चीनी खाने से आपके दिमाग को हो सकते हैं ये 4 खतरनाक नुकसान!

ज़्यादा चीनी खाने से आपके दिमाग के कार्यों पर असर पड़ता है और आप बुद्दू बन सकते हैं।

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Written By: Editorial Team | Published : November 1, 2017 6:26 PM IST

दुनिया में शायद ही कोई और ड्रग हो, जो चीनी से ज़्यादा खायी जाती है। आपको इसकी लत लग जाती है और आपको इसे खाकर कोई फायदा भी नहीं होता है। दरअसल, यह शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाता है। यह आपको मोटा बनाता है, आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचाता है, इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण बनता है, और सबसे बुरा, इससे कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है। जब हम चीनी की बात करते हैं तो हम लगभग हमेशा टेबल शुगर या सफेद चीनी के बारे में सोचते हैं; लेकिन सुक्रोज, कॉर्न सीरप, एस्पारटेम, सोर्बिटोल और सैकरीन जैसे मीठे पदार्थ भी उतना ही नुकसान पहुंचाते है। जहां हम हमारे शरीर पर इसके नुकसान के बारे में जानते हैं वहीं हमें शायद ही पता है कि कैसे यह हमारे दिमाग को नुकसान पहुंचाता है। मानव मस्तिष्क एक ऊर्जा की खपत करनेवाला अंग है जो आपके शरीर के कुल कैलोरी इनपुट का कम से कम पांचवां हिस्सा खुद इस्तेमाल करता है और आपको चीनी से मिलनेवाली आधी ऊर्जा का उपयोग करता है। लेकिन बहुत ज्यादा चीनी से इस अंग के काम करने के तरीके को नुकसान पहुंच सकता है। यहां हम बता हैं चीनी के हमारे दिमाग पर 5 बुरे असर।

1. इसकी लत लग जाती है

आपको लगता है कि केवल कोकीन और मेथ की लत लगने का ही डर होता है, तो आपको शायद पता नहीं कि चीनी आपके लिए उससे भी ज़्यादा ख़राब साबित हो सकती है। चीनी आपको अच्छा महसूस करानेवाले हार्मोन्स डोपामाइन को ट्रिगर कर सकती है, जिससे आप जब उदास या तनाव में होते हैं तो आपको ज़्यादा से ज़्यादा मीठी चीज़ें खाने का मन करता है। स्टडीज़ का कहना है कि मीठी चीज़ें और ड्रग्स के बीच जैविक समानताएं हैं। सबसे डरावनी बात यह है कि ऐसे लोग जो कोकिन जैसे ड्रग्स लेते हैं, चीनी की वजह से उनकी लत और भी बढ़ सकती है। भी एक बड़ी लत प्रवृत्ति पैदा हो सकती है। चीनी की वजह से आपके मस्तिष्क में ऐसे संकेत उत्पन्न होते हैं जिनकी वजह से आप खुद पर काबू नहीं रख पाते और व्यसन करने लगते हैं।1

2. कॉग्निटीव फंक्शन में गड़बड़ी

चूहों पर 2014 में की गयी एक स्टडी में संज्ञानात्मक कार्यों या कॉग्निटीव फंक्शन (cognitive functions)पर चीनी के प्रभाव का परीक्षण किया गया। नतीज़ो से साफ पता चलता है कि चीनी आपकी बुद्धि, स्थानिक ज्ञान और याद्दाश्त को बुरे तरीके से प्रभावित कर सकती है। यूसीएलए ने 2012 में एक और स्टडी में यह बताया कि बहुत सारी मिठाई आपको बुद्दू बनाने काम कर सकती है। इस लेख से पता चला कि कॉर्न सीरप जैसी मीठी चीज़ें खाने से मेमरी और पढ़ने-लिखने में तकलीफ आ सकती है। लेकिन अच्छी ख़बर यह है कि ओमेगा-3 से भरपूर चीज़ें खाने से इस नुकसान को कम किया जा सकता है।2 3

3. चीनी से डिप्रेशन होता है

पीएमएस-की वजह से होनेवाली उदासी या सामान्य चिड़चिड़ापन होने पर आप एक चॉकलेट बार खाकर खुद को खुश करने की कोशिश करती हैं।  हालांकि, आपको इस बारे में दोबारा सोचना चाहिए। जी हां, स्टडीज़ में कहा गया है कि शक्कर का सेवन और डिप्रेशन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। 2012 की एक स्टडी में बताया गया ज़्यादा फ्रुक्टोज वाली चीज़ें खानेवाले युवाओं में कैंसर की संभावना अधिक देखी गयी। यह इस बात की ओर भी इशारा करता है कि चीनी डिप्रेशन से जुड़ी समसयाएं जैसे चिंता और तनाव को और बिगाड़ सकता है और दिमाग के काम करने के तरीके को बदल सकता है। यानि खुद को खुश करने के लिए आप जो मीठी चीज़ें खाते हैं उनमें मौजूद चीनी आपको दुखी बना सकती है।4 5

4. शक्कर से डिमेंशिया का ख़तरा बढ़ता है

स्टडीज़ के मुताबिक चीनी से अल्जाइमर जैसी न्युरोडीजनरेटिव (neurodegenerative) बीमारिगों के जोखिम को बढ़ा सकता है। 2013 की  एक स्टडी में कहा गया है कि स्वीटनर की वजह से संज्ञानात्मक नुकसान आगे चलकर डिमेंशिया में बदल सकता है। स्टडीज़ में टाइप 2 डायबिटीज को बढ़ावा देने के लिए पश्चिमी आहार और जीवन शैली, ज़्यादा शक्कर वाले खाद्य पदार्थ, कसरत की कमी और ज़्यादा कैलोरी वाली डायट इसके बड़े कारण हैं। यह टाइप2 डायबिटीज़ और अल्जाइमर रोग के बीच एक संबंध भी दिखाता है, जिसके मुताबिक टाइप2 डायबिटीज़ की वजह से अल्जाइमर का खतरा बढ़ सकता है।6

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अनुवादक: Sadhana Tiwari

चित्र स्रोत: Shutterstock, Getty Images.

संदर्भ: 1.Lenoir, M., Serre, F., Cantin, L., & Ahmed, S. H. (2007). Intense Sweetness Surpasses Cocaine Reward. PLoS ONE, 2(8), e698. https://doi.org/10.1371/journal.pone.0000698

2.Kendig, M. D. (2014). Cognitive and behavioural effects of sugar consumption in rodents. A review. Appetite, 80, 41-54.

3.Agrawal, R., & Gomez‐Pinilla, F. (2012). ‘Metabolic syndrome’in the brain: deficiency in omega‐3 fatty acid exacerbates dysfunctions in insulin receptor signalling and cognition. The Journal of physiology, 590(10), 2485-2499

4.Westover, A. N., & Marangell, L. B. (2002). A cross‐national relationship between sugar consumption and major depression?. Depression and anxiety, 16(3), 118-120.

5.Harrell, C. S., Burgado, J., Kelly, S. D., Johnson, Z. P., & Neigh, G. N. (2015). High-fructose diet during periadolescent development increases depressive-like behavior and remodels the hypothalamic transcriptome in male rats. Psychoneuroendocrinology, 62, 252-264.

6.Moreira, P. I. (2013). High-sugar diets, type 2 diabetes and Alzheimer’s disease. Current Opinion in Clinical Nutrition & Metabolic Care, 16(4), 440-445.

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