
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : May 10, 2026 8:44 PM IST
Medically Verified By: Dr Praveen Gupta
Image Credit- ChatGPT
Youtube Shorts and Mobile Games Ka Dimag Par Asar: आज के समय में स्मार्टफोन लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। घर के काम, बच्चों की पढ़ाई, ऑनलाइन पेमेंट और सोशल मीडिया जैसी कई जरूरतों के कारण महिलाएं दिनभर मोबाइल का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन अब कई एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि जरूरत से ज्यादा YT Shorts देखना और मोबाइल गेम्स खेलना मांओं की मानसिक और न्यूरोलॉजिकल हेल्थ पर असर डाल सकता है। धीरे-धीरे यह आदत तनाव, नींद की कमी और मानसिक थकान की वजह बनती जा रही है।
चेयरमैन- मैरिंगो एशिया एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन के डॉक्टर प्रवीण गुप्ता के अनुसार ‘आजकल छोटी-छोटी वीडियो देखने और लगातार फोन स्क्रॉल करने की आदत तेजी से बढ़ रही है। कई महिलाएं यह महसूस भी नहीं कर पातीं कि वे दिन का कितना समय मोबाइल स्क्रीन पर बिता रही हैं। लगातार स्क्रीन देखने से दिमाग को आराम नहीं मिल पाता, जिसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगता है।' आइए जानें अधिक फोन देखना माताओं के दिमाग पर कैसे असर डाल रहा है?
डॉक्टर का कहना है कि YT Shorts और मोबाइल गेम्स इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि व्यक्ति बार-बार उन्हें देखना चाहे। हर कुछ सेकंड में बदलने वाला कंटेंट दिमाग को लगातार उत्तेजित करता है। इससे व्यक्ति का ध्यान कम समय तक टिकता है और बार-बार फोन चेक करने की आदत विकसित हो सकती है।
आपने देखा होगा कि दिन में फोन चलाना हो या रात को सोने से पहले, लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से दिमाग पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे मानसिक थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो सकती है। कई महिलाओं में यह आदत एंग्जायटी और स्ट्रेस का कारण बन रही है। खासतौर पर वे महिलाएं जो पहले से घर और परिवार की जिम्मेदारियों के दबाव में रहती हैं, उनमें इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।
डॉक्टर के मुताबिक मोबाइल का सबसे बड़ा असर नींद पर पड़ रहा है। कई महिलाएं रात में सोने से पहले लंबे समय तक वीडियो देखती रहती हैं या गेम खेलती हैं। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर की नेचुरल स्लीप साइकल को प्रभावित कर सकती है। इससे नींद देर से आती है और बार-बार टूट सकती है।
लगातार खराब नींद का असर अगले दिन मूड, ऊर्जा और दिमाग की कार्यक्षमता पर भी दिखाई देता है। इसलिए आपने देखा होगा कि अक्सर हमारी माताएं चिकचिक करती रहती हैं, जिसका एक कारण यह भी है।
डॉ. प्रवीण गुप्ता कहते हैं कि ‘ब्रेन को भी शरीर की तरह आराम की जरूरत होती है। अगर दिमाग लगातार स्क्रीन और डिजिटल कंटेंट से घिरा रहे, तो इसकी काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कई माताएं मोबाइल इस्तेमाल करते-करते मानसिक रूप से थका हुआ महसूस करती हैं, लेकिन इसका कारण समझ नहीं पाती हैं।’
डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल करने से गर्दन दर्द, सिर दर्द और आंखों में तनाव जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। इसी के साथ-
डॉ. गुप्ता के मुताबिक, इस आदत को धीरे-धीरे बदला जा सकता है। सबसे पहले महिलाओं को अपने स्क्रीन टाइम पर ध्यान देना चाहिए। दिन में कुछ समय ‘नो फोन टाइम’ तय करना फायदेमंद हो सकता है। जैसे खाने के दौरान, परिवार के साथ बैठते समय या सोने से पहले मोबाइल से दूरी बनाना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि खाली समय में मोबाइल की बजाय दूसरी एक्टिविटी को अपनाना बेहतर हो सकता है। सुबह की वॉक, योग, किताब पढ़ना, म्यूजिक सुनना या परिवार के साथ समय बिताना दिमाग को रिलैक्स करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा नोटिफिकेशन कम करना और स्क्रीन टाइम लिमिट सेट करना भी उपयोगी माना जाता है।
डिस्क्लेमर- डॉक्टरों का मानना है कि मोबाइल का संतुलित इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन इसकी लत मानसिक और न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। इसलिए महिलाओं को समय रहते अपनी डिजिटल आदतों पर नियंत्रण करना चाहिए ताकि वे तनाव, नींद की समस्या और मानसिक थकान जैसी परेशानियों से बच सकें।