Hip Fracture : 96 वर्षीय महिला के हिप फ्रैक्चर का सफल इलाज, कई अन्य बीमारियों से थीं पीड़ित

96 साल की महिला हिप फ्रैक्चर (Hip fracture in hindi) से पीड़ित थीं, जिनका एक जटिल सर्जरी किया गया और अब वह बिल्कुल स्वस्थ हैं। मरीज को कई अन्य बीमारियां भी, थीं जैसे हड्डियों का कैंसर, उनके दिल में पेसमेकर था और उन्हें एक्यूट स्ट्रोक का इतिहास था, उनके दिल की बाइपास सर्जरी भी की जा चुकी थी।

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Written By: Anshumala | Published : March 6, 2020 2:11 PM IST

एक 96 साल की महिला हिप फ्रैक्चर (Hip fracture in hindi) से पीड़ित थीं, जिनका एक जटिल सर्जरी किया गया और अब वह बिल्कुल स्वस्थ हैं। अपोलो हॉस्पिटल्स में आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. यश गुलाटी के नेतृत्व में आर्थोपेडिक एवं जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट सर्जनों की टीम ने इस सर्जरी को अंजाम दिया। यह मामला चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि मरीज को कई अन्य बीमारियां भी, थीं जैसे हड्डियों का कैंसर, उनके दिल में पेसमेकर था और उन्हें एक्यूट स्ट्रोक का इतिहास था, उनके दिल की बाइपास सर्जरी भी की जा चुकी थी।

डॉ. यश गुलाटी, सीनियर कन्सलटेन्ट, अपोलो हॉस्पिटल्स ने कहा, ‘‘यह मेरे करियर की सबसे मुश्किल स्थिति थी। कई बीमारियों के चलते मरीज का जीवन जोखिम में था, अगर सही इलाज न चुना जाता तो मरीज की जान तक जा सकती थी। अगर हम बिना सर्जरी के मरीज को ऐसे ही छोड़ देते, तो वह न्युमोनिया, बैड सोर और एम्बोलिज़्म जैसी समस्याओं से पीड़ित हो सकती थीं। सर्जरी में भी बहुत ज्यादा जोखिम था। अक्सर ऐसे मामलों में मरीज के परिवारजन भी सर्जरी के लिए सहमति देने से घबराते हैं। मरीज और उनके रिश्तेदारों से बातचीत कर हमने हिप रिप्लेसमेन्ट का फैसला लिया। सर्जरी लैस इनवेसिव तकनीक से की गई, ताकि खून का नुकसान न हो और मरीज को सर्जिकल ट्रॉमा न झेलना पड़े।’

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‘यहां उल्लेखनीय है कि वह हड्डियों के कैंसर से पीड़ित थीं। गिरने के कारण उनकी हड्डी (Hip fracture treatment in hindi) टूट गई थी। पेसमेकर के चलते हम इलेक्ट्रो कॉटरी का उपयोग नहीं कर सकते थे, ताकि सर्जरी के दौरान खून का नुकसान न हो। ऐसे में सर्जरी के लिए वैकल्पिक तरीकों का उपयोग किया गया, क्योंकि खून का नुकसान जानलेवा हो सकता था। ऐसे मामलों में सर्जरी के बाद की देखभाल बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। हमारे विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सों एवं फिजिकल थेरेपिस्ट की टीम ने मरीज को उत्कृष्ट देखभाल प्रदान करने के लिए कड़ी मेहनत की, अगले ही दिन मरीज को चलाया गया, ताकि लम्बे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण कोई जटिलता न हो। क्रिटिकल केयर युनिट में हमारी टीम स्टैंडबाय पर थी, ताकि किसी भी जटिलता से तुरंत निपटा जा सके।’’

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