हेपेटाइटिस बी एक प्रकार का वायरल इंफेक्शन (Viral infection) है, जो प्रमुख रूप से लिवर को प्रभावित करता है। हेपेटाइटिस बी से ग्रस्त व्यक्ति के लिवर में सूजन व लालिमा आ जाती है और समय पर देखभाल न करने पर कई बार इससे लिवर स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकता है। लिवर हमारे शरीर के प्रमुख अंदरूनी अंगों में से एक है, जो पेट के दाहिनी तरफ मौजूद होता है। लिवर शरीर के लिए कई जरूरी काम करता है जैसे पाचन क्रिया चलाने के लिए पित्तरस (Bile) बनाना और रक्त को साफ करना आदि। हेपेटाइटिस बी के कारण लिवर में सूजन व लालिमा आ जाती है और उसके सामान्य रूप से काम न कर पाने के कारण रक्त साफ नहीं हो पाता है और अनेक स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो जाती हैं। यह एक वायरल इन्फेक्शन है और समय पर वैक्सीन करवाकर इससे बचाव किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक हेपेटाइटिस बी का कोई स्थायी इलाज नहीं मिल पाया है, लेकिन दवाओं की मदद से इसके लक्षणों को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।
हेपेटाइटिस बी की गंभीरता के अनुसार उसे दो अलग-अलग प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है, जिन्हें एक्यूट हेपेटाइटिस बी और क्रोनिक हेपेटाइटिस बी के नाम से जाना जाता है। इनके बारे में निम्न जानकारी दी गई है -
एक्यूट हेपेटाइटिस बी - अगर हेपेटाइटिस बी के दौरान लिवर में होने वाला संक्रमण छह महीने तक ही रह पाता है, तो यह एक्यूट हेपेटाइटिस बी होता है।
क्रोनिक हेपेटाइटिस बी - अगर लिवर का संक्रमण छह महीने से अधिक समय तक रहता है और बिना इलाज से यह ठीक न हो पाए तो इसे क्रोनिक हेपेटाइटिस बी कहा जाता है।
हेपेटाइटिस बी के लक्षण
हेपेटाइटिस बी के दौरान विकसित होने वाले लक्षण सामान्य से गंभीर हो सकते हैं। हेपेटाइटिस बी के लक्षणों की गंभीरता आमतौर पर व्यक्ति की उम्र पर निर्भर करती है। हेपेटाइटिस बी ग्रस्त 5 साल से कम उम्र के बच्चों में आमतौर पर किसी प्रकार के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं और वहीं जिन वयस्कों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है उन्हें भी हो सकता है हेपेटाइटिस बी में किसी प्रकार के लक्षण दिखाई न दें। वहीं 5 साल की उम्र के बाद हेपेटाइटिस बी के 30 से 50 प्रतिशत मरीजों में कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जिनमें आमतौर पर निम्न शामिल हैं -
बुखार
त्वचा व आंखें पीली पड़ना
मतली और उल्टी
भूख न लगना
जोड़ों में दर्द
थकान
गहरे रंग का पेशाब आना
मिट्टी जैसे रंग का मल
पेट में सूजन
उलझन में रहना
जब कोई व्यक्ति हेपेटाइटिस बी के वायरस के संपर्क में आता है, तो उसके बाद लक्षण विकसित होने में लगभग तीन महीने के समय लग सकता है। हेपेटाइटिस बी के लक्षण कुछ हफ्ते रहते हैं और कुछ गंभीर मामलों में यह छह महीने या उससे भी अधिक समय तक रह सकते हैं। यदि आपको ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी महसूस हो रहा है, तो बिना देरी किए जल्द से जल्द डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।
हेपेटाइटिस बी के कारण
हेपेटाइटिस बी एक प्रकार का वायरल इंफेक्शन है, जो प्रमुख रूप से एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में फैलता है। हेपेटाइटिस बी का वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले द्रव्य पदार्थों में पाया जाता है, जैसै थूक, लार, बलगम और यौन अंगों से निकलने वाले द्रव आदि। जब कोई स्वस्थ व्यक्ति संक्रमित व्यक्ति के शरीर के द्रव्यों के संपर्क में आता है, तो वह भी हेपेटाइटिस बी से संक्रमित हो जाता है। हेपेटाइटिस बी ज्यादातर मामलों में निम्न तरीके से फैलता है -
संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किए गए टूथब्रश या रेजर का इस्तेमाल करना
अस्पताल में एक ही इंजेक्शन सुई का इस्तेमाल करना
संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाना
हालांकि, हेपेटाइटिस बी से ग्रसित व्यक्ति के सामान्य रूप से संपर्क में आने से वायरस नहीं फैलता है। उदाहरण के लिए हेपेटाइटिस बी से संक्रमित व्यक्ति से हाथ मिलाना या गले मिलना आदि के दौरान हेपेटाइटिस बी नहीं फैलता है।
हेपेटाइटिस बी के जोखिम कारक
कुछ स्थितियों में हेपेटाइटिस बी होने का खतरा बढ़ जाता है, जिनमें निम्न शामिल हैं -
हेपेटाइटिस बी से संक्रमित व्यक्ति के पास रहने वाले लोग
संक्रमित मां के गर्भ में पल रहा बच्चा
एक से अधिक यौन साथियों के साथ असुरक्षित यौन संबंध
इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लेने वाले लोग (जो दवाएं प्रतिरक्षा प्रणाली दबा देती हैं)
जो लोग पहले से ही डायलिसिस पर हैं
हेपेटाइटिस बी का निदान
हेपेटाइटिस बी का निदान करने के लिए डॉक्टर आपसे आपके लक्षणों के बारे में पूछते हैं और साथ ही आपके परिवार की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी भी लेते हैं। इस दौरान यदि डॉक्टर को लगता है कि आप हेपेटाइटिस बी से संक्रमित हो सकते हैं, तो पुष्टि करने के लिए कुछ अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -
ब्लड टेस्ट - इसकी मदद से व्यक्ति के रक्त में एंटीबॉडीज की जांच की जाती हैं। ये एंटीबॉडी एक खास प्रकार का पदार्थ होते हैं, जिन्हें प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा वायरस के रिस्पॉन्स में बनाया जाता है।
अल्ट्रासाउंड - इस इमेजिंग स्कैन की मदद से लिवर की संरचना की जांच की जाती है। अगर लिवर में सूजन, लालिमा या अन्य कोई समस्या है, तो अल्ट्रासाउंड स्कैन की मदद से इसका पता लगाया जा सकता है।
बायोप्सी - जिन लोगों को हेपेटाइटिस बी होने का खतरा अधिक रहता है, उनमें स्थिति का निदान करने के लिए बायोप्सी भी की जा सकती है। इस दौरान विशेष उपकरणों की मदद से लिवर से ऊतक का एक छोटा सा टुकड़ा सैंपल के रूप में निकाल लिया जाता है और फिर उसकी जांच की जाती है।
हेपेटाइटिस बी की रोकथाम
हेपेटाइटिस बी से बचाव करने सबसे अच्छा तरीका उसका टीकाकरण करवाना है। हालांकि, इसके अलावा भी कुछ बातों का ध्यान रखकर हेपेटाइटिस बी की रोकथाम की जा सकती है -
हेपेटाइटिस बी के मरीज के शारीरिक द्रव्यों की सफाई आदि करते समय डिस्पोजेबल दस्ताने पहनें
इंजेक्शन के लिए हमेशा नए सीरिंज और सुई का इस्तेमाल करें या फिर पहले इस्तेमाल की गई सुई व सीरिंज को स्टेराइल कर लें
टैटू या त्वचा छिदवाते समय ध्यान रखें कि सुई को पहले स्टेराइल किया जा चुका है।
एक से अधिक यौन साथियों के साथ असुरक्षित यौन संबंध न बनाएं
हेपेटाइटिस बी का इलाज
अभी तक हेपेटाइटिस बी का स्थायी इलाज नहीं मिल पाया है, लेकिन उपलब्ध उपचार विकल्पों की मदद से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और इसे गंभीर होने से भी रोका जा सकता है। हेपेटाइटिस बी का इलाज आमतौर पर बात पर निर्भर करता है, कि व्यक्ति कितने समय पहले हेपेटाइटिस बी वायरस के संपर्क में आया है। हेपेटाइटिस बी के इलाज में आमतौर पर निम्न शामिल है -
हाल ही में वायरस के संपर्क में आए लोग - यदि कोई व्यक्ति हाल ही में हेपेटाइटिस बी वायरस के संपर्क में आया है, तो इमरजेंसी ट्रीटमेंट चलाया जाता है, जिसकी मदद से संक्रमण फैलने से रोकने की कोशिश की जाती है।
एक्यूट हेपेटाइटिस बी से ग्रसित लोग - इस स्थिति में इलाज का मुख्य लक्ष्य लक्षणों को नियंत्रित करना होता है। इस दौरान दी जाने वाली दवाएं लक्षणों को बढ़ने से रोकती हैं और साथ ही वायरस से लड़ने के लिए शरीर की मदद भी करती हैं। दवाओं के साथ-साथ मरीज के आहार में भी बदलाव कर देते हैं और उसे पीने के लिए पर्याप्त तरल पेय पदार्थ देते हैं।
क्रोनिक हेपेटाइटिस बी से ग्रसित लोगों का इलाज - इस दौरान मरीज को कुछ खास दवाएं दी जाती हैं, जो वायरस को बढ़ने से रोकती हैं और साथ ही हेपेटाइटिस बी के कारण लिवर को क्षतिग्रस्त होने से भी बचाती हैं। क्रोनिक हेपेटाइटिस बी के दौरान आमतौर पर एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है और साथ ही मरीज को महसूस हो रहे लक्षणों के अनुसार कुछ अन्य दवाएं भी दी जा सकती हैं।
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हेपेटाइटिस की बीमारी खतरनाक बीमारी है। कई बार Viral Hepatitis की वजह से लिवर का कैंसर भी हो जाता है। इस बीमारी से बचाव ही इसका इलाज है। आज ‘वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे 2021’ के मौके पर सर गंगा राम हॉस्पिटल (नई दिल्ली) के गैस्ट्रोएन्टरोलॉजिस्ट डॉ. पीयूष रंजन हमें लिवर से जुड़ी इस गंभीर बीमारी के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।
हर साल 10 लाख लोग हेपेटाइटिस बी के कारण मरते हैं। संक्रमित व्यक्ति से यह रोग दूसरों में भी फैल सकता है। इसके बावजूद लोग इसे लेकर उतने गंभीर नहीं हैं जितना होना चाहिए। हेपेटाइटिस के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए हर साल 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे (World Hepatitis Day) मनाया जाता है। आज इस मौके पर हम आपको हेपेटाइटिस बी से संबंधित जरूरी बातें बता रहे हैं साथ ही यह भी जानेंगे कि हेपेटाइटिस बी का इलाज किस स्तर तक संभव है।
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हर साल वायरल हेपेटाइटिस के कारण लगभग 2,50,000 लोगों की मृत्यु हो जाती है। वायरल हेपेटाइटिस अब तीन घातक संक्रामक बीमारियों- एचआईवी/एड्स, मलेरिया और टीबी के समकक्ष है।
हेपेटाइटिस मुख्य रूप से पांच प्रकार का होता है- ए, बी, सी, डी और ई। यह जानलेवा भी हो सकता है। लाखों लोग हेपेटाइटिस बी और सी के कारण गंभीर बीमारी का शिकार हैं, जो लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का रूप ले सकता है। हालांकि, समय पर निदान के द्वारा 80 फीसदी मामलों में इसका इलाज संभव है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में हेपेटाइटिस के लिए गुडविल एम्बेसडर अमिताभ बच्चन ने वायरल हेपेटाइटिस के लिए भारत की राष्ट्रीय कार्य योजना का स्वागत किया है।
हेपेटाइटिस बी असुरक्षित तरीके से शारीरिक संबध के माध्यम से भी फैलता है। हेपेटाइटिस बी के लिए टीके उपलब्ध हैं, लेकिन हेपेटाइटिस सी के लिए अभी कोई भी ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं हैं।
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