सफर और ट्रैफिक में पेशाब रोकना कितना खतरनाक है? किडनी खराब कर सकती है आपकी ये आदत

पेशाब रोकने की आदत ब्लैडर की मांसपेशियों को कमजोर करती है, जिससे यूटीआई और किडनी स्टोन का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक ऐसा करने से किडनी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Published : May 6, 2026 4:27 PM IST

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Medically Verified By: Dr Sumit Gahlawat

दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर घंटों ट्रैफिक में फंसे रहना यहां के लोगों के लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है। ऑफिस जाना हो या लंबी दूरी तय करना हो, अक्सर वॉशरूम की सुविधा न मिलने या समय बचाने के चक्कर में लोग यूरिन को लंबे समय तक रोक कर रखते हैं। सुनने में यह एक छोटी सी बात लगती है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार, यह आदत आपकी किडनी के लिए खतरानाक साबित हो सकती है। नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट और जाने-माने यूरोलॉजिस्ट और किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. सुमित गहलावत कहते हैं कि कई मामलों में यह आदत किडनी को पूरी तरह से खराब तक कर सकती है।

पेशाब रोकने से क्या होता है?

हमारा मूत्राशय यानि कि ब्लैडर एक गुब्बारे की तरह होता है। जब यह आधा भर जाता है, तो दिमाग को संकेत मिलता है कि अब इसे खाली करने का समय है। जब हम बार-बार इस संकेत को नजरअंदाज करते हैं, तो ब्लैडर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। दिल्ली जैसे शहर, जहां प्रदूषण और हीटवेव अपने चरम पर रहती हैं, वहां हाइड्रेशन पहले से ही एक चुनौती है। ऐसे में लंबे समय पर पेशाब रोकना किडनी पर सीधा दबाव डालता है।

Kidney Health

पेशाब रोकी तो किडनी पर क्या असर होगा?

  • क्योंकि पेशाब में यूरिक एसिड और कैल्शियम ऑक्सालेट जैसे खनिज होते हैं। ऐसे में अगर लंबे समय पर पेशाब को रोका जाए तो ये किडनी स्टोन का रूप ले लेते हैं।
  • पेशाब में शरीर के टॉक्सिंस और बैक्टीरिया होते हैं। इसे रोकने से बैक्टीरिया ब्लैडर में पनपने लगते हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जाती है।
  • बार-बार पेशाब रोकने से ब्लैडर अपनी क्षमता से ज्यादा खिंच जाता है। समय के साथ, यह इतना कमजोर हो जाता है कि व्यक्ति चाहकर भी पूरा ब्लैडर खाली नहीं कर पाता, जिससे ब्लैडर बचा हुआ पेशाब संक्रमण का कारण बनता है।
  • क्योंकि ब्लैडर खाली नहीं हो रहा है इसलिए मूत्राशय का दबाव वापस किडनी की ओर जाता है, जिससे किडनी में सूजन आ सकती है और लंबे समय में किडनी फेलियर की नौबत आ सकती है।

दिल्ली की महिलाओं के लिए बड़ी चुनौती क्यों है?

दिल्ली या फिर बड़े शहरों के पब्लिक टॉयलेट्स की असलीयत किसी से छिपी नहीं है। गंदगी के डर से महिलाएं अक्सर घर से निकलने से पहले और वापस आने तक घंटों पेशाब रोकती हैं। कई बार महिलाएं सुरक्षा के लिहाज से भी पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल करने से बचती हैं। यह आदत उनमें क्रोनिक यूटीआई और पेल्विक हिस्से में दर्द की समस्या को जन्म दे सकती है।

सफर के दौरान तेज पेशाब आए तो क्या करें?

  • आजकल बाजार में फीमेल यूरिनेशन डिवाइस और पोर्टेबल यूरिन बैग्स उपलब्ध हैं, जिन्हें ट्रैफिक में फंसने पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • सफर शुरू करने के ठीक पहले बहुत ज्यादा पानी न पिएं बल्कि सफर के दौरान छोटे-छोटे घूंट में पानी पिएं। हालांकि पानी पीना कम न करें, क्योंकि डिहाइड्रेशन भी किडनी के लिए खतरनाक है।
  • अगर आपको पब्लिक टॉयलेट जाना पड़ रहा है तो पेट्रोल पंप या किसी साफ कैफे के टॉयलेट को इस्तेमाल किया जा सकता है।

डॉक्टर के पास कब जाएं?

यदि आपको निम्नलिखित लक्षण महसूस हों तो इसे सामान्य समझकर इग्नोर न करें बल्कि समय रहते डॉक्टर को दिखाएं।

  • पेशाब करते समय जलन या दर्द होना
  • पेट के निचले हिस्से या पीठ में लगातार दर्द।
  • पेशाब का रंग गहरा होना या उससे तेज गंध आना।
  • बार-बार महसूस होना कि पेशाब आ रही है लेकिन करने पर पेशाब का न आना।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल आपकी जागरुकता के लिए हैं। अगर आपको पेशाब या ब्लैडर संबंधी कोई खास लक्षण महसूस हो रहे हैं तो परेशान न हो, समय पर डॉक्टर को दिखाकर जांच कराएं।

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