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Written By: Anshumala | Updated : July 12, 2020 11:07 AM IST
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Corona & High Blood Sugar: कोरोनावायरस का प्रसार (Spread of coronavirus) रुक नहीं रहा। भारत में अब हर दिन लगभग 24-25 हजार कोरोना (Corona in india) मामले सामने आ रहे हैं। देश में कोरोना को लेकर स्थिति गंभीर होती जा रही है। वहीं, आए दिन कोरोना से लेकर नए-नए शोध भी सामने आ रहे हैं। जिन लोगों को पहले से ही कोई क्रोनिक डिजीज, डायबिटीज, फेफड़ों से संबंधित कोई समस्या है, उनके लिए कोरोना अधिक खतरनाक साबित हो रहा है। हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों का ब्लड शुगर हाई (High blood sugar level) रहता है, उन्हें कोरोना से संक्रमित (Coronavirus infection) होने का खतरा अधिक रहता है।
यदि आपको हाई ब्लड शुगर लेवल और डायबिटीज की समस्या (Diabetes & corona risk) है, तो अलर्ट हो जाएं। शोधकर्ताओं ने इस बात की चेतावनी दी है कि हाई ब्लड शुगर से ग्रस्त लोगों को कोरोना काल में अपनी सेहत के प्रति जरा सी भी लापरवाही करना, उनकी जान को खतरा (Corona & High Blood Sugar) पहुंचा सकता है। शोधकर्ताओं ने अपने शोध में यह भी कहा है कि यह खतरा उनमें भी होता है, जिन्हें डायबिटीज की समस्या पहले से नहीं है।
यह अध्ययन चीन के टोंगजी मेडिकल कॉलेज के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। अध्ययन के अनुसार, हाई ब्लड शुगर लेवल वाले मरीजों में कोरोना से संक्रमित होने की संभावना काफी हद तक रहती है। शोध में शरीर में ब्लड शुगर बढ़ने और कोरोना बीमारी के कारण शरीर पर पड़ने वाले साइड एफेक्ट्स (Corona & High Blood Sugar level in hindi) के बीच संबंध पाया गया है। हालांकि, अभी जितने भी मरीज हॉस्पिटल में एडमिट हुए हैं, उनमें फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल और कोरोना के मरीजों की सेहत के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
इस अध्ययन के निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने चीन के दो हॉस्पिटल में कोरोना मरीजों के ब्लड शुगर लेवल की जांच की और जिनकी मौत 28 दिनों के अंदर हुई उन मरीजों का दोबारा जांच किया। अध्ययन से प्राप्त हुए डाटा के परिणाम दर्शाते हैं कि कोरोना के मरीजों को डायबिटीज ना भी हो, तो भी उन्हें अपने शुगर लेवल पर लगातार नजर रखनी चाहिए। कोरोनावायरस से संक्रमित कई मरीजों में ग्लूकोज मेटाबॉलिक डिसऑर्डर के लक्षण भी पाए गए।
इस स्टडी में लगभग 605 कोरोना मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें से 114 ने कोरोना के कारण अपनी जान गंवा दी थी। सभी मरीजों की औसत उम्र 59 वर्ष थी। इनमें से लगभग 208 लोग पहले से ही किसी ना किसी बीमारी से ग्रस्त थे, लेकिन डायबिटीज की समस्या नहीं थी। हां, अधिकतर मरीजों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या जरूर थी। शोधकर्ताओं ने कहा कि इनमें से एक तिहाई मरीजों में फास्टिंग ब्लड शुगर अधिक पाया गया। जिनमें फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल अधिक होता है, उन्हें भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज होने की संभावना अधिक होती है। अधिक फास्टिंग ब्लड शुगर वाले कोरोना मरीजों में लो ब्लड शुगर वाले कोरोना मरीजों की तुलना में मृत्यु होने का खतरा 2.3 गुना बढ़ जाता है। यह अध्ययन विज्ञान पत्रिका डायबिटोलोजिया में प्रकाशित किया गया है।
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