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वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे 2023: हर साल पूरी दुनिया में वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे मनाया जाता है जिसके पीछे मुख्य उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है। यह दिन डॉक्टर बारूक ब्लम वर्ग के जन्मदिवस पर मनाया जाता है। डॉ बारूक ने इस खतरनाक बीमारी से लोगों को बचाने के लिए एक टीका आविष्कार किया था। हेपेटाइटिस बीमारी 5 तरह की होती है इसमें से सबसे ज्यादा खतरनाक हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी को माना जाता है। यह दोनों ही बीमारी समय पर इलाज न मिलने पर घातक साबित हो सकती हैं, आंकड़े बताते हैं कि पूरी दुनिया में कम से कम तीन सौ मिलियन से अधिक हेपेटाइटिस बी और सी से ग्रसित लोग हैं।
यह एक वायरस से फैलने वाली बीमारी है जिसमें लिवर पर असर होता है यहां तक कि इस बीमारी के कारण लिवर कैंसर या सिरोसिस भी हो सकता है। हेपेटाइटिस बी वैजाइनल फ्लूइड, सीमन, ब्लड या सलाइवा से फैल सकती है जन्म के तुरंत बाद नवजात को इस बीमारी से सुरक्षा देने के लिए हेपेटाइटिस बी का वैक्सीन दिया जाता है।
यह है ब्लड से फैलने वाली बीमारी है जोकि ब्लड ट्रांसफ्यूजन या किसी भी एक व्यक्ति के प्रयोग किए इंजेक्शन से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है। यदि बच्चे के जन्म के दौरान मां इस बीमारी से संक्रमित है तो बच्चे को हो सकती है अथवा सेक्सुअल रिलेशन के दौरान संपर्क में आने से भी यह बीमारी फैल सकती है।
हेपेटाइटिस बी और सी दोनों ही वायरस से फैलने वाली या एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान अथवा सेक्सुअल रिलेशन के दौरान फैलने वाली बीमारियां हैं। हेपेटाइटिस बी सबसे आम बीमारी है आंकड़ों के मुताबिक यह हेपेटाइटिस सी के मुकाबले ज्यादा फैलती है।
दोनों ही बीमारियां इलाज न मिलने पर लीवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं और लिवर कैंसर का कारण भी बन सकती हैं।