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होली में अस्थमा और सांस के मरीज कैसे रखें अपना ख्याल? डॉक्टर ने बताया क्या करें और क्या नहीं

डॉ. अरुणाचलम एम, सीनियर कंसल्टेंट और एचओडी - पल्मोनोलॉजी, यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर 110, नोएडा का कहना है कि हर साल होली के बाद अस्पतालों में खांसी, सांस फूलना, गले में जलन, सीने में जकड़न और एलर्जी की शिकायतों के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।

होली में अस्थमा और सांस के मरीज कैसे रखें अपना ख्याल? डॉक्टर ने बताया क्या करें और क्या नहीं

Written by Ashu Kumar Das |Published : March 3, 2026 7:17 PM IST

Pulmonologists Advise High-Risk Patients to Take Extra Care This Holi : पूरे देश में होली का त्योहार का जश्न शुरू हो चुका है। होली जैसे त्योहार की खास बात यह है कि बच्चे, बड़े, बुजुर्ग- सभी रंगों में सराबोर होकर इस दिन को खास बनाते हैं। लेकिन जहां एक ओर होली उत्साह और उमंग का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यह त्योहार सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए चुनौती भी बन सकता है।

डॉ. अरुणाचलम एम, सीनियर कंसल्टेंट और एचओडी - पल्मोनोलॉजी, यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर 110, नोएडा का कहना है कि हर साल होली के बाद अस्पतालों में खांसी, सांस फूलना, गले में जलन, सीने में जकड़न और एलर्जी की शिकायतों के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।

इसलिए होली खेलते समय अस्थमा, COPD (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज), एलर्जी या पुराने फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित लोगों को अधिक सावधानी बरतनें की जरूरत होती है।

होली के रंग क्यों बनते हैं समस्या?

डॉ. अरुणाचलम एम का कहना है कि होली में इस्तेमाल होने वाले सूखे गुलाल और रंगों में बेहद महीन कण होते हैं। ये कण हवा में लंबे समय तक तैरते रहते हैं और सांस के साथ सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। इन रंगों में कई बार केमिकल, मेटलिक डाई और सिंथेटिक पदार्थ का भी इस्तेमाल किया जाता है, जो श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं।

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होली के रंगों के कारण होने वाली परेशानियां

होली के रंग अगर सांस नली के जरिए फेफड़ों में पहुंच जाए तो इससे व्यक्ति को नीचे बताई समस्याएं हो सकती हैं।

  1. सांस लेने में तकलीफ
  2. सीने में भारीपन
  3. घरघराहट
  4. लगातार खांसी
  5. गले में जलन

कई बार लक्षण तुरंत नहीं आते, बल्कि कुछ घंटों बाद शुरू होते हैं। ऐसे में लोग यह समझ नहीं पाते कि समस्या की जड़ होली के रंग हैं। होली के रंगों से एक व्यक्ति से ज्यादा सांस और फेफड़ों के मरीजों को होती है।

अस्थमा और सांस के मरीज होली खेलने से पहले क्या करें?

  1. डॉक्टर से सलाह लें- अगर आपको पहले से सांस की बीमारी है, होली पर गुलाल और रंग की बौछार उड़ाने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें। डॉक्टर की सलाह पर होली के दौरान मास्क का यूज करें।
  2. इनहेलर साथ रखें- होली खेलते समय अस्थमा या COPD के मरीज हमेशा अपना रेस्क्यू इनहेलर साथ रखें। होली के रंगों से एलर्जी के कारण अस्थमा का अटैक पड़ने पर इनहेलर का इस्तेमाल करने से गंभीर समस्या को टाला जा सकता है।
  3. त्वचा और नाक की सुरक्षा- होली के दिन घर से बाहर निकलने से पहले चेहरे और नाक के आसपास नारियल तेल या मॉइस्चराइजर लगा लें। इससे रंग सीधे त्वचा पर चिपक जाते हैं और नाक के अंदर जाने की संभावना कम होती है।

अस्थमा और सांस के मरीज होली खेलते समय किन बातों का रखें ध्यान?

  1. सूखे रंगों से दूरी- जिन लोगों को अस्थमा और सांस की बीमारी है, उन्हें बहुत ज्यादा चमकीले, धूल जैसे सूखे रंगों से बचना चाहिए। ऐसे लोग कोशिश करें कि हर्बल या तरल रंगों से ही होली खेलें।
  2. धुएं और पटाखों से दूर रहें- कुछ जगहों पर होली के दौरान धुआं, बोनफायर या पटाखे भी होते हैं। इनसे निकलने वाला धुआं सांस की समस्या को बढ़ा सकता है।
  3. बंद जगहों में रंग खेलने से बचें- अस्थमा और सांस के मरीज कम वेंटिलेशन वाले कमरों या हॉल में रंग खेलने से बचें, क्योंकि वहां हवा का प्रवाह कम होता है और रंगों के कण अधिक देर तक बने रहते हैं।

क्या पूरी तरह होली से दूर रहना जरूरी है?

नहीं, डॉक्टर का कहना है कि किसी व्यक्ति को सांस और अस्थमा जैसी बीमारी है, तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आपको होली खेलने से बचना चाहिए। अगर आप सावधानी बरतें तो होली का आनंद सुरक्षित तरीके से लिया जा सकता है। जरूरी यह है कि आप अपने शरीर की सीमाओं को समझें और अति से बचें।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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