AIDS होने पर स्किन में तुंरत आ जाते हैं ये 4 बदलाव, समय रहते पहचानें इन्हें
त्वचा में बदलाव पहला संकेत हो सकता है कि आपको एचआईवी है। एचआईवी वाले लगभग 90% लोगों को शरीर पर किसी न किसी हिस्से पर दाने या अन्य स्किन संबंधी समस्याएं होनी शुरू हो जाती है।
Medically Verified By: Dr. Sachin Shelke
एचआईवी से होने वाले वायरल संक्रमण की गंभीरता के अंतिम चरण को एड्स (Acquired immunodeficiency syndrome) के नाम से जाना जाता है। एचआईवी से संक्रमित हर व्यक्ति को एड्स होना जरूरी नहीं होता है।

एचआईवी (HIV) यानि ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस एक विशेष वायरल इन्फेक्शन है, जो ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस नामक एक विशेष वायरस से ही होता है। ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस शरीर की विशेष सफेद रक्त कोशिकाओं को नष्ट करने लगता है, जिससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ने लगती है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने के कारण गंभीर संक्रमण व कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। एचआईवी से होने वाले वायरल संक्रमण की गंभीरता के अंतिम चरण को एड्स (Acquired immunodeficiency syndrome) के नाम से जाना जाता है। एचआईवी से संक्रमित हर व्यक्ति को एड्स होना जरूरी नहीं होता है।
यह वायरल संक्रमण विशेष रूप से यौन मार्गों से फैलता है, हालांकि, इसके अलावा यह संक्रमित व्यक्ति को लगाई गई सुई का इस्तेमाल करने या संक्रमित व्यक्ति का रक्त चढ़ाने से भी हो सकता है। एचआईवी के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के संपर्क में आने के दो से चार हफ्तों बाद विकसित हो जाते हैं। हांलाकि, कुछ लोगों में इसके लक्षण विकसित होने में लगभग दस महीनों तक का समय भी लग सकता है।
एचआईवी संक्रमण को पूरी तरह से खत्म करने के लिए अभी तक कोई इलाज नहीं मिल पाया है। लेकिन उचित एंटीरेट्रोवायरल दवाएं (Antiretroviral drugs) और जीवनशैली में बदलाव करके इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। इस से संक्रमित व्यक्ति को कई प्रकार की जटिलताएं विकसित हो जाती हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने के कारण उसे बार-बार अन्य संक्रमण भी होते रहते हैं, जो अक्सर जानलेवा स्थिति पैदा कर देते हैं। इसीलिए एचआईवी संक्रमित मरीज के लक्षणों को नियंत्रित रखना बेहद आवश्यक होता है।
एचआईवी आमतौर पर दो प्रकार से होता है, जिन्हें एचआईवी-1 और एचआईवी-2 के नाम से जाना जाता है। इन दोनों के गंभीर होने पर एड्स हो सकता है। हालांकि, फिर भी ये एक दूसरे से काफी अलग हो सकते हैं, जो निम्न प्रकार से हैं -
एचआईवी संक्रमण के कई अलग-अलग चरण होते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं -
एचआईवी संक्रमण के लक्षण मुख्य रूप से उसकी स्टेज पर निर्भर करते हैं। शुरुआत में मरीज को कोई मुख्य लक्षण दिखाई नहीं देता है। इसके लक्षण आमतौर पर संक्रमण शुरू होने के दो से तीन हफ्तों बाद विकसित होने लगते हैं। हालांकि, कुछ लोगों में एचआईवी संक्रमण के लक्षण पूरी तरह से विकसित होने में लगभग दस महीनों का समय लग जाता है। एचआईवी संक्रमण के शुरुआती चरणों में भी कुछ सामान्य (गैर-विशिष्ट) लक्षण महसूस हो सकते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -
एचआईवी एक विशेष प्रकार का वायरस है, जो अफ्रीका के चिंपैंजी बंदरों से मानव शरीर में आया है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मनुष्यों के शरीर में संक्रमित बंदरों का मांस खाने के दौरान पहुंचा है।
जब एक स्वस्थ व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले द्रव या पदार्थ के संपर्क में आता है, तो वह भी संक्रमित हो जाता है। एचआईवी विशेष रूप से निम्न की मदद से फैलता है -
निम्न कुछ स्थितियों के बारे में बताया गया है, जो एचआईवी संक्रमण होने के खतरे को बढ़ा देती हैं -
एचआईवी एक वायरल इन्फेक्शन है, जिसे विशेष बातों का ध्यान रखकर और कुछ नियमों का पालन करके फैलने से रोका जा सकता है। नीचे बताए दिशानिर्देशों का पालन करके आप एचआईवी संक्रमण के फैलाव को रोक सकते हैं -
एचआईवी संक्रमण का निदान करने के लिए उसकी जांच करना आवश्यक होता है। एचआईवी संक्रमण का निदान करने के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट और कन्फर्मेटरी टेस्ट मुख्य माने गए हैं। थ्रोम्बोसाइटोपेनिया, ल्यूकोपेनिया या एनीमिया की जांच करने के लिए कंप्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) टेस्ट किया जाता है। एचआईवी संक्रमण के निदान में सीडी4 सेल काउंट और वायरल लोड भी आवश्यक हैं। यहां तक कि कुछ मामलों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि करने के लिए डिफ्रेंशियल डायग्नोसिस किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए हृदय संबंधी रोगों का पता लगाने के लिए कार्डियक बायोमार्कर टेस्ट करना।
एड्स के मामलों में निमोनिया को एक प्रमुख जटिलता के रूप में देखा गया है, इसलिए डॉक्टर अक्सर चेस्ट एक्स रे भी करवाने की सलाह देते हैं। छाती का एक्स रे करने से निमोनिया के कारण फेफड़ों में होने वाली समस्याओं का पता लगाया जा सकता है। आर्टरियल ब्लड गैस टेस्ट की मदद से एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं। टीबी का पता लगाने के लिए कई ट्यूबरकुलोसिस टेस्ट किए जाते हैं और स्प्यूटम कल्चर भी किया जाता है जो बैक्टीरियल इन्फेक्शन से संबंधित जानकारियां देता है। यदि टेस्ट के दौरान टीबी के संकेत मिलते हैं, तो सीटी स्कैन किया जाता है ताकि स्थिति की पुष्टि की जा सके और उससे निपटने के लिए उचित उपचार प्रणाली तैयार की जा सके। जिन लोगों को एड्स है और उनकी सीडी4 कोशिकाओं की संख्या कम हो गई है उन्हें अग्नाशयशोथ और कोलेसिस्टाइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है। आवश्यकता पड़ने पर मरीज के बिलीरुबिन, ट्रांसमिनेज और लाइट बेस टेस्ट भी किए जा सकते हैं।
एचआईवी संक्रमित जिन लोगों को निगलने में कठिनाई जैसी समस्याएं होने लगी हैं, उनके लिए इसोफेगोगैस्ट्रोड्यूडेनोस्कोपी टेस्ट किया जाता है। एड्स से ग्रस्त लोगों को आमतौर पर दस्त की शिकायत रहती हैं, ऐसे मरीजों में बैक्टीरिय व पैरासाइट इन्फेक्शन का पता लगाने के लिए कुछ विशेष टेस्ट किए जाते हैं। कई बार आवश्यकता पड़ने पर कोलोनोस्कोपी भी की जा सकती है। यदि डॉक्टर को लगता है कि एचआईवी संक्रमण से मरीज को न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी हो रही हैं, तो ऐसी स्थितियों का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन, सेरिब्रोस्पाइनल द्रव की जांच और लंबर पंक्चर जैसे टेस्ट किए जा सकते हैं।
एचआईवी संक्रमण के लक्षणों को गंभीर होने से रोकने के लिए जीवनशैली में कुछ सुधार करना महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए आपको निम्न बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है -
त्वचा में बदलाव पहला संकेत हो सकता है कि आपको एचआईवी है। एचआईवी वाले लगभग 90% लोगों को शरीर पर किसी न किसी हिस्से पर दाने या अन्य स्किन संबंधी समस्याएं होनी शुरू हो जाती है।
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पूरी दुनिया में अनुमानित 38 मिलियन लोग एचआईवी संक्रमण के साथ जी रहे हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र वैश्विक स्तर पर एचआईवी से ग्रसित लोगों का केन्द्र है, जो करीब 10% के बराबर है।
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एड्स को एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशियेंसी सिंड्रोम कहते हैं। एचआईवी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियेंसी वायरस कहलाता है। यह बीमारी तब होती है, जब वायरस सफेद रक्त कोशिकाओं (संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाओं) को बर्बाद करके आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है।
एड्स के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत ने एचआईवी संक्रमित लोगों के इलाज के लिए दुनिया को दो-तिहाई दवाओं की आपूर्ति की है। यह जानकारी भारतीय राजनयिक पौलोमी त्रिपाठी ने दी।
लोगों का यह भी मानना है कि एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति को किस करने से यह फैल सकता है। आपकी गलतफहमी है। किस करने से यह बीमारी नहीं फैलता है। हां, ये बीमारी सेक्चुअल ट्रांसमिशन से जरूर फैलती है।
जब हम एचआईवी जैसे जानलेवा रोग से बचने के लिए इंफेक्टेड इंजेक्शन का इस्तेमाल नहीं करते, तो फिर मच्छरों के काटने से भी तो एचआईवी से पीड़ित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मच्छरों के काटने से एचआईवी नहीं हो सकता। ऐसा इसलिए क्योंकि मच्छर के भीतर हर तरह के वायरस सरवाइव नहीं कर पाते।
विश्व एड्स वैक्सीन दिवस 2019ः एड्स वैक्सीन में गाय की एंटीबॉडीज का प्रयोग
कुछ लोगों को एड्स होने के लक्षण अपने अंदर दिखाई देते हैं लेकिन शर्म और झिझक के के कारण हॉस्पिटल में अपना टेस्ट कराने नहीं जा पाते, खास कर महिलाएं। तो आज हम आपको बताएँगे के घर बैठे आप एचआईवी की जांच कैसे कर सकते हैं।
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मच्छरों के काटने से एचआईवी नहीं हो सकता क्योंकि मच्छर के भीतर हर तरह के वायरस सरवाइव नहीं कर पाते।
यह दवा बीमारी को फैलने से रोक लगाएगी और एचआईवी संक्रमण के शिकार व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाएगी।

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जब फ़िल्मों के ज़रिए की बॉलीवुड ने की पहल।

कैसे kiss करने से HIV होने का खतरा होता है?

कुछ लोगों को 2-4 सप्ताह में ही एचआईवी (HIV) के लक्षण दिख जाते हैं तो कुछ को 10 महीनों तक नहीं दिखायी पड़ते।