सर्दी-जुकाम व कॉमन कोल्ड से बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय

सर्दी जुकाम को कॉमन कोल्ड के नाम से भी जाना जाता है. कॉमन कोल्ड की परेशानी उन लोगों में ज्यादा होती है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है. सर्दी जुकाम से बचने के लिए कुछ बेहतरिन घरेलू उपाय होते हैं.

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Written By: Editorial Team | Updated : September 18, 2019 6:12 PM IST

सर्दियों के मौसम आने वाला है सर्दी में ठंड के बढ़ते ही सर्दी, खांसी, बुखार जैसी बीमारियों में बढ़ोतरी हो जाती है। चिकित्सकों का मानना है कि इस मौसम में ठंड से बचने के लिए हम गरम कपड़े तो पहन लेते हैं, मगर ठंड के असर से बचने के लिए शरीर का बाहर के साथ-साथ अंदर से भी गरम रहना जरूरी है। पटना के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सुनील कुमार दूबे का मानना है कि इन बीमारियों से बचने के लिए कई घरेलू नुस्खे भी अपनाए जा सकते हैं। सुनील कुमार दूबे कहते हैं कि सर्दी-जुकाम या कॉमन कोल्ड में लौंग, तुलसी, काली मिर्च और अदरक से बनी चाय खांसी, सर्दी, जुकाम के लिए 'रामबाण' का काम करती है।

डॉ. दूबे के अनुसार, "कॉमन कोल्ड का मुख्य कारण वायरस का बढ़ता प्रसार होता है। उन्होंने कहा कि जुकाम एक संक्रामक बीमारी है जो बहुत जल्दी बढ़ती है। यह बीमारी बहती नाक, बुखार, सुखी या गीली खांसी अपने साथ लाती है, जो श्वसन तंत्र पर अचानक हमला करता है।"

शहद

शहद शरीर के 'इम्युन सिस्टम' को दुरुस्त करता है। उन्होंने कहा, "कॉमन कोल्ड में बच्चों और बुजुर्गों को विशेष ध्यान और सावधानी बरतनी चाहिए। सर्दियों में शहद का सेवन करने से शरीर को कई तरह की रोगों से दूर रखा जा सकता है। आयुर्वेद में शहद को अमृत माना गया है। सर्दी, जुकाम होने पर रात को सोने से पहले एक ग्लास गुनगुने दूध में एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से यह खत्म हो जाती है।"

बाजरा

सर्दी के दिनों में बाजरे की रोटी खाने का बहुत फायदा मिलता है। यह शरीर को तो गर्म रखता ही है, साथ में बाजरे की रोटी में प्रोटीन, विटामिन बी, कैल्शियम, फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट शरीर के लिए अच्छे होते हैं। ठंड से बचने के लिए बच्चों को भी बाजरे की रोटी खिलानी चाहिए।

डॉ दूबे बताते हैं कि, "सर्दी जुकाम में मछली तथा सूप भी बेहद कारगर है। खाने में अदरक के प्रयोग से शरीर तो गरम होता ही है, साथ में पाचन क्रिया भी अच्छा होता है।"

आंवला

आंवला डायबिटीज से परेशान लोगों के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। आंवला को प्राचीन आयुर्वेदिक प्रणाली में कई तरह के रोगों के इलाज के लिए लगभग 5000 साल से इस्तेमाल किया जा रहा है। आवंला की तुलना अमृत से की गई है। आंवला में विटामिन सी, विटामिन एबी, पोटैशिम, कैलशियम, मैग्नीशियम, आयरन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और डाययूरेटिक एसिड होते हैं।

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