की सबसे बड़ी नींव है।

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।