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#zaraSochiye A ZMEDIA CAMPAIGN: भारत सहित पूरी दुनिया में आज भोजन केवल पोषण का स्रोत नहीं रह गया है, बल्कि कई मामलों में यह बीमारियों का कारण बनता जा रहा है। दूध, पनीर, मसाले, सब्जियां, अंडे, मीट, मछली और पैकेज्ड फूड- जिसे हम रोजाना खाते है अब वो वैज्ञानिक जांच के दायरे में आ चुके हैं।
कई रिसर्च में ये बात सामने आ चुकी है कि हमारे रोजमर्रा के खाने में बड़ी मात्रा में मिलावट की जा रही है। खाने में एंटीबायोटिक, हार्मोन, केमिकल प्रिजर्वेटिव्स और अल्ट्रा-प्रोसेसिंग का इस्तेमाल अब साइलेंट पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी का रूप ले चुका है। रोजमर्रा के खाने में इतने बड़े स्तर पर की जा रही मिलावट अब सिर्फ खाद्य सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग, इनफर्टिलिटी और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) की जड़ बनता जा रहा है।
ग्लोबल वेलनेस (आयुष) और फूड सेफ्टी एक्सपर्ट, डॉ. नवल कुमार वर्मा, MD (होम), Hon PhD द्वारा की गई स्टडी में ये बात सामने आ चुकी है कि खाने में मिलावट का मुद्दा अब सिर्फ एक घर या परिवार का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। क्योंकि खाने में होने वाली मिलावट, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड, हाई-कार्बोहाइड्रेट, हाई-फैट खाने का बढ़ता चलन और खाद्य नियमन की कमजोरियों के कारण बच्चों और युवाओं में तेजी से बीमारी को बढ़ा रहे हैं। यह संकट केवल कुछ कंपनियों की लापरवाही नहीं है, बल्कि खेत से लेकर थाली तक पूरे सप्लाई चेन की संरचनात्मक कमजोरी का परिणाम है। भारत में मिलावटी खाद्य पदार्थ कैसे लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं, इसके बारे में जागरूकता फैलाने के लिए #zaraSochiye A ZMEDIA CAMPAIGN चला रहा है। इस कैपेन में हम आपको मिलावटी खाने के प्रति रोजाना नई जानकारी देंगे।
आजकल बाजार में मिलने वाले बहुत से पैकेट वाले खाने को अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड कहा जाता है। ये शाकाहारी भी हो सकते हैं और मांसाहारी भी। इनकी कुछ आम खासियतें होती हैं:
रिसर्च बताती है कि ऐसे खाने का ज्यादा सेवन मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, फैटी लिवर, दिल की बीमारी और कुछ कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। खास बात यह है कि ये खतरे सिर्फ ज्यादा कैलोरी खाने से नहीं जुड़े हैं। यानी आप कम कैलोरी भी लें, लेकिन अगर खाना ज्यादा प्रोसेस्ड है तो नुकसान हो सकता है।
ऐसा खाना आंतों के अच्छे बैक्टीरिया (गट माइक्रोबायोटा) को भी बिगाड़ सकता है, शरीर में गलत तरीके से चर्बी जमा कर सकता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है।
खाने में मिलावट को सिर्फ कानून तोड़ना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। अगर शरीर को बार-बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में हानिकारक चीजें मिलती रहें, तो यह शरीर पर लगातार दबाव डालता है। रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि बार-बार मिलावटी खाना खाने से शरीर को कई प्रकार से नुकसान पहुंचता है। इसमें शामिल हैः
इस तरह की समस्याएं आगे चलकर ऑटोइम्यून बीमारियों, इनफर्टिलिटी, याददाश्त से जुड़ी बीमारियों और कैंसर जैसी गंभीर स्थितियों को जन्म दे सकती हैं।

भारत में अब कम उम्र में ही डायबिटीज और मोटापा बढ़ रहा है। हार्मोन से जुड़े कैंसर और पाचन तंत्र के कैंसर भी बढ़ रहे हैं। नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर की समस्या भी तेजी से सामने आ रही है। जीन (वंशानुगत कारण) अपनी जगह हैं, लेकिन खान-पान और वातावरण की भूमिका बहुत बड़ी है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां भी मानती हैं कि असुरक्षित और ज्यादा प्रोसेस्ड खाना दुनिया भर में बढ़ती गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) से जुड़ा है। इसलिए फूड सेफ्टी को सिर्फ व्यापार का मामला नहीं, बल्कि बीमारी से बचाव का अहम हिस्सा मानना चाहिए।
जिन देशों में लोगों की सेहत बेहतर है, वहां खाने को लेकर सख्त नियम लागू किए जाते हैं, जैसे:
इन देशों में खाने को सिर्फ बेचने की चीज नहीं, बल्कि सेहत से जुड़ा मुद्दा माना जाता है।
रिसर्च बताती है कि अस्पताल सिर्फ बीमारी का इलाज करते हैं, लेकिन सही फूड पॉलिसी बीमारी होने से पहले ही रोक सकती है। इन परिस्थितियों में खाना चुनने से पहले लोगों को खुद पर फोकस करना जरूरी है। इसलिए विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव करने के लिए ताजा और कम प्रोसेस्ड खाना चुनें। जहां तक संभव हो, पैकेट वाले और प्रोसेस्ड मीट का सेवन कम करें। ज्यादा मैदा और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले उत्पाद घटाएं। ध्यान रहे कि खाना हमारी रोज की जरूरत है, इसलिए उसकी शुद्धता और सुरक्षा हमारी सेहत की सबसे बड़ी नींव है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।