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Written By: Anshumala | Published : September 28, 2018 9:24 PM IST
दिल में छेद होने पर शिशु को दूध पीने में परेशानी, दूध पीते हुए पसीना या वजन कम होना, निमोनिया होना आदि लक्षण पाए जाते हैं। © Shutterstock
अक्सर आपने लोगों को कहते सुना होगा कि फलां के नन्हें से बच्चे के दिल में छेद है। क्या आप जानते हैं कि दिल में छेद होने का क्या मतलब होता है, आखिर छेद होता कैसे है? दिल में छेद जन्मजात बच्चों में से हजारों में किसी एक को ही होती है। गर्भावस्था के दौरान ही इस बीमारी का अल्ट्रासाउंड के जरिए पता चल जाता है। अल्ट्रासाउंड में जब दिल में हल्का गुनगुनाहट हो तो दिल सामान्य है। यदि बुदबुदाहट की मंद ध्वनि पैदा हो रही है तो दिल में कुछ गड़बड़ है। हृदय के दोनों हिस्सों के बीच कोई छेद हो तो सामान्य रूप से रक्त का प्रवाह अधिक दबाव वाली जगह से कम दबाव वाली जगह की ओर होना चाहिए अर्थात् रक्त का संचार बाएं चैंबर से दाएं चैंबर की तरफ होना चाहिए जिसे लेफ्ट टू राइट संट कहते हैं।
हृदय में छेद के लक्षण
प्राय: दो तरह के नवजात शिशु/बच्चे हृदय रोगी (छेद) होते हैं।
पहला- बच्चे में हृदय रोग होने पर नीला पड़ जाता है, जिसमें शरीर और चेहरे के अलावा जीभ, नाखून और होंठ भी नीले हो जाते हैं जिससे बच्चा कई बार बेहोश हो जाता है। इस स्थिति में बच्चे को तुरन्त चिकित्सालय में ले जाना चाहिए। हृदय रोग विशेषज्ञ ऐसे बच्चों को पहले वर्ष में ऑपरेशन कराने की सलाह देते हैं।
दूसरा- शिशु को दूध पीने में परेशानी, दूध पीते हुए पसीना या वजन कम होना और जल्दी थक जाना, बार-बार निमोनिया होना आदि लक्षण पाए जाते हैं। चिकित्सक के परीक्षण के दौरान ऐसे हृदय में मरमर ध्वानि सुनाई देती है। दोनों परिस्थिति में छेद छोटे होने पर देर से पता चलता है। हृदय रोग विशेषज्ञ जांच करने के बाद यह तय करते हैं कि शिशु एंजियोप्लास्टी से ठीक होगा या सर्जरी से। समय रहते इस बीमारी का इलाज किया जा सकता है।
कैसे होता है इस छेद का इलाज
आधुनिक चिकित्सा टेक्नोलॉजी में गर्भावस्था के 18वें हफ्ते में फीटल ईको कार्डियोग्राम करके देखा जाता है जिसमें हार्ट अल्ट्रासांउड मशीने इस्तेमाल की जाती है। यदि कोई विकार पाया जाता है तो उसे इस बारे में परामर्श दे दिया जाता है। हृदय रोग विशेषज्ञ नवजात बच्चे का मूत्र और रक्त का परीक्षण करवाने के साथ-साथ इकोकार्डियोग्राम, ईसीजी और चेस्ट के एक्सरे भी करते हैं। एंजियोग्राफी से दिल के छेद का आकार, साइज और गहराई देखी जाती है। पहले छेद ऊतकों के जरिए बंद किए जाते थे लेकिन वर्तमान में आधुनिकतम चिकित्सा तकनीकी में अब केथेटर के जरिए छेद को डिवाइस से बंद कर दिया जाता है। डिवाइस लगाने की प्रक्रिया एंजियोप्लास्टी करने जैसी होती है।
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