
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Written By: Anju Rawat | Published : May 8, 2026 7:51 AM IST
thalassemia treatment (Image Source: ChatGPT)
Hospitals for Thalassemia Treatment : क्या आपके बच्चे या परिवार में किसी को थैलेसीमिया है? प्राइवेट अस्पतालों में थैलेसीमिया का इलाज काफी महंगा होता है, क्योंकि इसमें बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है और आयरन कम करने की दवाइयां भी दी जाती हैं। ऐसे में कई लोग अपने बच्चे का सही तरीके से थैलेसीमिया का इलाज नहीं करा पाते हैं। लेकिन, आपको बता दें कि कुछ सरकारी अस्पतालों का रुख करके, आप वहां अपने बच्चे का थैलेसीमिया का इलाज करवा सकते हैं। जी हां, देश में कई ऐसे सरकारी अस्पताल हैं, जहां थैलेसीमिया का इलाज पूरी तरह से संभव है। कई सरकारी अस्पतालों में भी ब्लड ट्रांसफ्यूजन, आरयन केलेशन थेरेपी और बोन मैनो ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। तो आइए, विश्व थैलेसीमिया दिवस (World Thalassemia Day) के मौके पर जानते हैं कि कौन-से सरकारी अस्पतालों में मुफ्त या कम कीमत में थैलेसीमिया का इलाज हो सकता है? आपको बता दें कि लोगों में थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए उद्देश्य से हर साल 8 मई को विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है।
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एम्स, दिल्ली के Hematology Department में थैलेसीमिया मरीजों के लिए विशेष सेवाएं उपलब्ध हैं। यहां थैलेसीमिया मरीजों का इलाज ओपीडी और भर्ती, दोनों तरीके से होता है। एम्स में ब्लड ट्रांसफ्यूजन, बोन मैरो ट्रांसप्लांट और आयरन केलेशन थेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस विभाग में डे केयर सेंटर भी है, जहां थैलेसीमिया के मरीजों को खून चढ़ाया जाता है। एम्स में हर महीने कई बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए जाते हैं। इतना ही नहीं, इस हॉस्पिटल में थैलेसीमिया और दूसरी ब्लड बीमारियों के लिए एंडवास लैब टेस्ट भी होते हैं।
सफदरजंग हॉस्पिटल, दिल्ली के Hematology and Medical Oncology Department में थैलेसीमिया समेत कई ब्लड डिसऑर्डर का इलाज किया जाता है। अस्पताल में थैलेसीमिया के निदान, इलाज और हेमेटोलॉजी लैब की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सफदरजंग अस्पताल में थैलेसीमिया का इलाज कराने के लिए सबसे पहले ओपीडी में दिखाना होता है। सफदरजंग हॉस्पिटल की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार, इस विभाग में नई ओपीडी सोमवार और बृहस्पतिवार को सुबह 9 बजे से 11:30 बजे तक होती है। यानी अगर आप पहली बार हेमेटोलॉजी विभाग में दिखाने जा रहे हैं, तो सोमवार और वीरवार को ओपीडी की पर्ची बना सकते हैं.
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पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ देश के बड़े सरकारी सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में से एक है। यहां Hematology Department में थैलेसीमिया मरीजों का इलाज किया जाता है। यहां मरीजों को डायग्नोसिस से लेकर बोन मैरो ट्रांसप्लांट तक की एडवांस सुविधाएं मिलती हैं। इस विभाग में ब्लड ट्रांसफ्यूजन, आयरन केलेशन थेरेपी और जेनेटिक टेस्टिंग जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। इस विभाग में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, हीमोफीलिया और ब्लड कैंसर का इलाज होता है।
यह दिल्ली सरकार का बड़ा सरकारी अस्पताल है। यहां ब्लड कैंसर और थैलेसीमिया मरीजों के लिए नियमित रेड सेल कंसंट्रेट सर्विसेस दी जाती हैं। लोकनायक की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार, यहां बच्चों और ब्लड डिसऑर्डर से जुड़े मरीजों के लिए अलग थैलेसीमिया केयर यूनिट मौजूद है। अस्पताल में थैलेसीमिया स्क्रीनिंग, ब्लड ट्रांसफ्यूजन और रेगुलर फॉलो-अप जैसी सुविधाएं दी जाती हैं।
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थैलेसीमिया के इलाज का खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को कौन-से प्रकार का थैलेसीमिया है, उसे कितनी बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है और इलाज सरकारी अस्पताल में हो रहा है या प्राइवेट में।
अगर सरकारी अस्पताल की बात करें, तो इसमें अक्सर मुफ्त या बहुत कम खर्च पर ही थैलेसीमिया का इलाज हो जाता है। कई राज्यों में सरकारी योजनाओं के तहत दवाइयों और ट्रांसफ्यूजन की सुविधा भी दी जाती है।
the national medical journal of india में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, थैलेसीमिया मेजर के इलाज में एक मरीज पर औसतन करीब ₹66,710 प्रति साल खर्चा आया। यह इलाज मुंबई के एक सरकारी अस्पताल में ब्लड ट्रांसफ्यूजन लेने वाले बच्चों पर आधारित था। स्टडी में बताया गया है कि 130 बच्चों के इलाज का कुल सालाना खर्च लगभग ₹86.7 लाख था। इसमें सबसे ज्यादा खर्चा आयरन केलेशन थेरेपी और खून चढ़ाने में आया।
Disclaimer: थैलेसीमिया एक ब्लड डिसऑर्डर है, इसका समय पर इलाज बहुत जरूरी है। कई सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में इसका इलाज संभव है। लेकिन, प्राइवेट हॉस्पिटल में थैलेसीमिया का इलाज काफी महंगा हो सकता है। वहीं, सरकारी अस्पतालों में कम कीमत में इसका इलाज हो सकता है।