वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे 2018: हेपेटाइटिस वायरस बन सकता है लीवर कैंसर और मृत्यु का कारण

भारत की 3-5% जनसंख्या हेपेटाइटिस बी संक्रमण का शिकार

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Written By: Sadhna Tiwari | Published : July 28, 2018 9:50 AM IST

28 जुलाई को मनाया जाता है  वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे 2018

एक्सपर्ट से जानें क्या है हेपेटाइटिस

इस विश्व हेपेटाइटिस डे पर क्लिनिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. श्वेता गुप्ता, फर्टिलिटी सोल्यूशन मेडिकवर फर्टिलिटी का कहना है,’’सरल शब्दों में हेपेटाइटिस का अर्थ है लिवर में सूजन। अगर लिवर में सूजन या लिवर डैमेज होता है तो उसके काम करने की शमता प्रभावित होती है। वायरल इंफेक्शन, अधिक मात्रा में शराब पीने, या बिना डॉक्टर की सलाह से दवा लेना हेपेटाइटिस के कारण बन सकते है। भारत में लाखों लोगों को हेपेटाइटिस बी और सी की समस्या है और ज़्यादातर लोग इन्ही से प्रभावित हैं। ये इंफेक्टेड ब्लड के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं। हेपेटाइटिस बी असुरक्षित सेक्स के माध्यम से भी फैलता हैं। हेपेटाइटिस बी के लिए टीके उपलब्ध हैं, लेकिन हेपेटाइटिस सी के लिए अभी कोई भी ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं हैं। हेपेटाइटिस के वायरस पांच प्रकार के होते है लेकिन हेपेटाइटिस बी का वायरस शुक्राणु गतिशीलता को कम करने और पुरुषों में प्रजनन क्षमता को कम करता है। हालांकि,  महिलाओं में यह ट्यूबल और गर्भाशय के बांझपन के जोखिम से भी जुड़ा हुआ है। अगर आपका साथी हेपेटाइटिस बी से पीड़ित है तो इसके जोखिम को कम करने के लिए आपको तुरंत किसी डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।

भारत की 3-5% जनसंख्या हेपेटाइटिस बी संक्रमण का शिकार

डॉ. मोनिका जैन (वरिष्ठ सलाहकार, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलोजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट) के अनुसार, "भारत उन 11 देशों में से एक है, जो पूरे विश्व में हेपेटाइटिस के बोझ का लगभग 50% भार उठाते है। भारत में, वायरल हेपेटाइटिस एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है जिसमे हेपेटाइटिस बी की एक अहम भूमिका है। भारतीय जनसंख्या का 3-5% हिस्सा हेपेटाइटिस बी संक्रमण से जूझ रहा है। भारत में हेपेटाइटिस फैलने का प्रमुख कारण मां से बच्चे में वायरस का संचारित होना है।  संचरण के अन्य मार्ग असुरक्षित रक्त संक्रमण, प्रतिरक्षाविज्ञानी उत्पादों, असुरक्षित सेक्स, असुरक्षित सुइयों और सीरिंज का इस्तेमाल हैं। इस बीमारी के सबसे आम लक्षणों में त्वचा या आंखों की सफेद हिस्से का पीला पड़ जाना, बुखार,  थकान( जो हफ्तों या महीनों के लिए बनी रहती है), भूख की कमी, मतली और उल्टी आदि है। इन लक्षणों को कभी भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। लोगों के लिए मेरी सलाह यह है कि उन्हें इस घातक बीमारी के बारे में जागरूक होना बेहद आवश्यक है और इसके लिए सुरक्षात्मक उपायों को अपनाना चाहिए। इसी माध्यम से हम मिलकर हेपेटाइटिस का खात्मा करने में सफल हो सकते हैं।"

धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसलटैंट डॉ. गौरव जैन का कहना है कि "हेपेटाइटिस बी का वाइरस का प्रकोप शरीर के लिए बेहद खतरनाक हैं और साथ ही इसके फैलने का खतरा भी अधिक हैं। यह इंफेक्टेड ब्लड, असुरक्षित सेक्स और इन्फेक्टेड व्यक्ति के शरीर से निकले किसी अन्य तरल पदार्थ से भी फ़ैल सकता हैं। एक इंजेक्शन एक से ज्यादा बार प्रयोग में लाना हेपेटाइटिस बी और सी दोनों वायरस के होने की संभावना बड़ा सकता हैं। शरीर पर टैटू बनवाते समय भी यह संक्रमित सुई द्वारा शरीर में प्रवेश कर सकता है। जन्म के समय यदि मां के शरीर में ये वायरस है तो होने वाले बच्चे को भी हेपेटाइटिस होने की सम्भावना बनी रहती हैं। इस बीमारी का हमला लीवर पर सबसे ज्यादा प्रभाव डालता हैं, जिससे लीवर कैंसर, लीवर फेलियर, लीवर सिरोसिस आदि जैसे कई बीमारियां होने की सम्भावना बन जाती हैं। भारत में लगभग 40 मिलियन हेपेटाइटिस बी और 6-12 मिलियन हेपेटाइटिस सी से ग्रस्त लोग है।"

डॉ. नृपेन सैकिया, सीनियर कंसलटेंट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी, पीएसआरआई अस्पताल बताते है कि,"हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी वायरस आमतौर पर क्रोनिक हेपेटाइटिस का कारण बनता है,  जो लीवर सिरोसिस, लीवर कैंसर और मृत्यु तक का कारण बन सकता है। लगभग 4% आबादी हेपेटाइटिस बी वायरस से संक्रमित हैं और 8.5-12 मिलियन लोग भारत में हेपेटाइटिस सी वायरस से संक्रमित हैं। लगभग 30 % लिवर सिरोसिस हेपेटाइटिस बी के कारण होता है और 10-12% सिरोसिस भारत में हेपेटाइटिस सी वायरस संक्रमण के कारण होता है। इसलिए हेपेटाइटिस बी एंड सी संबंधित लीवर रोगों की रोकथाम के लिए समय पर बीमारी का पता लगाना और जल्द उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण है।"

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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