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Written By: Editorial Team | Published : October 3, 2017 1:47 PM IST
आए दिन बहुत से लोग कब्ज की समस्या से परेशान रहते हैं। जाहिर ऐसी कुछ भी समस्या होने पर आप तुरंत लैक्सेटिव ले लेते हैं। डॉक्टर आपको कब्ज से राहत के लिए सिरप, कैप्सूल, पाउडर और सपोसिटरी आदि के रूप में लैक्सेटिव दे सकते हैं। बेशक इनके सेवन से आपको तत्काल राहत मिल जाती है लेकिन नियमित रूप से इनका सेवन करना केवल अस्वस्थ ही नहीं है बल्कि आपको इनकी लत भी लग सकती है।
वास्तव में कुछ लोग इन पर इतना निर्भर हो जाते हैं कि उन्हें हल्के कब्ज के लिए भी इन्हें लेना पड़ता है। बहुत से लोग खाने के बाद हल्का महसूस करने के लिए भी लैक्सेटिव लेते हैं। आपको बता दें कि इस पर निरभर रहने से आपको कई नुकसान हो सकते हैं। चलिए जानते हैं अधिक मात्रा में लैक्सेटिव के नुकसान हो सकते हैं।
1) इलेक्ट्रोलाइट में गड़बड़ी
सोडियम, कैल्शियम, फास्फोरस और मैग्नीशियम जैसे मूल्यवान मिनरल्स दिल और तंत्रिकाओं के कार्यों को रेगुलेट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब आप दस्त को प्रेरित करने के लिए बहुत अधिक मात्रा में लैक्सेटिव लेते हैं, तो मिनरल्स का नुकसान होता है और आपके शरीर में परेशानी हो सकती है।
2) एसिड से जुड़ी समस्याएं
ज्यादा मात्रा में लैक्सेटिव खाने से शरीर में एसिड से जुड़ी असमानताएं पैदा हो सकती हैं। खून में एसिड लेवल बढ़ने से आपको सिरदर्द, भूख में कमी, हार्ट रेट बढ़ना और थकान की समस्या हो सकती है। इसका लेवल कम होने से अल्कोलॉइस, मतली, सूजन, मांसपेशियों में ऐंठन और झटके आदि की समस्या हो सकती है।
3) एडिमा और वजन बढ़ना
परिणाम यह बताते हैं कि जो लोग वजन घटाने के लिए लैक्सेटिव लेते हैं, वो पहले से ज्यादा फूले हुए और भारी लगते हैं। ज्यादा लैक्सेटिव लेने से बॉडी में रेनिन-एल्दोस्टेरोन सिस्टम को सक्रिय कर सकता है, जिससे शरीर में पानी जमा होना शुरू हो जाता है।
4) किडनी फेलियर
हाइपोकैलीमिया एक स्थिति है जिसमें शरीर में पोटेशियम की कमी हो जाती है और ऐसा अक्सर लैक्सेटिव लेने वालों को होता है। इससे स्केलटल मसल टिश्यू के टूटने का खतरा होता है, जो किडनी को प्रभावित कर सकता है और किडनी फेलियर का कारण बन सकता है।
5) हाइपोमैगनेसेमिया
रेचक उपयोग के कारण लगातार डायरिया से शरीर में मैग्नीशियम के भंडार में कमी हो जाती है। इस स्थिति में मांसपेशियों की ऐंठन, असंतुलित दिल की धड़कन की लय, चिड़चिड़ापन, अवसाद और यहां तक कि मौत का कारण तक बन सकती है।
6) लैक्सेटिव गट
जब पेट निरंतर लैक्सेटिव उपयोग का अधीन हो जाता है, तो समय के साथ पेट के टिश्यू डैमेज हो जाते हैं। चूंकि पेट के टिश्यू लैक्सेटिव से ज्यादा इस्तेमाल करने लगते हैं, वे कमजोर हो जाते हैं और अपने आप से मल को खाली नहीं कर पाते हैं।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock
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