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एक छोटी-सी तरकीब जो दिलाएगी आपको बेचैनी से राहत!

इस तकनीक को "ऐंक्शियस रिअप्रेज़ल" कहा जाता है।

क्या जब आप किसी बात पर उत्तेजित होते हैं तो आपके पेट में जो तितलियां उड़नेवाला अहसास होता है? कुछ ऐसी ही फीलिंग तब भी आती हैं जब आप परेशान होते हैं, है ना? ऐसा इसलिए है क्योंकि दोनों भावनाएं - चिंता और उत्तेजना- की कुछ अपनी विशेषताएं होती हैं। दोनों स्थितियों में हमें "पेट में तितली उड़ती" है और दोनों में घबराहट, व्याकुलता और बेचैनी महसूस होती है। लेकिन जिस तरह से हम दोनों की बात करते हैं, उसमें अंतर होता है; क्योंकि उत्तेजना हमारे लिए एक सकारात्मक अनुभव है जबकि चिंता नकारात्मक है।

एक तनावपूर्ण स्थिति में खुद को शांत रखना बेवकूफी है, क्योंकि आप अपने शरीर को उसकी प्राकृतिक प्रवृत्ति के खिलाफ जाने के लिए कहना जैसा है, कि वे बेकार और चिंता करें। इसकी बजाय, अपनी चिंता को उत्तेजना में बदलने के लिए इस सीधी तरकीब आजमा सकते हैं।  मैं यह नहीं कह सकता कि मैं यह परेशानी महसूस नहीं करता लेकिन इस तरकीब से मैं मेरी चिंता की समस्या को कुछ हद तक संभाल सकी हूं।

इस तकनीक को "ऐंक्शियस रिअप्रेज़ल" कहा जाता है और इसमें खुद को संभालना पड़ता है। इस तकनीक पर रिसर्च करने वालों का मानना है कि बेचैनी और उत्तेजना एक ही तरह से काम करते हैं। इसलिए हर बार जब आप बेचैन हो तो अपने आप से कहें कि आप उत्साहित हैं, एक्साइटेड हैं। इस तरह आप अपनी नेगेटिव उर्जा को रचनात्मक तरीके से पॉजिटीव एनर्जी में बदल सकेंगे। आपको बस इतना कहना है कि "मैं खुश हूं!"

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अपनी चिंता को अपनी राह में एक रोड़ा मानें। इसकी वजह से रुकें नहीं, अपनी ऊर्जा बचाएं और इसे उत्तेजना में बदलने की कोशिश करें। यह एक बहुत ही मुश्किल समस्या है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसका प्रभाव नहीं पड़ता। इसीलिए सकारात्मक सोचें, ऐसा करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन धीरे-धीरे आप बेहतर महसूस करेंगे।

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अनुवादक: Sadhana Tiwari

चित्र स्रोत: Shutterstock, Getty Images.

संदर्भ:Hofmann, S. G., Heering, S., Sawyer, A. T., & Asnaani, A. (2009). How to Handle Anxiety: The Effects of Reappraisal, Acceptance, and Suppression Strategies on Anxious Arousal. Behaviour Research and Therapy, 47(5), 389–394. http://doi.org/10.1016/j.brat.2009.02.010

Brozovich, F. A., Goldin, P., Lee, I., Jazaieri, H., Heimberg, R. G., & Gross, J. J. (2015). The effect of rumination and reappraisal on social anxiety symptoms during cognitive‐behavioral therapy for social anxiety disorder. Journal of clinical psychology, 71(3), 208-218.

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