फर्टिलिटी में आ रही परेशानी का कारण हो सकता है हार्मोनल इंबैलेंस, ऐसे सुधारें इसे

एक्सपर्ट्स के अनुसार 80 फीसदी से ज्यादा महिलाएं किसी न किसी हार्मोनल इंबैलेंस के कारण परेशान हैं।

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Written By: Atul Modi | Published : March 14, 2024 11:48 PM IST

हार्मोन्स हमारे शरीर के वो केमिकल मैसेंजर हैं जो हर अंग तक संदेश पहुंचाने का काम करते हैं। शरीर में हर एक हार्मोन की एक संतुलित मात्रा और काम होता है। इनके असंतुलित होने पर शरीर के सारे सिग्नल्स का काम प्रभावित होता है। ये कई बीमारियों का कारण भी बन सकता है। चिंता की बात ये है कि हार्मोनल इंबैलेंस इन दिनों एक बड़ी समस्या बन रहा है। खासतौर पर महिलाओं को यह कई रोग दे रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार 80 फीसदी से ज्यादा महिलाएं किसी न किसी हार्मोनल इंबैलेंस के कारण परेशान हैं। महिलाओं में मुख्य रूप से एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, थायराइड हार्मोन का इंबैलेंस मिलता है। इसका सीधा असर महिलाओं की फर्टिलिटी और पीरियड साइकिल पर पड़ता है। हार्मोनल इंबैलेंस आपके लिए कैसे बड़ी समस्या बन सकती है, आइए जानते हैं।

हार्मोनल असंतुलन का प्रभाव

​हार्मोनल इंबैलेंस महिलाओं की पूरी सेहत को इफेक्ट करता है। एक बार यह संतुलन बिगड़ने से एक के बाद एक परेशानियां होने लगती हैं। इनमें से दो प्रमुख परेशानियां ये हैं।

1. इनफर्टिलिटी का कारण

​हार्मोनल इंबैलेंस का सबसे ज्यादा प्रभाव आपकी फर्टिलिटी पर पड़ता है। हार्मोन का संतुलन बिगड़ने से ओव्यूलेटरी फंक्शन प्रभावित होता है। इसके कारण शॉर्ट ल्यूटियल फेज की परेशानी भी होती है। ये दोनों ही आपकी प्रजनन क्षमता को कम कर सकते हैं। ओव्यूलेटरी फंक्शन के दौरान अंडाशय से अंडे रिलीज होते हैं, जब ये चक्र बिगड़ता है तो आगे की सभी प्रक्रियाओं पर इसका असर पड़ता है। वहीं शॉर्ट ल्यूटियल फेज एक ऐसी स्थिति है जिसमें अंडाशय से निकलने वाले अंडे के बाद गर्भाशय की परत यानी एंडोमेट्रियम पर्याप्त रूप से विकसित नहीं होती है। यह गर्भधारण को मुश्किल बना सकता है और गर्भपात का कारण बन सकता है।

2. पीरियड साइकिल बिगड़ना

​हार्मोनल इंबैलेंस के कारण आपके पीरियड साइकिल पर भी असर पड़ता है। प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन मुख्य रूप से पीरियड्स के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जब इनका बैलेंस बिगड़ जाता है तो पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। कई बार पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग होने लगती है तो कभी बहुत कम। इसके कारण पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द भी हो सकता है। ये वजन बढ़ने का एक प्रमुख कारण भी है।

आप सुधार सकती हैं हार्मोन का बैलेंस

आपके छोटे-छोटे प्रयासों का हार्मोन्स का बैलेंस बनाने पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

1. बैलेंस डाइट लें

बैलेंस डाइट से आप हार्मोन का बैलेंस बना सकती हैं। अपने आहार में क्विनोआ, जई, ब्राउन राइस, बाजरा, रागी जैसे साबुत अनाज का सेवन करें। जामुन, संतरा, अंगूर, अनार, तरबूज, केला, पाइनएप्पल, स्ट्रॉबेरी, केले जैसे फलों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें। ब्रोकली, पालक, गाजर, शकरकंद, लाल मिर्च, प्याज, लहसुन आदि का सेवन भी हार्मोनल बैलेंस को सुधारता है।

2. करें रेगुलर एक्सरसाइज

रेगुलर एक्सरसाइज से आप अपने हार्मोन्स का बैलेंस फिर से बना सकती हैं। कई बार तनाव के कारण भी हार्मोन का बैलेंस बिगड़ता है। एक्सरसाइज इस जोखिम को कम करती है। इससे कोर्टिसोल, एड्रेनालाईन और नोरएपिनेफ्रीन जैसे तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन्स का लेवल कम होता है। एक्सरसाइज से ब्लड सर्कुलेशन में भी सुधार होता है। रेगुलर एक्सरसाइज से मेनोपॉज और एंड्रोपॉज के लक्षणों में कमी आती है और आपका इंसुलिन बैलेंस भी बना रहता है।

3. डॉक्टर से लें सलाह

अगर आप हार्मोन इंबैलेंस से परेशान हैं तो खुद दवाएं लेने की जगह बेहतर है कि आप डॉक्टर की सलाह लें। साथ ही आप विटामिन डी, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड आदि के सप्लीमेंट भी ले सकती हैं। ये सभी आपके हार्मोन के बैलेंस को सुधारने में मदद करते हैं।